शहर की सबसे बड़ी यातायात परियोजना अधर में
(विशेष रिपोर्ट : डॉ. एल.एन. वैष्णव)
दमोह, 11 मई 2026/दमोह शहर की वर्षों पुरानी यातायात समस्या को दूर करने के उद्देश्य से प्रस्तावित रेलवे गेट नंबर-58, मलैया मील फाटक ओवरब्रिज (ROB) परियोजना अब कानूनी विवादों, डिजाइन आपत्तियों और प्रशासनिक देरी के कारण अधर में लटक गई है। शहर के सबसे व्यस्त रेलवे फाटक पर बनने वाला यह बहुप्रतीक्षित ओवरब्रिज पिछले लगभग दो वर्षों से बंद पड़ा हुआ है, जिसके चलते हजारों लोगों को प्रतिदिन भीषण ट्रैफिक जाम, धूल, धुएं और अव्यवस्थित यातायात का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री के प्रयासों से मिली थी स्वीकृति
विदित हो कि तत्कालीन दमोह सांसद एवं भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री रहे प्रहलाद सिंह पटेल के विशेष प्रयासों से दमोह जिले को चार महत्वपूर्ण रेलवे ओवरब्रिज परियोजनाओं की स्वीकृति मिली थी। इन परियोजनाओं का भूमि पूजन भी किया गया था और इन्हें जिले के यातायात विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना गया था।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे फाटकों पर लगने वाले लंबे जाम से लोगों को राहत दिलाना और शहर के भीतर यातायात को अधिक सुगम बनाना था। उस समय नागरिकों में इन परियोजनाओं को लेकर काफी उत्साह देखा गया था।
तीन ओवरब्रिज पहुंचे अंतिम चरण में
जानकारी के अनुसार आनु फाटक, करैया फाटक और बांदकपुर रेलवे ओवरब्रिजों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ा और वर्तमान में ये परियोजनाएं लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक पूर्णता की ओर हैं। इन पुलों के शुरू होने के बाद हजारों लोगों को प्रतिदिन होने वाली परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लेकिन दूसरी ओर सबसे अधिक महत्वपूर्ण और व्यस्त माने जाने वाले मलैया मील फाटक का ओवरब्रिज अब भी विवादों में फंसा हुआ है। यही कारण है कि शहरवासियों में इस परियोजना को लेकर सबसे अधिक निराशा दिखाई दे रही है।
पीजी कॉलेज से मुश्की बाबा तक प्रस्तावित था मार्ग
प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार यह ओवरब्रिज पीजी कॉलेज के सामने से शुरू होकर तीन गुल्ली चौराहा होते हुए रेलवे लाइन के ऊपर से मुश्की बाबा क्षेत्र तक बनाया जाना था। इसके साथ ही एक हिस्सा स्टेशन रोड की ओर डॉ. अग्रवाल नेत्र अस्पताल दिशा में भी प्रस्तावित किया गया था, जिससे शहर के कई प्रमुख मार्ग सीधे जुड़ जाते।
बताया जा रहा है कि इसी हिस्से की डिजाइन को लेकर एक स्थानीय कॉलोनाइजर द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई। मामला बाद में हाईकोर्ट तक पहुंच गया, जिसके बाद निर्माण कार्य पर रोक लग गई।
डिजाइन में बदलाव की तैयारी
सूत्रों के अनुसार अब संबंधित विभाग विवादित लगभग 400 मीटर हिस्से को हटाकर नए सिरे से डिजाइन तैयार करने पर विचार कर रहा है। यदि डिजाइन में परिवर्तन किया जाता है तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है। विभागीय स्तर पर माना जा रहा है कि नई स्वीकृतियों और तकनीकी प्रक्रिया में कम से कम एक वर्ष का अतिरिक्त समय लग सकता है।
शुरू हुआ काम, फिर बंद हो गई मशीनें

अगस्त 2024 में निर्माण एजेंसी ने परियोजना पर काम शुरू करते हुए पिलरों के लिए खुदाई शुरू कर दी थी। कई स्थानों पर सड़कें खोद दी गई थीं और भारी मशीनें तथा निर्माण सामग्री मौके पर पहुंच चुकी थी। लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही वर्षों पुरानी जाम की समस्या से राहत मिलने लगेगी।
लेकिन हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद अचानक पूरा निर्माण कार्य रोक दिया गया। कई सप्ताह तक मशीनें और सामग्री स्थल पर पड़ी रहीं। बाद में एजेंसी अपना सामान समेटकर वापस चली गई।
खुदे गड्ढे बने परेशानी का कारण
निर्माण कार्य रुकने के बाद जिन स्थानों पर गहरे गड्ढे खोदे गए थे, उन्हें दोबारा भरकर सड़क का डामरीकरण करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी धन और समय दोनों की बर्बादी हुई। वहीं लंबे समय तक टूटी और अव्यवस्थित सड़कों के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हर कुछ मिनट में लग जाता है जाम
मलैया मील फाटक दमोह शहर का सबसे व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन 50 से अधिक गांवों के लोग शहर आते-जाते हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और मरीज बड़ी संख्या में इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
बीना-कटनी तीसरी रेल लाइन शुरू होने के बाद इस रूट पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्तमान स्थिति यह है कि फाटक हर 10 से 15 मिनट में बंद हो जाता है। कई बार लगातार दो या तीन ट्रेनें गुजरने के कारण फाटक आधे घंटे तक बंद रहता है।
एम्बुलेंस और स्कूली वाहन भी फंसते हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे जाम के कारण कई बार एम्बुलेंस, स्कूली वाहन और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। लोगों को मजबूरी में लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर सरदार पटेल ओवरब्रिज से होकर शहर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचना पड़ता है।
नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस परियोजना से शहर को सबसे अधिक राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब विवादों और प्रशासनिक देरी की भेंट चढ़ गई है। लोगों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द समाधान निकालकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने की मांग की है।
अधिकारियों का पक्ष
ब्रिज विभाग के एसडीओ महेंद्र यादव के अनुसार तीन गुल्ली से स्टेशन रोड की ओर जाने वाले हिस्से की डिजाइन पर पुनः आपत्ति दर्ज हुई है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय से अंतिम निर्णय और डिजाइन की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जा सकेगा।
जनता को अब भी इंतजार
फिलहाल दमोह की जनता उस ओवरब्रिज का इंतजार कर रही है, जिसे शहर के विकास और यातायात समाधान की सबसे बड़ी उम्मीद माना जा रहा था। लेकिन विवाद, देरी और कानूनी प्रक्रिया के चलते यह परियोजना अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
