12 से बढ़कर 14 हुए ब्लैक स्पॉट, राहवीर योजना के प्रचार और हेलमेट चेकिंग पर दिया जोर
सागर-जबलपुर मार्ग पर निर्माणाधीन बस स्टैंड के पास दोनों ओर हो रहे अतिक्रमण हटाने के निर्देश
दमोह ,30 अप्रैल 2026दमोह जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में हो रही जनहानि को लेकर जिला प्रशासन अब गंभीर रणनीतिक मोड में दिखाई दे रहा है। आज 30 अप्रैल, गुरुवार को जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट कहा कि सड़क हादसों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे टूटते परिवार, बिखरती जिंदगी और सामाजिक क्षति जुड़ी होती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिले में ऐसा ठोस अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आए और लोग स्वयं सड़क सुरक्षा नियमों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
कलेक्टर श्री यादव ने विशेष रूप से कहा कि इस जनअभियान में माताओं और बहनों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्योंकि परिवार के भीतर सुरक्षा व्यवहार बदलने में उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावी हो सकती है। उन्होंने कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट, नियंत्रित गति और जिम्मेदार वाहन संचालन को सामाजिक संस्कार का हिस्सा बनाना होगा।
दुर्घटना केवल व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करती है
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि किसी भी प्रकार की सड़क दुर्घटना का असर केवल घायल या मृत व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका पूरा परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होता है। इसलिए दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभागीय औपचारिकताओं से आगे बढ़कर एक समन्वित और परिणाम आधारित कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिले में दुर्घटनाओं का एनालिसिस करने पर कई कारण सामने आए हैं। कुछ हादसे मानवीय लापरवाही, कुछ सामाजिक असावधानी और कुछ सड़क डिजाइन संबंधी कमियों के कारण हो रहे हैं। ऐसे में पहले सड़क संबंधी उन कारणों को कवर किया जाए जिन्हें तकनीकी सुधार से कम किया जा सकता है।
ब्लैक स्पॉट न बनें, सड़क डिजाइन पर नया फोकस
कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग, एमपीआरडीसी और परिवहन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण और सुधार में केवल डामरीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजाइन सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूछा कि कहां स्पीड ब्रेकर की जरूरत है, कहां मोड़ अधिक खतरनाक हैं, कहां टर्निंग रेडियस कम है और किन स्थानों पर घुमाव या संकेतक की कमी है—इन सभी बिंदुओं पर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में पहले 12 ब्लैक स्पॉट चिन्हित थे, जो अब बढ़कर 14 हो गए हैं। यानी दुर्घटना संभावित स्थान कम होने के बजाय और बढ़े हैं। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इन स्थानों को केवल सूचीबद्ध करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन्हें प्रिकॉशन मोड में लेकर तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह की कार्रवाई की जाए।
दमोह जिला प्रशासन द्वारा iRAD प्रणाली के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं के डेटा संकलन और विश्लेषण की व्यवस्था पहले से संचालित है, जिसमें ब्लैक स्पॉट चिन्हांकन और सुधारात्मक सुझाव शामिल हैं।
हेलमेट अभियान और चेकिंग दोनों साथ चलें
कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि केवल अपीलों से सड़क सुरक्षा संभव नहीं है। हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाए और इसके साथ नियमित चेकिंग भी होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजागरूकता और प्रवर्तन—दोनों पहिए साथ चलेंगे तभी परिणाम आएगा।
उन्होंने यातायात विभाग और पुलिस को निर्देशित किया कि ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए जहां दोपहिया चालकों द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी सबसे अधिक की जाती है।
राहवीर योजना का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने के निर्देश
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि सड़क हादसों के बाद स्वर्णिम समय में मदद पहुंचना अत्यंत जरूरी है, इसलिए केंद्र सरकार की राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। आम नागरिकों को बताया जाए कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों को प्रोत्साहन और सम्मान दिया जाता है, ताकि लोग कानूनी झंझट के डर से घायल की मदद करने से पीछे न हटें।
केंद्र सरकार की गुड समैरिटन आधारित राहवीर योजना का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को पहले घंटे में मदद पहुंचाने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करना है।
सागर-जबलपुर मार्ग पर बस स्टैंड के पास अतिक्रमण हटाने के निर्देश
बैठक में सागर-जबलपुर मार्ग पर निर्माणाधीन नए बस स्टैंड के आसपास सड़क के दोनों ओर तेजी से हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि यहां तत्काल सर्वे कर सड़क किनारे किए जा रहे अतिक्रमण हटाए जाएं, क्योंकि बस स्टैंड शुरू होने के बाद यह क्षेत्र भारी यातायात दबाव वाला होगा और यदि अभी से सड़क चौड़ाई व दृश्यता सुरक्षित नहीं रखी गई तो यह नया दुर्घटना केंद्र बन सकता है।
कई विभागों की मौजूदगी में बनी संयुक्त रणनीति
जिला कार्यालय में आयोजित इस बैठक में अपर कलेक्टर मीना मसराम, डिप्टी कलेक्टर रचना प्रजापति, जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी, यातायात निरीक्षक दलबीर सिंह मार्को, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. अठ्या, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री, एमपीआरडीसी के अधिकारीगण सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सड़क सुरक्षा के प्रत्येक बिंदु पर विभागवार जिम्मेदारियां तय की गईं।
लगातार बढ़ते हादसों के बीच प्रशासन की सक्रियता
गौरतलब है कि दमोह जिले में पिछले दो वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार चिंता बढ़ाने वाला रहा है और कई प्रमुख मार्ग दुर्घटना कॉरिडोर के रूप में सामने आए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा समिति की यह बैठक केवल औपचारिक समीक्षा नहीं बल्कि आगामी दिनों में प्रशासनिक अभियान का संकेत मानी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि ब्लैक स्पॉट की बढ़ती संख्या, बेलगाम रफ्तार, हेलमेट की अनदेखी और सड़क किनारे अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर यह बैठक जमीनी बदलाव ला पाती है या नहीं।
