कहा— महिलाओं को अधिकार मिलने से रोकने वालों को देश की मातृशक्ति देगी जवाब, यह केवल बिल नहीं बल्कि आधी आबादी के सम्मान का प्रश्न
( डॉ. एल.एन. वैष्णव )
दमोह। देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी में बराबरी दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। लोकसभा में बहुचर्चित इस विधेयक को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने और सदन में पारित नहीं हो पाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे केवल एक संसदीय प्रक्रिया का विषय न मानते हुए सीधे महिलाओं के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान से जोड़ दिया है। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दलों ने राजनीतिक स्वार्थवश देश की मातृशक्ति को उसका संवैधानिक अधिकार देने में बाधा खड़ी की है। यही कारण है कि अब भाजपा पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर आक्रामक जनसंपर्क अभियान चला रही है।
इसी राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत रविवार को मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में भाजपा की प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह ने विस्तृत पत्रकार वार्ता कर नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला आरक्षण और विपक्ष की भूमिका पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक बिल का गिरना नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के सपनों को रोकने का प्रयास है। भारतीय जनता पार्टी इसे महिलाओं के आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा मानती है और इसीलिए अब पार्टी गांव-गांव, शहर-शहर, घर-घर जाकर महिलाओं को यह बताएगी कि उनके अधिकारों की राह में कौन खड़ा है।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम, क्यों बना राष्ट्रीय बहस का मुद्दा
अर्चना सिंह ने पत्रकार वार्ता में विस्तार से बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मूल उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना है, ताकि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके। लंबे समय से महिला आरक्षण की मांग विभिन्न मंचों पर उठती रही, लेकिन निर्णायक पहल भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब देश की मातृशक्ति को प्रतीकात्मक सम्मान नहीं बल्कि वास्तविक राजनीतिक हिस्सेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या आज भी अपेक्षाकृत कम है। जबकि देश की सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक व्यवस्था की रीढ़ महिलाएं हैं। ऐसे में राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सोच का परिणाम था, लेकिन विपक्षी दलों ने इस ऐतिहासिक अवसर को समर्थन देने के बजाय राजनीतिक गणित में उलझाकर महिलाओं की आशाओं पर आघात किया।
भाजपा का आरोप— विपक्ष ने किया देश की नारियों का अपमान
प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोकसभा में तीन दिनों तक चली बहस के दौरान भाजपा ने पूरी गंभीरता से महिलाओं के हित में अपना पक्ष रखा, लेकिन विपक्ष ने एकजुटता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि सदन में जिस प्रकार इस विधेयक को लेकर भ्रम, शर्तें, टालमटोल और राजनीतिक आपत्तियां खड़ी की गईं, उससे साफ है कि विपक्ष महिलाओं को अधिकार देने के प्रश्न पर ईमानदार नहीं है।
उन्होंने कहा, “यह बिल किसी पार्टी का नहीं था, यह देश की मातृशक्ति का बिल था। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं या इसे पारित होने से रोकने में भूमिका निभा रहे हैं, उन्होंने सीधे-सीधे देश की महिलाओं का अपमान किया है। भारतीय नारी सब कुछ सह सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।”
अर्चना सिंह ने कहा कि भाजपा अब इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाएगी। महिलाओं को बताया जाएगा कि जो दल मंचों से महिला सम्मान की बातें करते हैं, वही संसद के भीतर उनके अधिकारों के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए।
संख्या बल कम होने के बावजूद बिल क्यों लाया गया? भाजपा ने दिया जवाब
पत्रकारों ने जब सवाल किया कि भारतीय जनता पार्टी को पहले से अंदेशा था कि संख्या बल पर्याप्त नहीं है, फिर भी इस विधेयक को सदन में लाने का निर्णय क्यों लिया गया? इस पर अर्चना सिंह ने कहा कि भाजपा का उद्देश्य केवल विधायी अंकगणित नहीं था, बल्कि देश के सामने विपक्ष की वास्तविक सोच उजागर करना भी था।
उन्होंने कहा कि कई बार संसद में प्रस्तुत किया गया विधेयक राजनीतिक दलों की नीयत का आईना बन जाता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ भी यही हुआ। भाजपा चाहती थी कि देश देखे कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करने वाले दल जब निर्णायक अवसर आता है तो किस प्रकार पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक ने देश की जनता के सामने यह साफ कर दिया कि महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण की पक्षधर कौन सी पार्टी है।
महिलाओं के अधिकार के लिए सत्ता और संगठन बना रहे आगे की रणनीति
अर्चना सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद भाजपा अब दो मोर्चों पर काम कर रही है— एक तरफ सरकार संवैधानिक और संसदीय विकल्पों पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर संगठन व्यापक जनजागरण अभियान के माध्यम से महिलाओं को जागरूक कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता महिलाओं के बीच जाकर उन्हें बता रहे हैं कि राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी क्यों जरूरी है और किन कारणों से यह अधिकार अब तक अधूरा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों का विषय नहीं हो सकता। पंचायत से संसद तक महिलाओं को मजबूत प्रतिनिधित्व देना ही सच्चे अर्थों में लोकतंत्र का विस्तार है। भाजपा इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संकल्पित है।
महिला आरक्षण में आरक्षण पर भी सरकार कर रही विचार
पत्रकार वार्ता के दौरान महिला आरक्षण में वर्गवार उप-आरक्षण को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर अर्चना सिंह ने कहा कि यह सामाजिक संतुलन और समावेशिता से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने माना कि महिला को केवल महिला के रूप में देखा जाना चाहिए, लेकिन देश की सामाजिक संरचना, पिछड़े वर्गों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व के प्रश्न को ध्यान में रखते हुए सरकार और संगठन विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व को करना है।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस विषय पर जल्दबाजी में नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक सहमति के साथ आगे बढ़ना चाहती है, ताकि महिलाओं के आरक्षण का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
बंगाल चुनाव में दिखेगा असर, महिलाओं का रुझान भाजपा की ओर
पश्चिम बंगाल चुनाव पर इस पूरे घटनाक्रम के असर को लेकर पूछे गए सवाल पर अर्चना सिंह ने कहा कि महिलाओं के अधिकार का मुद्दा बंगाल सहित पूरे देश में भाजपा को राजनीतिक मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान महिलाओं में जिस प्रकार उत्साह देखा गया और भाजपा के पक्ष में जो वातावरण बन रहा है, उससे स्पष्ट संकेत हैं कि महिलाओं का विश्वास भाजपा की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जो दल महिलाओं के सम्मान के प्रश्न पर असंवेदनशील रहे हैं, उन्हें चुनाव में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। देश की नारी अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक मतदाता के रूप में सामने आ रही है।
दमोह से शुरू हुआ महिला जनजागरण का संदेश
दमोह में आयोजित यह पत्रकार वार्ता केवल एक औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि भाजपा के आगामी महिला जनसंपर्क अभियान की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। पार्टी अब जिले भर में महिला सम्मेलन, संवाद कार्यक्रम, चौपाल, प्रबुद्धजन बैठक और घर-घर संपर्क अभियान चलाने की तैयारी में है। उद्देश्य स्पष्ट है— नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के आत्मसम्मान और राजनीतिक अधिकार के रूप में स्थापित करना।
पत्रकार वार्ता में जिला पंचायत दमोह की अध्यक्ष रंजीता पटेल, उपाध्यक्ष डॉ. मंजू कटारे तथा भाजपा पदाधिकारी सुमन उपाध्याय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी और विपक्ष की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम भाजपा के लिए केवल संसदीय बहस का विषय नहीं रहेगा, बल्कि यह महिलाओं के बीच भावनात्मक और राजनीतिक संवाद का बड़ा हथियार बनेगा। दमोह की यह पत्रकार वार्ता उसी रणनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
