वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अपराधियों पर अभियान जारी, लेकिन महिला आरक्षक के अभाव में बढ़ती व्यावहारिक चुनौतियां
(डॉ. एल.एन. वैष्णव )

दमोह नगर के संवेदनशील और घनी आबादी वाले हिस्से की सुरक्षा इन दिनों कसाई मंडी पुलिस सहायता केंद्र के भरोसे संचालित हो रही है। जनता की मांग पर पुनर्स्थापित इस सहायता केंद्र में मात्र एक एएसआई, तीन प्रधान आरक्षक और दो आरक्षक पदस्थ हैं, जबकि इनके जिम्मे नगर के लगभग 40 हजार मतदाताओं वाले विस्तृत क्षेत्र की कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, गश्त और त्वरित हस्तक्षेप की जिम्मेदारी है।
कम स्टाफ और सीमित संसाधनों के बावजूद यह पुलिस टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में लगातार सक्रिय रहकर अपराधियों पर दबाव बनाए हुए है।
9 अक्टूबर 2025 को हुई थी पुनर्स्थापना
स्थानीय नागरिकों की मांग पर 9 अक्टूबर 2025 को कसाई मंडी पुलिस सहायता केंद्र की पुनर्स्थापना की गई थी। यहां एएसआई राकेश पाठक को प्रभारी बनाया गया तथा उनके साथ तीन प्रधान आरक्षक और दो आरक्षक की तैनाती की गई।यानी कुल छह पुलिसकर्मियों पर नगर के सबसे संवेदनशील हिस्से की जवाबदेही डाल दी गई।
इन क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
इस सहायता केंद्र के अधीन—
धरमपुरा, बड़ापुरा, बिलवारी मोहल्ला, गढ़ी मोहल्ला, ढिमरौला, नूरी नगर, कसाई मंडी, सुल्तानी मोहल्ला, शोभा नगर, चैनपुरा, सवा लाख मानस पाठ क्षेत्र, सीता बावड़ी, जटाशंकर और गडरयाऊ जैसे क्षेत्र आते हैं।इन सभी को मिलाकर मतदाता संख्या लगभग 46 हजार है, जबकि वास्तविक आबादी इससे कहीं अधिक है।
संवेदनशील और अपराध संभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी
सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र में समय-समय पर विवाद, असामाजिक गतिविधियां, महिलाओं से जुड़े प्रकरण, सामाजिक तनाव और अन्य शिकायतें सामने आती रहती हैं।
इसी कारण यह क्षेत्र पुलिस दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चल रहे अभियान
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदोरिया के निर्देशन में तथा सीएसपी एच.आर. पांडे एवं सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कुमार के मार्गदर्शन में जिले भर में अपराधों पर नियंत्रण और अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।कसाई मंडी पुलिस सहायता केंद्र की टीम भी इन्हीं निर्देशों के तहत क्षेत्र में लगातार—संदिग्धों की निगरानी,रात्रिकालीन गश्त,शिकायतों का निराकरण,विवाद नियंत्रण,अपराधियों की धरपकड़जैसी कार्रवाई करती रहती है।
महिला शिकायतकर्ता अधिक, साथ आने वाली महिलाओं की भी भीड़… और एक भी महिला आरक्षक नहीं
कसाई मंडी पुलिस सहायता केंद्र की सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या महिला पुलिसकर्मी का अभाव बनकर सामने आ रही है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र से आने वाली शिकायतों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक रहती है। इतना ही नहीं, शिकायत दर्ज कराने आने वाली महिलाओं के साथ उनके परिजन और मोहल्ले की अन्य महिलाएं भी बड़ी संख्या में सहायता केंद्र पहुंच जाती हैं। कई बार एक मामूली विवाद की शिकायत भी समूहिक महिला उपस्थिति के कारण तनावपूर्ण वातावरण का रूप ले लेती है।ऐसी स्थिति में पुरुष पुलिसकर्मियों को समझाइश, बयान, विवाद शांत कराना, भावनात्मक माहौल नियंत्रित करना और कानूनी प्रक्रिया एक साथ संभालनी पड़ती है।
जब सहायता केंद्र में एक भी महिला आरक्षक मौजूद न हो तो यह चुनौती कई गुना बढ़ जाती है।
महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशील पूछताछ, अलग से बातचीत, भरोसेमंद वातावरण और तत्काल नियंत्रण—ये सभी कार्य महिला पुलिसकर्मी की अनुपस्थिति में काफी कठिन हो जाते हैं।कई बार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी व्यावहारिक मुसीबत का सामना करना पड़ता है।
न वाहन, न पर्याप्त संसाधन, फिर भी लगातार सक्रियता
जानकारी के अनुसार इस सहायता केंद्र को स्वतंत्र शासकीय वाहन सहित कई बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।इसके बावजूद टीम को गश्त, न्यायालयीन पेशी, संवेदनशील बिंदुओं की निगरानी, अचानक घटनाओं में हस्तक्षेप और अपराधियों पर दबाव बनाए रखना पड़ता है।कम बल में इतने बड़े क्षेत्र को संभालना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण पुलिसिंग का उदाहरण है।
एएसआई राकेश पाठक और टीम की सक्रियता बनी बड़ी ताकत
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एएसआई राकेश पाठक और उनके सहयोगियों की सक्रियता के कारण सहायता केंद्र का प्रभाव क्षेत्र में बना हुआ है। नियमित उपस्थिति और तत्काल प्रतिक्रिया के चलते कई विवाद शुरुआती स्तर पर नियंत्रित हो जाते हैं।वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का जमीनी पालन इस टीम द्वारा लगातार किया जा रहा है।
जरूरत—महिला आरक्षक सहित अतिरिक्त पुलिस बल की
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कसाई मंडी पुलिस सहायता केंद्र में—महिला आरक्षक,अतिरिक्त आरक्षक,शासकीय वाहन,संचार संसाधनकी तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।क्योंकि जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी इस सहायता केंद्र पर है, वहां केवल संख्या नहीं बल्कि परिस्थितियां भी अत्यंत संवेदनशील हैं।
