21 अप्रैल को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे आवेदक; सीएमओ की अनुपस्थिति पर जताई नाराज़गी

दमोह, मंगलवार, 21 अप्रैल 2026/मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कलेक्टर भवन के निम्न तल पर सभाकक्ष में आज मंगलवार, 21 अप्रैल को साप्ताहिक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई की विशेषता यह रही कि नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अपने कार्यकाल की पहली जनसुनवाई करते हुए आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।सुबह से ही जनसुनवाई में जिले के विभिन्न हिस्सों—शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों—से बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें एवं आवेदन लेकर पहुंचे। इनमें राजस्व, नगरीय निकाय, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, सीमांकन, अतिक्रमण, पेयजल, सफाई एवं अन्य बुनियादी सेवाओं से जुड़े प्रकरण प्रमुख रूप से शामिल रहे।
सभी विभागों की मौजूदगी, कार्यालय रहे आंशिक रूप से प्रभावित
जनसुनवाई में शासन के लगभग सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासनिक दृष्टि से यह समन्वय सकारात्मक रहा, हालांकि इसके चलते कई विभागीय कार्यालयों में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित दिखाई दिया, क्योंकि अधिकांश अधिकारी जनसुनवाई में व्यस्त रहे।
नगरीय निकाय की शिकायतों का दबाव
जनसुनवाई के दौरान सर्वाधिक शिकायतें नगरीय निकाय से संबंधित सामने आईं। नालियों पर अतिक्रमण, सफाई व्यवस्था में लापरवाही, पेयजल समस्या और अन्य शहरी अव्यवस्थाओं को लेकर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बैठक के दौरान ही पूछा कि “मुख्य नगर पालिका अधिकारी कहां हैं?” कलेक्टर की सख्ती के बाद सीएमओ राजेंद्र लोधी तत्काल जनसुनवाई कक्ष में पहुंचे।
“संवेदनशील प्रशासन ही जनता का विश्वास जीतता है”
मीडिया से चर्चा करते हुए कलेक्टर यादव ने कहा,“प्रशासन की संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और जनता का विश्वास—ये तीनों किसी भी सुशासन की आधारशिला हैं। यदि लोगों को यह भरोसा नहीं होगा कि उन्हें यहां न्याय मिलेगा, तो वे अपनी समस्याएं लेकर नहीं आएंगे।”उन्होंने आगे कहा कि हर आवेदक समाधान की उम्मीद लेकर आता है और “एक छोटा सा निर्णय भी किसी व्यक्ति के जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।”
जिला स्तर तक न पहुंचे छोटी समस्याएं
कलेक्टर यादव ने जनसुनवाई के अनुभव साझा करते हुए कहा कि अधिकांश आवेदन नगरीय निकाय एवं स्थानीय स्तर की छोटी समस्याओं से जुड़े हैं, जो जिला स्तर तक नहीं आनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया,“मेरा प्रयास रहेगा कि जिस स्तर की समस्या है, उसका समाधान उसी स्तर—ग्राम पंचायत, तहसील या अनुभाग—पर सुनिश्चित हो, ताकि आमजन को जिला मुख्यालय तक भटकना न पड़े।”
अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश
कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राप्त आवेदनों पर गंभीरता से कार्य करें और समय-सीमा में उनका निराकरण सुनिश्चित करें।विशेष रूप से सीमांकन, बंटवारा, अतिक्रमण हटाने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व प्रकरणों और नगरीय सेवाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय स्तर पर शिविर लगाने की पहल
कलेक्टर ने बताया कि वे शीघ्र ही राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें निर्देशित करेंगे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष शिविर (कैंप) आयोजित करें।उन्होंने कहा,“यह जरूरी नहीं कि लोग केवल मंगलवार को ही जनसुनवाई में आएं। हमारी प्राथमिकता यह है कि उनकी समस्याओं का समाधान उनके क्षेत्र में ही हो जाए।”
नगर पालिका को सख्त चेतावनी
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने कहा कि नालियों पर अतिक्रमण, नियमित सफाई का अभाव और बुनियादी सेवाओं में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नगरीय निकाय तत्काल विशेष अभियान चलाकर समस्याओं का निराकरण करे और इसके लिए अलग से शिविर लगाए जाएं।
प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार का संकेत
कलेक्टर की इस पहली जनसुनवाई को प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों की उपस्थिति, त्वरित निर्देश और स्थानीय स्तर पर समाधान की रणनीति से आने वाले समय में व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
ये अधिकारी रहे उपस्थित
जनसुनवाई में अपर कलेक्टर (एडीएम) मीना मसराम, जनसंपर्क अधिकारी वाए ए कुरैशी सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे और आवेदनों के निराकरण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
