हिना खान के नेतृत्व में मुस्लिम समाज पहुंचा कलेक्ट्रेट; सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठे बड़े सवाल
दमोह/आज 28 अप्रैल मंगलवार को दमोह शहर के बजरिया वार्ड क्रमांक-8 स्थित नूरी नगर क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। महाकाली मंदिर के पास सीता बावरी रोड स्थित किराए के मकान में अकेली रह रही करीब 60 वर्षीय वृद्ध महिला शरीफन बी अम्मा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलीं। महिला के मुँह में कपड़ा ठूंसा होना, कपड़ों का अस्त-व्यस्त होना तथा कमरे का दरवाजा बाहर से अटका मिलना इस पूरे मामले को बेहद रहस्यमय और गंभीर बना रहा है। घटना ने जहां एक ओर हत्या अथवा अन्य आपराधिक आशंकाओं को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर पूरे क्षेत्र की महिलाओं में भय और आक्रोश का वातावरण पैदा कर दिया।
जानकारी के अनुसार शरीफन बी अम्मा पिछले करीब डेढ़ से दो वर्षों से मुजीब खान के मकान में अकेले किराए से रह रही थीं। पति की मृत्यु के बाद वे बीड़ी बनाकर और वृद्धावस्था पेंशन के सहारे जीवन यापन कर रही थीं। रोज सुबह जल्दी उठने वाली अम्मा जब आज काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकलीं तो पड़ोसियों को संदेह हुआ। लोगों ने देखा कि दरवाजा बाहर से अटका हुआ है। धक्का देकर दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। महिला मृत पड़ी थीं, मुँह में कपड़ा ठूंसा था और कपड़े अस्त-व्यस्त हालत में थे।
घटना की सूचना तत्काल वार्ड पार्षद हिना खान को दी गई। मौके पर पहुंचीं हिना खान ने भयावह स्थिति देखी और तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचित किया। उन्होंने बताया कि शरीफन बी अम्मा अत्यंत शांत स्वभाव की थीं, उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। ऐसे में इस तरह की संदिग्ध मौत ने पूरे मोहल्ले की महिलाओं को डरा दिया है।
सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस तथा दमोह सीएसपी एच.आर. पांडे मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध मानते हुए मर्ग कायम किया, कमरे को सुरक्षित किया और सागर से एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड तथा फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों को बुलाया। सीएसपी पांडे ने कहा कि घटनास्थल का हर पहलू से निरीक्षण किया जा रहा है, पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट होगा।
घटना के बाद महिलाओं में उभरा असुरक्षा का भय
शरीफन बी अम्मा की संदिग्ध मौत ने नूरी नगर, बजरिया और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के भीतर गहरी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी। लोगों का कहना था कि यदि अकेली रह रही बुजुर्ग महिला अपने ही कमरे में इस तरह संदिग्ध हालत में मृत मिल सकती है तो क्षेत्र की अन्य महिलाएं कैसे सुरक्षित महसूस करेंगी। यही कारण रहा कि घटना के कुछ ही घंटों बाद वार्ड पार्षद हिना खान के नेतृत्व में मुस्लिम समाज की बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं।
कलेक्ट्रेट पहुंचे इस महिला समूह ने प्रशासन के सामने सुरक्षा को लेकर कई तीखे सवाल खड़े किए। महिलाओं का कहना था कि नूरी नगर और बजरिया क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से उपेक्षित हैं। गलियों और तिराहों पर अंधेरा रहता है, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है और पुलिस चौकी भी दूर होने के कारण तत्काल सहायता नहीं मिल पाती। महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि शरीफन बी अम्मा की मौत ने उन्हें भीतर तक डरा दिया है।
सीसीटीवी कैमरे और पुलिस चौकी की उठी मांग
पार्षद हिना खान ने महिलाओं के साथ प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि वार्ड के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख तिराहों और चौराहों पर तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। साथ ही नूरी नगर-बजरिया क्षेत्र में स्थायी पुलिस चौकी बनाई जाए तथा रात्रिकालीन पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। महिलाओं का कहना था कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने से ज्यादा जरूरी है कि अपराध की संभावना को पहले ही रोका जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि क्षेत्र की महिलाओं और बुजुर्गों के मन में जो भय बैठ गया है, उसे केवल आश्वासन से नहीं बल्कि ठोस सुरक्षा इंतजामों से दूर किया जा सकता है। महिलाओं का स्वर साफ था—“आज शरीफन बी अम्मा हैं, कल कोई और भी हो सकता है।”
डिप्टी कलेक्टर ने लिया ज्ञापन, लेकिन प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठे सवाल

महिलाओं द्वारा सौंपा गया शिकायत ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर आर.एल. बागरी ने प्राप्त किया। उन्होंने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में एक ऐसा दृश्य भी देखने मिला जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्टर कार्यालय के गेट पर काफी देर तक खड़ी रहीं। वे किसी जिम्मेदार अधिकारी के बाहर आकर उनकी बात सुनने और ज्ञापन लेने का इंतजार कर रही थीं। महिलाएं डरी हुई थीं, आक्रोशित थीं और प्रशासन से संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद लेकर पहुंची थीं। इसी बीच प्रभारी एसडीएम रचना प्रजापति वहां से निकलीं, लेकिन उपस्थित महिलाओं के समूह और उनकी प्रतीक्षा को लगभग अनदेखा कर आगे बढ़ गईं। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
कलेक्ट्रेट परिसर में लोगों के बीच यह सवाल गूंजता रहा कि जब एक संवेदनशील आपराधिक घटना के बाद सुरक्षा मांगने महिलाएं स्वयं प्रशासन के दरवाजे पर खड़ी हों, तब जिम्मेदार अधिकारी का यह रवैया क्या प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिचायक नहीं है? उपस्थित लोगों ने इसे एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह के रूप में देखा।
अब पुलिस जांच के साथ प्रशासन की परीक्षा भी
नूरी नगर की यह रहस्यमयी मौत अब केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं रह गई है। यह घटना दमोह पुलिस की विवेचना के साथ-साथ प्रशासन की संवेदनशीलता, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की भी परीक्षा बन गई है। एक ओर पुलिस एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के जरिए शरीफन बी अम्मा की मौत का सच तलाश रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि क्या इस घटना के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की चर्चा बनकर रह जाएगा।
फिलहाल दमोह शहर में दो प्रश्न सबसे अधिक गूंज रहे हैं—शरीफन बी अम्मा की मौत के पीछे कौन सा सच छिपा है? और क्या प्रशासन महिलाओं के भय को गंभीरता से सुनेगा?
