मोबाइल ऐप से जुटेगा रियल टाइम डेटा, 34 सवालों के जवाब देंगे नागरिक; फरवरी 2027 में होगी जनसंख्या गणना
( आचार्य नारायण वैष्णव)
इंदौर, 2 मई 2026/देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की दिशा में इंदौर जिले ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। जनगणना 2027 के प्रथम चरण ‘हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस ऑपरेशन’ के अंतर्गत जिलेभर में एक मई से मकानों और निर्माणों की गणना का कार्य शुरू हो गया है। इस बार पूरी प्रक्रिया कागजी औपचारिकताओं से हटकर मोबाइल एप, ऑनलाइन मैपिंग और रियल टाइम पोर्टल मॉनिटरिंग के जरिए संचालित की जा रही है, जिससे एक-एक मकान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
प्रशासन ने जिले को 5934 गणना ब्लॉकों में विभाजित किया है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का कोई भी निर्माण सर्वे से बाहर न रह जाए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पहले तीन दिनों तक प्रगणक अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में भ्रमण कर सीमांकन, ब्लॉक पहचान और डिजिटल लेआउट मैप तैयार करेंगे। इसके लिए ऑनलाइन नजरी नक्शा विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद 1 मई से 30 मई तक मकानों, व्यावसायिक निर्माणों और आवासीय परिसरों की वास्तविक गणना की जाएगी।
हर घर पहुंचेगा प्रगणक, मोबाइल पर सीधे अपलोड होगा डेटा
इस बार जनगणना का सबसे बड़ा बदलाव इसकी पूर्ण डिजिटल व्यवस्था है। प्रगणक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे और जैसे ही जानकारी सेव करेंगे, वह सीधे सुपरवाइजर और नियंत्रण कक्ष तक पहुंच जाएगी। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि किसी भी प्रकार की त्रुटि, छूट या दोहराव की संभावना कम होगी। केंद्र सरकार द्वारा विकसित डिजिटल टूल्स और मोबाइल एप के जरिए यह देश की अब तक की सबसे तकनीक आधारित जनगणना मानी जा रही है।
इंदौर में इस कार्य के लिए लगभग 6 हजार प्रगणकों और 1200 से अधिक सुपरवाइजरों को प्रशिक्षित कर मैदान में उतारा गया है। प्रशासन ने पहले ही 10 लाख से अधिक मकानों और निर्माणों की नंबरिंग कर ली थी, जिसके आधार पर गणना ब्लॉक तैयार किए गए हैं।
नागरिकों से पूछे जाएंगे 34 महत्वपूर्ण सवाल
मकान गणना के दौरान नागरिकों को कुल 34 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इनमें मकान का प्रकार, स्वामित्व, निर्माण सामग्री, पानी-बिजली की उपलब्धता, शौचालय, इंटरनेट सुविधा, रसोई ईंधन, परिवार के सदस्यों की संख्या, किरायेदारों की स्थिति, डिजिटल कनेक्टिविटी, आपदा जोखिम और घरेलू संसाधनों जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी। परिवार का कोई भी जिम्मेदार सदस्य यह जानकारी दे सकेगा।
यह डेटा केवल मकान गिनती नहीं बल्कि भविष्य की शहरी योजना, ग्रामीण विकास, पेयजल, आवास, डिजिटल नेटवर्क, सड़क, आपदा प्रबंधन और सामाजिक सुविधाओं की नीति निर्माण की आधारशिला बनेगा।
सेल्फ एन्यूमरेशन का भी मिला विकल्प
डोर टू डोर सर्वे से पहले 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक नागरिकों को स्वयं जनगणना विवरण भरने का विकल्प दिया गया था। इस अवधि में 16,577 लोगों ने ऑनलाइन स्वयं जानकारी दर्ज की, जिनमें से 13,778 की प्रविष्टियां सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी हैं। ऐसे परिवारों को प्रगणक के आने पर अपनी सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी दिखानी होगी, ताकि सत्यापन किया जा सके।
दस्तावेज नहीं, सिर्फ सही जानकारी दें
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गणना के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार का दस्तावेज, आधार कार्ड, राशन कार्ड या संपत्ति पत्र दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रगणक केवल मौखिक जानकारी दर्ज करेंगे। हां, मोबाइल नंबर अवश्य लिया जाएगा, लेकिन किसी भी स्थिति में नागरिकों को ओटीपी साझा नहीं करना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि फर्जी कॉल या डिजिटल धोखाधड़ी से सावधान रहें और केवल अधिकृत प्रगणक को ही जानकारी दें।
फरवरी 2027 में होगा दूसरा और सबसे बड़ा चरण
मकानों की गणना पूरी होने के बाद अगले वर्ष फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण शुरू होगा। इस दौरान प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, पारिवारिक और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां दर्ज की जाएंगी। यानी अभी जो अभियान शुरू हुआ है, वह आने वाले राष्ट्रीय विकास ब्लूप्रिंट की पहली बुनियाद है।
स्पष्ट है कि इंदौर में शुरू हुआ यह डिजिटल सर्वे केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि आने वाले दशक की सरकारी योजनाओं की दिशा तय करने वाला डेटा मिशन है।
