दमोह, 28 अप्रैल /कृषि आदान विक्रेता संघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को दमोह जिले में खाद, बीज, कीटनाशक एवं कृषि उपयोगी सामग्री से जुड़े व्यापारियों ने पूर्ण बंद रखकर अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक कृषि आदान व्यवसाय से जुड़े प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे जिलेभर में इस आंदोलन का व्यापक असर दिखाई दिया। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजते हुए अपनी समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की।
संघ के जिला अध्यक्ष प्रमोद बजाज ने बताया कि यह बंद राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी तथा प्रांतीय अध्यक्ष मान सिंह राजपूत के निर्देशन में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि आदान विक्रेताओं को लंबे समय से अनेक प्रशासनिक, तकनीकी एवं व्यवसायिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार शासन और विभागीय अधिकारियों के समक्ष मुद्दे उठाए जाने के बावजूद जब समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठे, तब संगठन को राष्ट्रव्यापी बंद जैसा निर्णय लेना पड़ा।
जिलेभर में एकजुट दिखे व्यापारी, प्रतिष्ठानों पर लटके ताले
मंगलवार सुबह से ही दमोह शहर के खाद-बीज बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। कृषि आदान विक्रेता संघ से जुड़े व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर ताले डालकर बंद को सफल बनाया। सामान्य दिनों में किसानों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले कृषि सामग्री बाजार बंद के कारण सूने दिखाई दिए। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसान भी कई स्थानों पर खाद, बीज और दवाइयों की दुकानों के बंद मिलने से वापस लौटते नजर आए।
संघ पदाधिकारियों ने बताया कि यह केवल प्रतीकात्मक बंद नहीं था, बल्कि व्यापारियों की पीड़ा और असंतोष को शासन तक पहुंचाने का संगठित प्रयास था। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में लाइसेंसिंग प्रक्रिया, निरीक्षण प्रणाली, ऑनलाइन पोर्टल की जटिलताएं, विभागीय दबाव, दंडात्मक कार्रवाई की आशंका तथा कई तकनीकी नियमों के कारण कृषि आदान व्यवसाय संचालित करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
प्रधानमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन
जिला मुख्यालय दमोह में संघ पदाधिकारियों एवं व्यापारियों ने एकत्रित होकर भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन सांसद राहुल सिंह, कलेक्टर दमोह एवं उप संचालक कृषि के माध्यम से प्रेषित किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि कृषि आदान विक्रेताओं की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएं तथा व्यापारियों को राहत प्रदान की जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कृषि आदान विक्रेता खेती-किसानी की पूरी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसान को समय पर खाद, बीज और दवाइयां उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इन्हीं व्यापारियों के माध्यम से पूरी होती है, लेकिन विडंबना यह है कि इन्हीं व्यापारियों को वर्तमान नीतिगत व्यवस्थाओं में अनेक प्रकार के दबाव झेलने पड़ रहे हैं।
तहसील स्तर पर भी दिखा बंद का असर
केवल दमोह शहर ही नहीं, बल्कि जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में भी बंद का व्यापक असर रहा। पथरिया में तहसीलदार, बटियागढ़ में तहसीलदार, हटा एवं तेंदूखेड़ा में एसडीएम, जबेरा में तहसीलदार तथा पटेरा में तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किए गए। इन सभी स्थानों पर कृषि आदान विक्रेता संघ से जुड़े सदस्यों ने एकत्रित होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि तहसील स्तर पर भी व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखे। इससे स्पष्ट संदेश गया कि यह आंदोलन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के कृषि आदान व्यवसायियों की साझा लड़ाई है।
व्यापारियों ने बताई समस्याओं की गंभीरता
संघ से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में कृषि आदान विक्रेताओं पर निरीक्षण और कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि नियमों की जटिलता के कारण छोटी-छोटी त्रुटियों पर भी व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार तकनीकी कारणों से ऑनलाइन प्रविष्टियों में समस्या आती है, लेकिन उसका दायित्व भी व्यापारियों पर ही डाल दिया जाता है। इसके अलावा लाइसेंस नवीनीकरण, स्टॉक मिलान, रिकॉर्ड संधारण और विभागीय दिशा-निर्देशों के पालन में अत्यधिक समय और खर्च लगता है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, क्योंकि कृषि आदान की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था प्रभावित होगी।
जिला अध्यक्ष ने जताया आभार, समाधान की उम्मीद
संघ के जिला अध्यक्ष प्रमोद बजाज ने कहा कि जिले के सभी कृषि आदान विक्रेता संघ सदस्यों ने एकजुटता के साथ बंद को सफल बनाया, जिसके लिए वे सभी आभार के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपनी जायज समस्याओं को शासन तक पहुंचाने के लिए किया गया है। व्यापारियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग इस राष्ट्रव्यापी संदेश को गंभीरता से लेंगे और जल्द समाधान की दिशा में पहल करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो संगठन आगे भी चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बना सकता है।
