सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे के लंबित मामलों पर सख्ती, अधिकारियों से बोले — “जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए”
दमोह, मध्य प्रदेश | शुक्रवार, 15 मई 2026/जिले में लगातार लंबित चल रहे राजस्व प्रकरणों और आमजन की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रताप नारायण यादव ने शुक्रवार को राजस्व अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। बैठक में सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आम नागरिक राजस्व संबंधी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। कई मामलों में महीनों तक निराकरण नहीं होने के कारण लोगों को तहसील और जिला मुख्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।उन्होंने दो टूक कहा कि जनता को परेशान करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और राजस्व मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सीमांकन-नामांतरण के मामलों को प्राथमिकता
बैठक के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने विशेष रूप से सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण के लंबित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह ऐसे मामले हैं जो सीधे किसानों और ग्रामीण परिवारों से जुड़े होते हैं। इनके लंबित रहने से विवाद बढ़ते हैं और आमजन को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।उन्होंने सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षकों को निर्देश दिए कि पुराने लंबित मामलों की सूची तैयार कर अभियान चलाकर उनका निराकरण किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि राजस्व विभाग आमजन से सबसे ज्यादा जुड़ा विभाग है, इसलिए इसमें संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
मंगलवार की जनसुनवाई होगी और प्रभावी
बैठक में जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मंगलवार को अनुभाग और ब्लॉक स्तर पर आयोजित होने वाली जनसुनवाई की जानकारी गांव-गांव मुनादी कराकर दी जाए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक भी इसकी सूचना समय पर पहुंच सके।उन्होंने कहा कि कई ग्रामीणों को जनसुनवाई की जानकारी ही नहीं मिल पाती, जिसके कारण वे अपनी समस्याएं प्रशासन तक नहीं पहुंचा पाते। अब पंचायत स्तर पर भी इसकी व्यापक सूचना प्रसारित की जाएगी।कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जनसुनवाई के दौरान सभी अनुविभागीय अधिकारी (SDM), ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और संबंधित विभागों के कर्मचारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
पटवारियों की उपस्थिति अनिवार्य
बैठक में पटवारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मंगलवार को सभी पटवारी तहसील अथवा अनुभाग कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।उन्होंने कहा कि कई मामलों में लोगों को केवल पटवारी की अनुपस्थिति के कारण बार-बार लौटना पड़ता है। अब कोशिश होगी कि पटवारी स्तर के अधिकतम मामलों का निराकरण उसी दिन किया जाए।कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी क्षेत्र का पटवारी बिना कारण अनुपस्थित पाया गया या कार्य में लापरवाही बरती गई तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
सीएम हेल्पलाइन में दमोह की स्थिति में सुधार
बैठक में सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि पिछले एक माह में जिले में लगभग 14,500 सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों का निराकरण किया गया है।उन्होंने बताया कि पहले दमोह जिला सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग में 28वें स्थान पर था, लेकिन लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों की सक्रियता के चलते अब जिला सुधरकर 17वें स्थान पर पहुंच गया है।कलेक्टर ने अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि अभी और सुधार की आवश्यकता है तथा लंबित शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
लोक सेवा गारंटी के मामलों की भी समीक्षा
बैठक में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि समय सीमा से बाहर चल रहे 1,638 मामलों में से लगभग 600 मामलों का निराकरण पिछले एक माह में किया गया है।अब करीब 1,000 मामले लंबित हैं, जिन्हें जल्द समाप्त करने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने कहा कि लोक सेवा गारंटी का उद्देश्य आमजन को निर्धारित समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि इसमें लापरवाही होती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
“किसानों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें”
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, किसी भी किसान, हितग्राही या आम नागरिक को जिला मुख्यालय नहीं बुलाया जाए।उन्होंने कहा कि अधिकतर समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही संभव है। अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकर केवल औपचारिकता पूरी न करें, बल्कि वास्तविक रूप से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को आर्थिक और शारीरिक दोनों प्रकार की परेशानी होती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।
समय सीमा में काम नहीं होने पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक द्वारा संबंधित कार्यालय में आवेदन देने के बाद भी निर्धारित समय सीमा में कार्य नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, न कि उन्हें परेशान करना।
आम जनता से भी की अपील
बैठक के अंत में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने आम नागरिकों और किसानों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन पहले स्थानीय कार्यालय में ही प्रस्तुत करें, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार व्यवस्था सुधारने की दिशा में काम कर रहा है और जनसुनवाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाया जाएगा।बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग का अमला उपस्थित रहा।
