राष्ट्रीय लोक अदालत के बीच न्यायाधीशों ने दिया मानवता, संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश

दमोह, 09 मई 2026/भीषण गर्मी का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान में हो रही वृद्धि से जहां आमजन का जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं खुले आसमान में विचरण करने वाले पक्षियों के सामने भी जीवन का संकट खड़ा हो गया है। इंसान तो अपने लिए शीतल जल, पंखे, कूलर और छांव की व्यवस्था कर लेता है, लेकिन पेड़ों, भवनों और खुले वातावरण में रहने वाले पक्षियों के सूखते कंठ अक्सर लोगों की नजरों से ओझल रह जाते हैं। ऐसे समय में मध्यप्रदेश के दमोह जिले से मानवता, संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायी दृश्य सामने आया, जब न्यायपालिका से जुड़े न्यायाधीश पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए स्वयं आगे आए।
आज 09 मई शनिवार को जिला न्यायालय परिसर दमोह में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा था। एक ओर जहां अदालतों में विभिन्न प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया चल रही थी, वहीं दूसरी ओर न्यायालय परिवार से जुड़े न्यायाधीश मानवता का जीवंत संदेश देते दिखाई दिए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी के नेतृत्व में न्यायाधीशगण न्यायालय परिसर और पार्क क्षेत्र में पक्षियों के लिए मिट्टी के सकोरे रखते नजर आए। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से सकोरों में पानी भरा और उन्हें पेड़ों तथा खुले स्थानों पर सुरक्षित तरीके से रखा, ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को पानी उपलब्ध हो सके।
न्यायाधीशों की यह पहल वहां मौजूद लोगों के लिए केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह समाज को जागरूक करने वाला एक सशक्त संदेश भी बन गई। अदालत परिसर में उपस्थित लोगों ने कहा कि न्यायपालिका केवल कानून और न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता को जीवित रखने का भी कार्य कर रही है। पक्षियों के प्रति दया भाव और पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर कर रहा था कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर, दुकान, कार्यालय या मोहल्ले में एक छोटा सा पानी का पात्र रख दे, तो हजारों पक्षियों का जीवन बचाया जा सकता है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना केवल सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवता का सबसे सुंदर रूप भी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाएगा, तभी पर्यावरण संतुलित रह सकेगा।
न्यायालय परिसर में काफी देर तक न्यायाधीशगण इस कार्य में लगे रहे। उन्होंने लोगों को भी प्रेरित किया कि वे अपने घरों की छतों, बालकनी, आंगन, खेतों और सार्वजनिक स्थानों पर मिट्टी के सकोरे या पानी के बर्तन रखें। गर्मी के मौसम में पानी की कुछ बूंदें भी पक्षियों के लिए जीवनदान साबित हो सकती हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत के बीच न्यायाधीशों की यह पहल इसलिए भी विशेष बन गई क्योंकि यह केवल शब्दों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर कार्य कर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। न्यायालय परिसर में पहुंचे कई लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जब लोग अपने निजी जीवन में व्यस्त हैं, ऐसे में पक्षियों और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता दिखाना वास्तव में अनुकरणीय है।
दमोह से सामने आया यह दृश्य समाज को यह संदेश देता है कि मानवता केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रकृति, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है। भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने की यह छोटी सी पहल समाज में बड़े बदलाव का माध्यम बन सकती है।
