लगातार बढ़ रही घटनाओं से उठे सवाल, 6 माह के शावक पर वयस्क बाघ का हमला
उमरिया/बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौत और घायल होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह एक बार फिर एक बाघ शावक गंभीर हालत में घायल अवस्था में मिला, जिससे वन विभाग और प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।जानकारी के अनुसार, वन परिक्षेत्र ताला की बीट भद्रशिला (आरएफ-333) में सुबह लगभग 4:30 बजे कोलुहावाह कैंप के श्रमिकों को बाघों के बीच लड़ाई की आवाज सुनाई दी। श्रमिकों ने तत्काल इसकी सूचना अधिकारियों को दी।
उप संचालक योहन कटारा ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और पेट्रोलिंग वाहन व पैदल गश्ती दल के साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दो हाथियों की मदद से क्षेत्र की सघन तलाशी ली गई, जिसमें एक करीब 6 माह का बाघ शावक घायल अवस्था में बैठा मिला, जबकि कुछ दूरी पर एक वयस्क बाघ भी दिखाई दिया।वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और हाथियों की मदद से वयस्क बाघ को क्षेत्र से दूर खदेड़ा गया। वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर ने शावक को बेहोश कर मौके पर प्राथमिक उपचार दिया।
डॉक्टरों के अनुसार, शावक के दोनों पिछले पैरों में गंभीर चोटें हैं। उसके शरीर पर केनाइन दांतों के गहरे घाव, पीठ, गर्दन और पैरों पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही अंडकोश भी क्षतिग्रस्त मिले और आंतरिक रक्तस्राव के संकेत भी देखे गए।प्राथमिक उपचार के बाद शावक को बेहतर इलाज के लिए मुकुंदपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया है, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार जारी रहेगा।घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और आसपास के इलाके में लगातार सर्चिंग की जा रही है।
उठते सवाल:
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर 6 माह के शावक अपनी मां के साथ ही रहते हैं और बाघिन उन्हें अकेला नहीं छोड़ती। ऐसे में सवाल उठता है कि घटना के समय शावक की मां कहां थी?क्या बाघिन भी किसी संघर्ष में घायल हुई है, या वह क्षेत्र से अलग हो चुकी है? क्या प्रबंधन अब तक उसका पता नहीं लगा पाया है?लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
