निलंबन बहाली, मनचाही पोस्टिंग और विभागीय जांच समाप्ति के नाम पर चल रहा था वसूली सिंडिकेट, सोमवार रात दमोह में लोकायुक्त का बड़ा ट्रैप

( डॉ. एल.एन. वैष्णव)
दमोह, 4 मई 2026/दमोह जिले के शिक्षा विभाग में लंबे समय से अंदरखाने चल रहे कथित रिश्वतखोरी के संगठित खेल का सोमवार रात सनसनीखेज खुलासा हो गया, जब सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने रात्रि लगभग 8 बजे दमोह-जबलपुर आम रोड स्थित स्थानीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने मुख्य मार्ग पर जाल बिछाकर शिक्षा विभाग से जुड़े तीन कर्मचारियों को ₹80,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।इस कार्रवाई ने न केवल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और बीईओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि विभाग में फाइलों के निस्तारण, निलंबन बहाली, सुविधाजनक पदस्थापना और विभागीय जांच बंद कराने के नाम पर एक सुनियोजित वसूली तंत्र सक्रिय था।
शिकायतकर्ता शिक्षक ने खोली रिश्वतखोरी की परतें
लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार आवेदक नवेन्द्र कुमार आठया पिता गिरधारी लाल आठया, उम्र 36 वर्ष, प्राथमिक शिक्षक विज्ञान, तात्कालिक शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पटेरा, निवासी ग्राम करैया जोशी तहसील हटा जिला दमोह ने लोकायुक्त कार्यालय सागर पहुंचकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी।शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके निलंबन आदेश को समाप्त कर सेवा बहाल कराने, विभागीय जांच समाप्त करवाने तथा विभागीय स्तर पर राहत दिलाने के नाम पर शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों द्वारा पहले ₹1 लाख की मांग की गई। बाद में सौदेबाजी के पश्चात ₹80 हजार में “काम” कराने की सहमति बनी।पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त के समक्ष आवेदन का सत्यापन कराया गया। शिकायत सही पाए जाने तथा तकनीकी पुष्टि के बाद 4 मई को नियोजित ट्रैप कार्रवाई की रणनीति बनाई गई।
रात 8 बजे बिछा जाल, सड़क पर धराए तीनों
सोमवार रात्रि लगभग 8 बजे पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि लेकर भेजा गया। जैसे ही पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने मुख्य सड़क पर आरोपियों ने रकम स्वीकार की, पहले से घात लगाए बैठी सागर लोकायुक्त की टीम ने तत्काल घेराबंदी कर तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया।बताया गया है कि कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम को छिपाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन ₹80,000 नकद राशि आरोपियों में से एक की स्कूटी से बरामद कर जप्त कर ली गई। देर रात तक नोटों का मिलान, पंचनामा, दस्तावेजी परीक्षण और अग्रिम वैधानिक कार्यवाही जारी रही।
ये तीन आरोपी लोकायुक्त के हत्थे चढ़े
लोकायुक्त पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—
अनिल कुमार साहू पिता हलकाई प्रसाद साहू, उम्र 40 वर्ष, माध्यमिक शिक्षक, माध्यमिक शाला भूरी, संकुल उर्दू स्कूल दमोह, वर्तमान में बीईओ कार्यालय से संबद्ध, निवासी बीएसएनएल कॉलोनी दमोह।
मनोज कुमार श्रीवास्तव पिता स्वर्गीय आरसी श्रीवास्तव, उम्र 58 वर्ष, सहायक ग्रेड-2, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी दमोह, निवासी वसुंधरा कॉलोनी, जैन मंदिर के पास, सेंट्रल स्कूल के सामने दमोह।
नीरज कुमार सोनी पिता स्वर्गीय कमल प्रसाद सोनी, उम्र 45 वर्ष, सहायक ग्रेड-3, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी दमोह, निवासी राधारमण मंदिर के पास, असाटी वार्ड दमोह। शामिल हैं। तीनों पर आरोप है कि इन्होंने विभागीय प्रभाव का उपयोग कर शिकायतकर्ता के प्रशासनिक प्रकरणों को “सेट” कराने का भरोसा देकर रिश्वत की रकम तय की थी।
निरीक्षक मंजू किरण तिर्की और रंजीत सिंह रहे ट्रैपकर्ता
महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन तथा पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के निर्देशन में यह ट्रैप कार्रवाई संपन्न हुई।ट्रैपकर्ता के रूप में निरीक्षक मंजू किरण तिर्की एवं निरीक्षक रंजीत सिंह ने मोर्चा संभाला। दल में प्रधान आरक्षक सफीक खान, संतोष गोस्वामी, अजय क्षेत्रीय तथा आरक्षक प्रदीप दुबे, आदेश तिवारी, गोल्डी पासी, राघवेंद्र, विक्रम सिंह, नीलेश चौबे सहित लोकायुक्त सागर का स्टाफ शामिल रहा।
जांच अभी प्रारंभिक, और नाम खुलने के संकेत
लोकायुक्त टीम की निरीक्षक मंजू किरण तिर्की ने बताया कि फिलहाल तीन व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, किन्तु प्रकरण की जांच जारी है। मोबाइल कॉल डिटेल, विभागीय संपर्क, पूर्व लेनदेन और अन्य दस्तावेजी तथ्यों के परीक्षण के बाद यदि अन्य नाम सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।यानी यह मामला केवल तीन कर्मचारियों तक सीमित न रहकर शिक्षा विभाग के भीतर सक्रिय बड़े नेटवर्क का चेहरा भी उजागर कर सकता है।
क्या यह सिर्फ तीन कर्मचारियों का मामला है या पूरा वसूली तंत्र?
दमोह के शिक्षक समुदाय में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि—
- निलंबन हटवाना हो,
- विभागीय जांच ठंडी करवानी हो,
- वेतन संबंधी फाइल निकलवानी हो,
- संलग्नीकरण रुकवाना हो,
- या मनचाही पदस्थापना चाहिए हो,
तो बिना “सेटिंग” के काम आसानी से नहीं होता।
सोमवार रात की इस कार्रवाई ने उन चर्चाओं को नई हवा दे दी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पकड़े गए ये तीन कर्मचारी केवल माध्यम थे, या इनके पीछे विभागीय स्तर पर और भी प्रभावशाली चेहरे मौजूद हैं?यदि लोकायुक्त जांच निष्पक्ष और गहराई से आगे बढ़ी तो दमोह शिक्षा विभाग में कई और चौंकाने वाले खुलासे संभव हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज
तीनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर अग्रिम विवेचना शुरू कर दी गई है। लोकायुक्त सागर संभाग ने भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 8435794333 जारी करते हुए आम नागरिकों से अपील की है कि रिश्वत की मांग होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
