दमोह, 6 मई 2026/जिला अस्पताल की बिगड़ती व्यवस्थाओं और लगातार मिल रही शिकायतों के बीच कलेक्टर प्रताप नारायण यादव बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस औचक निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर ने ओपीडी, वार्ड, प्रसाधन, सुरक्षा व्यवस्था, मरीज सुविधाएं और स्टाफ उपस्थिति का बारीकी से जायजा लिया तथा मौके पर ही कई खामियों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने माना कि पिछले निरीक्षण की तुलना में कुछ बदलाव जरूर दिखा है, लेकिन व्यवस्थाएं अभी भी संतोषजनक नहीं हैं। अस्पताल में समयपालन, कार्यक्षमता, मरीजों के प्रति व्यवहार और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को लेकर अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
सुबह 9:45 बजे तक डॉक्टरों के चैंबर खाली, कलेक्टर ने मांगी जवाबदेही
औचक निरीक्षण के दौरान कई चैंबरों में सुबह 9:45 बजे तक डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। इस पर कलेक्टर यादव ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पताल में देरी से पहुंचने की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सिविल सर्जन से उपस्थिति रिपोर्ट तलब की और चेतावनी दी कि लगातार अनुपस्थित या विलंब से आने वाले कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जाएगी। सार्थक एप के माध्यम से भी कर्मचारियों की उपस्थिति की समीक्षा के निर्देश दिए गए।
एक दिन पहले भी इलाज से वंचित मिला मरीज, गर्भवती महिलाओं की जांच पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को एक ऐसा मरीज मिला जिसे एक दिन पहले भी समुचित उपचार नहीं मिल पाया था। इस पर उन्होंने संबंधित चिकित्सा व्यवस्था पर नाराजगी जताई। साथ ही गर्भवती महिलाओं के नियमित और शत-प्रतिशत स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
5 महीने से वेतन अटका, सफाई-लॉन्ड्री सेवाएं भी बजट के अभाव में प्रभावित
निरीक्षण के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्डों को पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है। वहीं सफाई और लॉन्ड्री सेवाओं का भुगतान भी पांच से छह माह से लंबित है। कलेक्टर ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की और शीघ्र बजट जारी कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब फ्रंटलाइन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
गोद में मरीज ले जाते देख भड़के कलेक्टर, व्हीलचेयर अनिवार्य रखने के निर्देश
अस्पताल भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने एक मरीज को परिजन की गोद में ले जाते देखा, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में यह स्थिति गंभीर लापरवाही दर्शाती है। तत्काल निर्देश दिए गए कि अस्पताल गेट पर हर समय व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और स्ट्रेचर उपलब्ध रहें, ताकि किसी मरीज को असुविधा न हो।
पी.एम रिपोर्ट के लिए भटकते लोग, मौके से एडीशनल एसपी को फोन
निरीक्षण के दौरान एक बुजुर्ग ने कलेक्टर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने की शिकायत की और लंबे समय से परेशान होने की बात कही। इस पर कलेक्टर ने तत्काल एडीशनल एसपी को दूरभाष पर निर्देश दिए कि संबंधित व्यक्ति को तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए तथा पूरे जिले में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि किसी भी नागरिक को पी.एम रिपोर्ट के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
परिजनों ने स्टाफ व्यवहार की खोली पोल, कलेक्टर बोले—यह बर्दाश्त नहीं होगा
मरीजों के परिजनों से बातचीत में स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। कुछ परिजनों ने कहा कि मरीजों के साथ अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई जाती। इस पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए कहा कि अस्पताल में अभद्र व्यवहार किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
सोनोग्राफी सुविधा पर भी सवाल, डॉक्टर की व्यवस्था के निर्देश
निरीक्षण के दौरान मरीजों ने सोनोग्राफी जांच में हो रही परेशानी की जानकारी दी। इस पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि तत्काल विज्ञप्ति जारी कर डॉक्टर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को निजी केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।
बेड कम, मरीज ज्यादा—शासन को भेजा प्रस्ताव
कलेक्टर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल में हर महीने 600 से 700 डिलीवरी होती हैं, जबकि लगभग 400 बेड निरंतर भरे रहते हैं। बढ़ते दबाव को देखते हुए बेड संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। साथ ही विभिन्न वार्डों की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट भी मांगी गई है।
सुरक्षा और स्वच्छता पर भी सख्त नजर
कलेक्टर ने अस्पताल परिसर के प्रसाधनों का निरीक्षण कर स्वच्छता सुनिश्चित रखने के निर्देश दिए। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एडीशनल एसपी को अस्पताल में सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
मरीज बोले—साहब, ऐसे ही आते रहिए
निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने कलेक्टर से कहा कि पिछले कुछ समय में अस्पताल की व्यवस्थाओं में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन निगरानी बनी रहना जरूरी है। कई लोगों ने कहा—“साहब, आप ऐसे ही आते रहिए, तभी व्यवस्थाएं ठीक रहेंगी।”कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण साफ संकेत दे गया कि जिला अस्पताल की व्यवस्था अब सीधे प्रशासनिक निगरानी में है और लापरवाही पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
