दमोह। सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण और भावी पीढ़ी को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने की दिशा में दमोह नगर में एक अत्यंत प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक आयोजन सम्पन्न हुआ। स्थानीय श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, पूर्व शिक्षा विभाग परिसर जनपद कार्यालय के सामने पुजारी पुरोहित संघ के तत्वावधान में ब्राह्मण बालकों का सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-पूजन के साथ सम्पन्न कराया गया। आयोजन ने नगर के धार्मिक परिवेश को भक्तिमय बना दिया।
इस विशेष संस्कार समारोह में अजब धाम फतेहपुर से पधारे पूज्य श्री राम अनुग्रह दास जी महाराज (छोटे सरकार जी) की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। उनके सान्निध्य में सम्पन्न हुए इस वैदिक अनुष्ठान ने उपस्थित जनसमुदाय को भारतीय सनातन परंपराओं की महत्ता का सजीव बोध कराया। छोटे सरकार जी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि उपनयन संस्कार केवल एक धार्मिक विधि नहीं, बल्कि बालक के जीवन में ज्ञान, अनुशासन, संयम और वेदाध्ययन के प्रवेश का प्रथम द्वार है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों से भी जोड़े रखें।
वैदिक मंत्रों के मध्य बालकों ने धारण किया यज्ञोपवीत
प्रातःकाल से प्रारंभ हुए इस आयोजन में पुजारी पुरोहित संघ के विद्वान आचार्यों द्वारा गणेश पूजन, आचार्य वरण, मातृका पूजन, देव आह्वान, हवन एवं वैदिक ऋचाओं के उच्चारण के साथ उपनयन संस्कार की समस्त धार्मिक प्रक्रियाएं सम्पन्न कराई गईं। मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनि और यज्ञ अग्नि की सुगंध से मंदिर परिसर पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
संस्कार के दौरान बालकों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया, गायत्री मंत्र का उपदेश दिया गया तथा उन्हें ब्रह्मचर्य जीवन, गुरु सम्मान, संध्या-वंदन एवं धार्मिक अनुशासन का महत्व समझाया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को भारतीय संस्कृति के जीवंत दर्शन के रूप में अनुभव किया।
सनातन परंपरा के संरक्षण का संकल्प
पुजारी पुरोहित संघ के जिला अध्यक्ष पंडित अजय गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उपनयन संस्कार के माध्यम से उन्हें न केवल धार्मिक पहचान मिलती है बल्कि जीवन में कर्तव्य, सदाचार और ज्ञानार्जन की दिशा भी प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि संघ द्वारा आगे भी ऐसे सामूहिक संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे समाज में वैदिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बनी रहे।
नगर पुरोहित पंडित चंद्र गोपाल पौराणिक ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार वैदिक संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है और यह बालक को ‘द्विज’ अर्थात ज्ञान से पुनर्जन्म प्राप्त करने का अधिकार देता है। आज की पीढ़ी को यदि भारतीयता से जोड़ना है तो ऐसे संस्कारों का विस्तार गांव-गांव और नगर-नगर तक होना चाहिए।
विद्वान पुरोहितों एवं गणमान्यजनों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति
इस पुण्य अवसर पर पुजारी पुरोहित संघ से जुड़े अनेक विद्वान आचार्य, सामाजिकजन एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष पंडित अजय गर्ग, नगर पुरोहित पंडित चंद्र गोपाल पौराणिक, विद्यासागर पांडे, पंडित बद्री प्रसाद कुड़ेरिया, बांदकपुर से पंडित राम कृपाल पाठक, पंडित केदारनाथ दुबे, पत्रकार पंडित सुनील गौतम, महेंद्र गर्ग, महिमानंद जी, सुनील दुबे, गोविंद पुजारी जी, देवेंद्र दुबे, कमलेश तिवारी, विकास पांडे, मिकी राजोरिया, राम अवतार तिवारी, दुर्गेश तिवारी, आशीष दत्त कटारे, सुदर्शन पाठक, दक्ष गर्ग, आराध्य गर्ग, सचिन तिवारी, राजेंद्र सरवरिया, ठाकुर दास जी, जागेश्वर तिवारी एवं आशुतोष गौतम (छोटू शास्त्री) सहित अनेक श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
धर्म, संस्कार और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम
पूरे आयोजन में धार्मिक उत्साह, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के प्रति गहरी आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में उपस्थित महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी इस आयोजन को अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा। हवन पूर्णाहुति के पश्चात सभी बालकों को आशीर्वाद प्रदान किया गया तथा उनके उज्ज्वल, संस्कारित एवं ज्ञानमय भविष्य की कामना की गई।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक संस्कार नहीं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने, भारतीय परंपराओं के पुनर्जागरण और संस्कारवान पीढ़ी निर्माण का सशक्त संदेश बनकर उभरा।
