दमोह/आज 26 अप्रैल रविवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा सर्वोपरि है और उपार्जन केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें तथा भुगतान को लेकर उन्हें किसी प्रकार की चिंता न रहे।
कलेक्टर ने कहा कि तौल के तुरंत बाद किसानों को पक्की रसीद उपलब्ध कराई जाए, जिससे खरीदी की पारदर्शिता बनी रहे और भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य किसानों को सहज, पारदर्शी और समयबद्ध उपार्जन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
बैठक में उपार्जन केंद्रों की वर्तमान स्थिति, कमियां और किसानों से मिल रहे फीडबैक की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त बारदाना, तौल कांटे, पल्लेदार, छाया और पेयजल की समुचित व्यवस्था रहे, ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने बताया कि पहले प्रति केंद्र 1000 मीट्रिक टन प्रतिदिन खरीदी का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर 2250 मीट्रिक टन कर दिया गया है। ऐसे में उसी अनुरूप व्यवस्थाएं भी मजबूत की जाएं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा गेहूं खरीदी का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले का कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज की सही मात्रा ही खरीदी जाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
परिवहन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने ट्रांसपोर्टरों को खरीदी के बाद तत्काल उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि उपार्जित गेहूं केंद्रों पर लंबे समय तक जमा न रहे और व्यवस्थाएं बाधित न हों। साथ ही कंट्रोल रूम को सक्रिय रखते हुए प्राप्त शिकायतों का तत्काल निराकरण करने को कहा गया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि समस्या पूरी तरह समाप्त हुई है।
सर्वेयरों को निर्देशित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शासन द्वारा तय मानकों के अनुसार ही उपज की जांच की जाए। उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से कई मानकों में छूट दी गई है, जिसका लाभ सीधे किसानों को मिलना चाहिए।
कलेक्टर ने बैठक में दोहराया कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को सम्मानजनक और सुगम वातावरण मिलना चाहिए। यदि कहीं भी लापरवाही पाई गई तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
