सर्व शिक्षा अभियान सभा कक्ष में जुटे जिलेभर के जनशिक्षक, बीआरसी एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी; शिक्षण पद्धति, नवाचार और समर कैंप पर हुआ मंथन

दमोह, 6 मई 2026 (बुधवार)मध्यप्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में सर्व शिक्षा अभियान के सभा कक्ष में बुधवार 6 मई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं नवीन शिक्षण पद्धति को लेकर तीन दिवसीय सेमिनार कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम ने किया। इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी वाई.ए. कुरैशी, डीपीसी मुकेश द्विवेदी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक माधव पटेल सहित जिले के समस्त विकासखंडों से आए जनशिक्षक, बीआरसी, शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं शैक्षिक हितधारक उपस्थित रहे।
विजयवर्धन संस्थान ग्वालियर/दमोह द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में “शैक्षिक हितधारकों के बीच समझ एवं ज्ञान प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना” विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने, शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों से जोड़ने तथा विद्यार्थियों में बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने की दिशा में साझा रणनीति तैयार करना रहा।
शिक्षा को बोझ नहीं, रुचिकर बनाना होगा : मीना मसराम
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक बच्चे पढ़ाई को रुचि के बजाय दबाव के रूप में लेते हैं, जिसे बदलना शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल रटाने की प्रवृत्ति से बाहर निकालकर पहाड़े, गिनती, जोड़-घटाव, भाषा बोध और सामान्य ज्ञान जैसी मूलभूत नींव को मजबूत किया जाना चाहिए। जब बुनियाद सशक्त होगी तभी नई शिक्षा नीति का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि बच्चों का बौद्धिक, व्यवहारिक और कौशल आधारित सर्वांगीण विकास होना चाहिए ताकि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सकें। ग्रामीण परिवेश के अनुरूप शिक्षा को सरल, सहज और आनंदमय बनाना समय की मांग है।
गुरु का स्थान समाज में सर्वोपरि
श्रीमती मसराम ने अपने उद्बोधन में कहा कि वे स्वयं शिक्षा विभाग में वर्षों तक कार्य कर चुकी हैं, इसलिए शिक्षक की भूमिका को भलीभांति समझती हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में जिस भी स्थान तक पहुंचता है, उसमें गुरुजनों की शिक्षा-दीक्षा का सबसे बड़ा योगदान होता है। समाज में शिक्षक का स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा।
उन्होंने कार्यशाला में शामिल शिक्षकों से कहा कि वे अपने अनुभव, नवाचार और स्थानीय स्तर पर अपनाए गए सफल प्रयोगों को खुलकर साझा करें, क्योंकि सामूहिक चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान से ही शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार संभव है।
उपलब्धियों को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाएं : वाई.ए. कुरैशी
जनसंपर्क अधिकारी वाई.ए. कुरैशी ने कहा कि शिक्षक निस्वार्थ भाव से बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं। उन्होंने दमोह जिले के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के विद्यार्थी प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की उपलब्धियों, नवाचारों और विद्यालयों की सकारात्मक गतिविधियों को जनसंपर्क कार्यालय एवं मीडिया के माध्यम से समाज तक पहुंचाएं, ताकि अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिल सके।
उन्होंने कहा कि यदि किसी गरीब या श्रमिक परिवार के बच्चे ने विशेष सफलता प्राप्त की है तो ऐसी कहानियां समाज के सामने आना जरूरी हैं। साथ ही स्कूल नहीं आने वाले बच्चों के घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाने की भी आवश्यकता है।
समर कैंप से बढ़ेगा विद्यालय और समुदाय का जुड़ाव : माधव पटेल

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक माधव पटेल ने कार्यशाला में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पुस्तकीय अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित और आनंदमय शिक्षा पर बल देती है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक जन शिक्षा केंद्र में ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाएं, जिससे बच्चों का स्कूल के प्रति लगाव बढ़े और समुदाय का सहयोग भी मजबूत हो।
उन्होंने बताया कि बटियागढ़ विकासखंड के कुछ विद्यालयों में इस प्रकार के समर कैंप चलाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं, जहां बच्चे बिना दबाव के खेल-खेल में सीख रहे हैं।
नवीन शिक्षण पद्धति पर तकनीकी प्रशिक्षण
डीपीसी मुकेश द्विवेदी ने नवीन शिक्षण पद्धति, सीखने के परिणामों का मूल्यांकन, गतिविधि आधारित शिक्षण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को व्यवहारिक मॉड्यूल समझाए जाएंगे।
कार्यशाला में जिले के सभी ब्लॉकों से पहुंचे शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शिक्षा सुधार के लिए साझा संकल्प व्यक्त किया।
