दमोह। भारत रत्न डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरे देशभर में हर्षोल्लास, श्रद्धा और सामाजिक जागरूकता के साथ मनाई गई। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के दमोह जिले में भी बाबा साहब की जयंती को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी रही।
जिला मुख्यालय दमोह में स्थित डॉ अंबेडकर प्रतिमा पर मुख्य आयोजन संपन्न हुआ। यहां दमोह सांसद राहुल सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष शिवहरे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने एकत्रित होकर बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने बाबा साहब के जीवन संघर्ष, उनके द्वारा रचित भारतीय संविधान तथा समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों को विस्तार से स्मरण किया।
इस अवसर पर कांग्रेस, बसपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने एक स्वर में उनके आदर्शों—समानता, शिक्षा और अधिकार—को समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
जयंती के पूर्व दिवस 13 अप्रैल की शाम को नगर में एक भव्य वाहन रैली निकाली गई, जिसने पूरे शहर का ध्यान आकर्षित किया। रैली में सैकड़ों की संख्या में वाहन शामिल हुए, जिनमें युवा, सामाजिक संगठन एवं विभिन्न समूहों के सदस्य उत्साहपूर्वक शामिल हुए। रैली के दौरान बाबा साहब के विचारों से जुड़े नारे गूंजते रहे, जिससे पूरे नगर का वातावरण सामाजिक चेतना से ओतप्रोत हो गया।
14 अप्रैल को जयंती के दिन सुबह से ही शहर के विभिन्न वार्डों एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग समूहों में निकलकर रैली के रूप में स्थानीय तहसील ग्राउंड पहुंचे। इस विशाल रैली में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए, जहां पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत किया गया।
तहसील ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन का स्वरूप दे दिया। मंच से विभिन्न वक्ताओं ने बाबा साहब के विचारों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताते हुए सामाजिक समरसता, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें बाबा साहब के जीवन और उनके संघर्षों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली उदीयमान प्रतिभाओं का सम्मान भी किया गया। प्रतिभाओं को सम्मानित कर उन्हें आगे बढ़ने और समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
पूरे जिले में आयोजित इन कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि डॉ भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। दमोह में मनाई गई उनकी जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, जागरूकता और प्रेरणा का सशक्त माध्यम बनकर सामने
