खुली नीलामी से बढ़ी पारदर्शिता, 10,100 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा भाव; किसानों ने कहा—अब खराब क्वालिटी का लहसुन भी नहीं करना पड़ रहा बर्बाद

दमोह, 14 अप्रैल। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी पहल अब दमोह में असर दिखा रही है। जिला मुख्यालय स्थित थोक सब्जी मंडी में पहली बार लहसुन की सरकारी खुली बोली प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर और पारदर्शी दाम मिल रहा है।मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर कृषि उपज मंडी दमोह में यह व्यवस्था लागू की गई है। मंडी सचिव घनश्याम प्रसाद मुंडा के मार्गदर्शन में बीते तीन दिनों से लहसुन की खुली नीलामी की जा रही है, जिसमें व्यापारी प्रतिस्पर्धा के आधार पर बोली लगा रहे हैं और तय दर पर किसानों को भुगतान कर रहे हैं।
तीन श्रेणियों में हो रही बिक्री
थोक सब्जी मंडी प्रभारी कैलाश प्रसाद दुबे ने बताया कि लहसुन को गुणवत्ता के आधार पर तीन श्रेणियों—न्यूनतम, मध्यम और उच्चतम—में बांटा गया है। इसी के आधार पर बोली लगाई जाती है।
13 और 14 अप्रैल को लहसुन के भाव इस प्रकार रहे—
- न्यूनतम: ₹3200 प्रति क्विंटल
- मध्यम: ₹8100 प्रति क्विंटल
- उच्चतम: ₹10,100 प्रति क्विंटल
किसानों ने बताया—पहले फेंकना पड़ता था लहसुन
इस नई व्यवस्था से खुश किसानों ने अपनी पुरानी समस्याएं भी साझा कीं। किसानों का कहना है कि पहले निम्न गुणवत्ता वाले लहसुन को मंडी में उचित दाम नहीं मिल पाता था।“पहले कई बार ऐसा होता था कि खराब या निम्न स्तर के लहसुन को कोई खरीददार नहीं मिलता था, मजबूरी में उसे फेंकना पड़ता था। लेकिन अब खुली बोली में उस लहसुन का भी दाम मिल रहा है,” किसानों ने बताया।किसानों का मानना है कि यह व्यवस्था उनके लिए आर्थिक रूप से काफी लाभकारी साबित हो रही है, क्योंकि अब उनकी पूरी उपज बिक पा रही है।

सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल
जहां एक ओर किसान इस नई व्यवस्था से संतुष्ट हैं, वहीं मंडी में पेयजल और छाया जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। तेज गर्मी में लंबे समय तक इंतजार करना उनके लिए मुश्किल भरा हो रहा है।
प्रशासन ने दिया भरोसा
मंडी प्रशासन का कहना है कि किसानों की सुविधाओं के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, लेकिन जहां कमी है, उसे जल्द ही दूर किया जाएगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
टीम की सक्रिय भूमिका
लहसुन की इस बोली प्रक्रिया को सफल बनाने में मंडी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान पुरुषोत्तम दुबे, पंचम आठिया, अनिल समदड़िया, नीरज ठाकुर और धर्मेंद्र पटेल लगातार सक्रिय रहे।
निष्कर्ष
दमोह में लहसुन की सरकारी खुली बोली की शुरुआत ने किसानों को न केवल बेहतर दाम दिलाया है, बल्कि उनकी पूरी उपज को बाजार में स्थान भी दिलाया है। खासतौर पर निम्न गुणवत्ता वाले लहसुन को भी अब मूल्य मिलना इस व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
