इंदौर। मासूम बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए इंदौर के विशेष न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। माननीय न्यायाधीश श्रीमती नौशीन खान (विशेष न्यायालय, पॉक्सो अधिनियम) ने 7 वर्षीय बालिका के साथ गलत हरकत करने वाले 49 वर्षीय आरोपी त्रिभूवन को दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
गार्डन में खेल रही थी मासूम
अभियोजन की कहानी के अनुसार, घटना 15 अप्रैल 2024 की है। चंदननगर क्षेत्र में रहने वाली 7 साल की मासूम बच्ची अपने घर के पीछे बने गार्डन में खेल रही थी। जब काफी देर तक वह घर नहीं लौटी, तो उसकी माँ उसे बुलाने गार्डन पहुँची। वहाँ उन्होंने देखा कि आरोपी त्रिभूवन बच्ची को गोद में लेकर उसके साथ गंदी हरकत कर रहा था।
माँ के चिल्लाने पर आरोपी ने बहाना बनाया कि वह बच्ची के साथ खेल रहा है और वहां से भाग निकला। डरी हुई मासूम ने बाद में अपनी माँ को आपबीती सुनाई कि ‘अंकल’ उसके साथ गलत काम कर रहे थे।
परिजनों ने घेराबंदी कर पकड़ा
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता के परिजनों और पड़ोसियों ने गार्डन के आसपास तलाश शुरू की। आरोपी त्रिभूवन (निवासी अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश) को मौके के पास से ही पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले किया गया। थाना चंदननगर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विभिन्न धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।
ठोस पैरवी से मिली सजा
प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन श्री राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती लतिका आर जमरा ने प्रभावी पैरवी की।”अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष कुल 16 गवाहों के बयान दर्ज कराए। वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों की गवाही ने आरोपी के जुर्म को साबित किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने उसे दंडित किया।”यह फैसला समाज में कड़ा संदेश देता है कि मासूमों के साथ खिलवाड़ करने वालों को कानून किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगा।
