“सही तौल, बिना लेनदेन काम और समय पर रसीद देना अनिवार्य, किसानों से अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं” — कलेक्टर प्रताप नारायण यादव
जिला स्तरीय अधिकारियों की आपात बैठक में कड़े निर्देश, कंट्रोल रूम में शिकायत करने किसानों से अपील
दमोह, 03 मई 2026/मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार पहले से ही विशेष सतर्कता मोड में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश भर में उपार्जन व्यवस्थाओं को लेकर लगातार मॉनिटरिंग, केंद्रों की निरीक्षण श्रृंखला, तौल क्षमता बढ़ाने और किसानों को समयबद्ध भुगतान के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसी कड़ी में दमोह जिला प्रशासन ने शनिवार को बड़ी और कठोर कार्रवाई करते हुए जिले के चंपत पिपरिया उपार्जन केंद्र पर मिली गंभीर अनियमितताओं के बाद समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, वेयरहाउस मालिक तथा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के कर्मचारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है।
जिले के कलेक्टर Pratap Narayan Yadav ने साफ शब्दों में कहा है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही, गलत तौल, देरी, अवैध लेनदेन अथवा रसीद रोकने जैसी शिकायतें अब सीधे आपराधिक कार्रवाई तक पहुंचेंगी। जिला प्रशासन किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा।
चंपत पिपरिया उपार्जन केंद्र के निरीक्षण में खुली पोल, तत्काल हुई एफआईआर
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय अधिकारियों एवं नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक में बताया कि गत दिवस उन्होंने पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी के साथ संयुक्त रूप से चंपत पिपरिया उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान किसानों से सीधी बातचीत में यह सामने आया कि केंद्र पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई थीं और किसानों को हर स्तर पर परेशान किया जा रहा था।
किसानों ने शिकायत की कि—
- तौल में पारदर्शिता नहीं है,
- रसीद देने में देरी की जा रही है,
- कर्मचारियों द्वारा इशारों में लेनदेन की मांग की जाती है,
- वेयरहाउस में जगह का अभाव बताकर अनावश्यक रोका जाता है,
- घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी पंजीकृत उपज नहीं तौली जाती।
इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए मौके पर ही प्रशासन ने संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की और तत्काल एफआईआर दर्ज कराते हुए दोषियों को हिरासत में लिया।यह कार्रवाई जिले में अब तक की सबसे सख्त उपार्जन कार्रवाई मानी जा रही है, जिसने अन्य उपार्जन केंद्रों पर भी हड़कंप मचा दिया है।
कलेक्टर का दो टूक संदेश : किसान से एक रुपया भी मांगा तो बख्शे नहीं जाएंगे
बैठक में कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्र किसान सेवा के लिए बनाए गए हैं, न कि किसानों को प्रताड़ित करने के लिए। उन्होंने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, नोडल अधिकारियों, केंद्र प्रभारियों, समिति प्रबंधकों और संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा—“सही तौल, बिना लेनदेन काम और समय पर रसीद देना अनिवार्य है। यदि कहीं भी लापरवाही, गड़बड़ी या अवैध वसूली मिली तो संबंधित के विरुद्ध सीधी दंडात्मक कार्रवाई होगी।”उन्होंने कहा कि किसानों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें अपनी मेहनत की उपज बेचने के लिए किसी दफ्तर या कर्मचारी के सामने हाथ जोड़ना पड़े। प्रशासन का दायित्व है कि केंद्र पर पहुंचते ही किसान को सम्मानजनक सुविधा और पारदर्शी प्रक्रिया मिले।
किसानों से सीधी अपील : शिकायत छिपाएं नहीं, कंट्रोल रूम को तुरंत बताएं
कलेक्टर ने जिले के किसानों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यदि—
- किसी कर्मचारी द्वारा पैसा मांगा जाए,
- तौल कम की जाए,
- रसीद रोकी जाए,
- अनावश्यक देरी की जाए,
- या किसी प्रकार से परेशान किया जाए,
तो किसान तत्काल जिला कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर जांच करेगी और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने कहा कि किसानों की चुप्पी ही भ्रष्ट कर्मचारियों का साहस बढ़ाती है, इसलिए अब किसान खुलकर शिकायत करें, प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
निरीक्षण के बाद तत्काल बदला पूरा स्टाफ, बड़ा परिसर भी कराया उपलब्ध
कलेक्टर श्री यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र में वेयरहाउसिंग एवं तौल व्यवस्था के अनुरूप पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतार लग रही थी और किसान भीषण गर्मी में परेशान हो रहे थे।
इस पर प्रशासन ने तत्काल—
- बड़ा परिसर उपलब्ध कराया,
- पुराने समिति प्रबंधक को हटाया,
- कंप्यूटर ऑपरेटर बदला,
- अन्य संबंधित स्टाफ को प्रतिस्थापित किया,
- और नई टीम तैनात कर कार्य प्रारंभ कराया।
प्रशासन का कहना है कि इससे उपार्जन की गति तेज होगी और किसानों को प्रतीक्षा से राहत मिलेगी।
छाया, पानी, बैठने की व्यवस्था भी अनिवार्य — केवल खरीद नहीं, सुविधा भी देनी होगी
कलेक्टर ने सभी उपार्जन केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि केवल गेहूं तौल लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि केंद्र पर आने वाले किसानों के लिए—
- छायादार स्थान,
- शीतल पेयजल,
- बैठने की व्यवस्था,
- टोकन/रसीद की स्पष्ट जानकारी,
- तथा तौल की खुली निगरानी
सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि मई की तपती गर्मी में किसान घंटों केंद्रों पर खड़े रहते हैं, ऐसे में बुनियादी मानवीय सुविधाएं देना प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
जिले के सभी उपार्जन केंद्रों को मिला सख्त संदेश, अब हर केंद्र रहेगा निगरानी में
बैठक में यह भी तय किया गया कि अब जिले के प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर जिला स्तरीय अधिकारी और नोडल अधिकारी लगातार भ्रमण करेंगे। अचानक निरीक्षण, किसानों से सीधी फीडबैक, तौल पर्चियों का मिलान और वेयरहाउस रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने यह संकेत दे दिया है कि चंपत पिपरिया जैसी कार्रवाई अन्य केंद्रों पर भी हो सकती है यदि गड़बड़ी मिली।
प्रदेश में उपार्जन पर बढ़ी निगरानी, दमोह की कार्रवाई बनी बड़ा संदेश
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद राज्य सरकार ने उपार्जन अवधि बढ़ाई है, तौल क्षमता बढ़ाई है और जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसानों की परेशानी और उपार्जन में गिरावट को देखते हुए प्रशासनिक सख्ती लगातार बढ़ रही है।
ऐसे समय में दमोह जिले की यह एफआईआर कार्रवाई न केवल स्थानीय स्तर पर बड़ा संदेश मानी जा रही है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत भी है कि अब उपार्जन केंद्रों पर बैठे लापरवाह और कथित वसूली तंत्र पर प्रशासन सीधे शिकंजा कसने के मूड में है।
