शाजापुर | 17 मई 2026 /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग का आज 17 मई 2026 रविवार को शाजापुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर, दुपाड़ा रोड परिसर में विधिवत शुभारंभ हुआ। मालवा प्रांत के विभिन्न जिलों से आए स्वयंसेवकों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन, राष्ट्रभाव और संगठनात्मक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला। वर्ग का शुभारंभ प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, वर्ग सर्वाधिकारी प्रवीण सैनी तथा वर्ग कार्यवाह राधेश्याम पाटीदार द्वारा माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत संघ प्रार्थना और राष्ट्रगीत के साथ हुई। पूरे परिसर में संघ की पारंपरिक कार्यपद्धति, अनुशासन और आत्मीय वातावरण की झलक स्पष्ट दिखाई दी। वर्ग में पहुंचे शिक्षार्थियों में विशेष उत्साह देखा गया।

“संघ शिक्षा वर्ग राष्ट्रभाव की साधना है”
शिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. प्रकाश शास्त्री ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभाव, आत्मानुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की एक साधना है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक 15 दिनों तक अपने परिवार और व्यक्तिगत सुविधाओं से दूर रहकर सामूहिक जीवन का अभ्यास करते हैं। इससे उनमें समर्पण, सेवा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि संघ का मूल मंत्र “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” है। संघ कार्य का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना है जो समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भाव रखते हुए अपने पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक दायित्वों का भी ईमानदारी और प्रमाणिकता के साथ निर्वहन करें।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि आज के समय में समाज को ऐसे कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है जो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें। संघ शिक्षा वर्ग इसी दिशा में स्वयंसेवकों को वैचारिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
कम साधनों में सामूहिक जीवन का अभ्यास
उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्वयंसेवक सीमित संसाधनों में सामूहिकता के साथ जीवन जीना सीखते हैं। वर्ग में रहने, भोजन, समय प्रबंधन और दैनिक कार्यों के माध्यम से स्वयंसेवकों में समायोजन, सहनशीलता, सहयोग और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
वर्ग में किसी प्रकार का दिखावा या विशेष सुविधा नहीं होती, बल्कि सभी स्वयंसेवक समान व्यवस्था में रहते हुए अनुशासित जीवन का अभ्यास करते हैं। यही संघ की कार्यपद्धति की सबसे बड़ी ताकत है।
28 जिलों से पहुंचे 233 शिक्षार्थी
संघ शिक्षा वर्ग में मालवा प्रांत के 8 विभागों के 28 जिलों से कुल 233 शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंचे हैं। आगामी 15 दिनों तक चलने वाले इस वर्ग में प्रतिदिन प्रातःकाल से रात्रि तक निर्धारित समयानुसार विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
शारीरिक सत्रों में योग, दंड, व्यायाम, खेल, समता, नियुद्ध एवं परंपरागत प्रशिक्षण शामिल हैं, जबकि बौद्धिक सत्रों में राष्ट्र जीवन, सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था, भारतीय संस्कृति, संगठनात्मक कार्यपद्धति एवं समसामयिक विषयों पर चर्चा की जाएगी।
वर्ग के समापन अवसर पर आयोजित होने वाले प्रकट कार्यक्रम में शिक्षार्थी अपने प्रशिक्षण, अनुशासन और विभिन्न कौशलों का सार्वजनिक प्रदर्शन भी करेंगे।
स्वयंसेवक ही संभाल रहे संपूर्ण व्यवस्थाएं
संघ शिक्षा वर्ग की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि पूरे वर्ग की व्यवस्थाएं स्वयं संघ के कार्यकर्ता ही संभाल रहे हैं। भोजन निर्माण से लेकर वितरण, आवास व्यवस्था, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा, जल प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन स्वयंसेवकों द्वारा सेवा भाव से किया जा रहा है।
वर्ग परिसर में हर कार्य समयबद्ध और अनुशासित ढंग से संचालित हो रहा है। कार्यकर्ता बिना किसी विशेष सुविधा या व्यक्तिगत अपेक्षा के निरंतर सेवाकार्य में जुटे हुए हैं। यह संघ के सामूहिक जीवन और सेवा संस्कृति का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है।
“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष और संघ के 100 वर्षों पर विशेष प्रदर्शनी
वर्ग परिसर में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनी का उद्घाटन अतिथियों द्वारा किया गया।
प्रदर्शनी में राष्ट्र जागरण, सेवा कार्य, ग्राम विकास, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा सेवा एवं संगठन विस्तार से जुड़े विभिन्न आयामों को चित्रों, जानकारी और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दर्शाया गया है।
प्रदर्शनी में संघ की विभिन्न गतिविधियों और समाज जीवन में किए गए कार्यों को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है, जो शिक्षार्थियों और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
अनुशासन और राष्ट्रभाव का अनूठा वातावरण
पूरे वर्ग परिसर में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और संगठनात्मक ऊर्जा का विशेष वातावरण दिखाई दे रहा है। निर्धारित समयानुसार चल रही गतिविधियां और स्वयंसेवकों का समर्पण उपस्थित लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
संघ पदाधिकारियों के अनुसार यह वर्ग केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रजीवन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं के निर्माण की सतत प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
