पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाया गया फैसला, अदालत बोली- महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
इंदौर, 8 मई/मध्यप्रदेश के इंदौर जिले स्थित डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) न्यायालय ने नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को सख्त सजा सुनाते हुए समाज में स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं और बालिकाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शेगा नहीं।चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती सारिका गिरी शर्मा की अदालत ने 27 वर्षीय आरोपी जितेन्द्र को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय का यह फैसला महिला सुरक्षा और पॉक्सो कानून की प्रभावी क्रियान्विति की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
मजदूरी से लौट रही छात्रा को रास्ते में रोका
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 7 फरवरी 2024 की है। मानपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक सहायता के लिए मजदूरी भी करती थी। घटना वाले दिन शाम को वह काम समाप्त कर पैदल अपने गांव लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे आरोपी जितेन्द्र ने उसे रोक लिया।
बताया गया कि आरोपी ने पहले छात्रा के हाथ से आलू की थैली छीनकर दूर फेंक दी और फिर उसे धक्का देकर खेत में गिरा दिया। इसके बाद उसने बुरी नीयत से छात्रा का हाथ पकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से घबराने के बावजूद छात्रा ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया। छात्रा की आवाज सुनकर आरोपी डर गया और मौके से फरार हो गया।
पीड़िता ने दिखाई हिम्मत, अगले दिन दर्ज कराई रिपोर्ट
सहायक निदेशक अभियोजन श्री राजेन्द्र भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता ने डरने के बजाय साहस का परिचय दिया और अगले ही दिन अपने पिता एवं भाई के साथ मानपुर थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 354 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
विशेष लोक अभियोजक ने रखा मजबूत पक्ष
प्रकरण की सुनवाई के दौरान शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेन्द्र सिंह मुजाल्दे ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पीड़िता के बयान, प्रत्यक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा चिकित्सकीय दस्तावेज प्रस्तुत किए।न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
अदालत का फैसला बना समाज के लिए संदेश
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के त्वरित और सख्त फैसले समाज में महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति अपराध करने वालों के मन में भय उत्पन्न करते हैं। न्यायपालिका के ऐसे निर्णय यह संदेश देते हैं कि कानून पीड़ितों के साथ खड़ा है और अपराधियों को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं मिलेगा।महू न्यायालय के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों के विरुद्ध अभद्रता, छेड़छाड़ और हिंसा जैसे अपराधों को अदालतें गंभीरता से ले रही हैं तथा दोषियों को कठोर दंड देकर समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत किया जा रहा है।
एक नजर में मामला
- दोषी आरोपी – जितेन्द्र (27 वर्ष)
- थाना – मानपुर, जिला इंदौर
- अपराध – नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़
- धाराएं – भारतीय दंड संहिता धारा 354 एवं पॉक्सो एक्ट धारा 7/8
- सजा – 3 वर्ष का सश्रम कारावास
- अर्थदंड – 1000 रुपये
- न्यायाधीश – श्रीमती सारिका गिरी शर्मा
- अभियोजन पक्ष – विशेष लोक अभियोजक महेन्द्र सिंह मुजाल्दे
