कलेक्टर बोले— दोषियों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
(डॉ. एल.एन. वैष्णव )

दमोह। जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाओं के बीच अब पाइपलाइन से पानी चोरी और अवैध टैपिंग की घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। मुख्य पाइपलाइनों में सेंध लगाकर खेतों की सिंचाई किए जाने और पाइपलाइन तोड़ने के लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अब प्रशासन और जल निगम दोनों ने सख्त रुख अपनाया है।
जल निगम के जिला प्रबंधक शशांक शेखर तिवारी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विभाग जिले में जल संकट दूर करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है, लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा पाइपलाइन से छेड़छाड़ और पानी चोरी की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की जलापूर्ति को प्रभावित कर रही हैं।
5 समूह जल प्रदाय योजनाओं पर चल रहा काम
उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 5 समूह जल प्रदाय योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इनमें से 3 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनके माध्यम से लगभग 700 गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
वहीं शेष दो योजनाएं—बेबस वन और बेबस टू—निर्माणाधीन हैं। इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद जिले के करीब 400 से 450 अतिरिक्त गांव भी पेयजल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। विभाग ने इन परियोजनाओं को वर्ष 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
4 हजार किलोमीटर पाइपलाइन, फिर भी नई बस्तियां बनी चुनौती
जिला प्रबंधक के अनुसार जिले में अब तक करीब 4,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। हालांकि वर्ष 2017-18 में तैयार डीपीआर के बाद कई नए टोले, मजरे और बस्तियां विकसित हो गई हैं, जहां अब तक पाइपलाइन नहीं पहुंच पाई है।
इसी कारण कुछ लोग मुख्य पाइपलाइनों में अवैध टैपिंग कर पानी लेने का प्रयास कर रहे हैं। कई मामलों में खेतों की सिंचाई के लिए बड़ी पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। विशेष रूप से दमोह-पटेरा योजना के अंतर्गत 170 टंकियों तक पानी पहुंचाने वाली मुख्य लाइनें खेतों के बीच से गुजरती हैं, जहां पाइपलाइन तोड़ने या अवैध कनेक्शन लेने की घटनाएं सामने आई हैं।

प्रेशर कम होते ही पकड़ में आती है चोरी
शशांक शेखर तिवारी ने बताया कि विभाग पाइपलाइन नेटवर्क की निगरानी के लिए लगातार प्रेशर मेजरमेंट सिस्टम का उपयोग कर रहा है। किसी भी स्थान पर अवैध टैपिंग या पाइपलाइन टूटने की स्थिति में पानी का दबाव तुरंत कम हो जाता है, जिससे तकनीकी टीम को गड़बड़ी का संकेत मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि पाइपलाइन टूटने या छेड़छाड़ होने के बाद मरम्मत कार्य में 2 से 3 दिन का समय लग जाता है, जिससे आगे जुड़े गांवों में जल संकट की स्थिति निर्मित हो जाती है।
अवैध कनेक्शन पर एफआईआर और जुर्माने की तैयारी
जल निगम ने साफ किया है कि सभी योजनाओं का 10 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) संबंधित फर्मों के जिम्मे है। शिकायत मिलते ही फर्म और विभागीय टीम पुलिस के सहयोग से अवैध कनेक्शन हटाने की कार्रवाई कर रही हैं।
हाल ही में नोहटा थाना क्षेत्र में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विभाग ऐसे लोगों को चिन्हित कर नोटिस जारी कर रहा है और उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा, क्योंकि पानी चोरी और पाइपलाइन क्षति से शासन को सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
पाइपलाइन सुरक्षा के लिए दिन-रात पेट्रोलिंग
मुख्य पाइपलाइनों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने संबंधित फर्मों को लगातार पेट्रोलिंग के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि पाइपलाइन से छेड़छाड़ केवल पानी चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसी भी बड़ी अनहोनी या पानी में रासायनिक मिलावट जैसी आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं।
इसी को देखते हुए अब मुख्य लाइनों की दिन और रात निगरानी कराई जा रही है।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का सख्त संदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने भी प्रशासनिक अधिकारियों और जल निगम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि जहां कहीं भी पाइपलाइन से छेड़छाड़ या पानी चोरी की घटनाएं सामने आएंगी, वहां तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जल निगम के अधिकारियों और जिला प्रबंधक को मौके पर पहुंचकर पूरे नेटवर्क की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक को कराया गया अवगत
कलेक्टर ने कहा कि इस पूरे मामले से जिले के पुलिस अधीक्षक को अवगत करा दिया गया है ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित एफआईआर और कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
थानों और चौकियों में शिकायत नहीं लिए जाने की बात पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में नए पुलिस अधीक्षक के आने के बाद अब ऐसी स्थिति नहीं बनेगी और पुलिस विभाग द्वारा मामलों को गंभीरता से लेकर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
जनता और सरपंचों से सहयोग की अपील
प्रशासन और जल निगम दोनों ने ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सरपंचों से अपील की है कि वे पेयजल योजनाओं की सुरक्षा में सहयोग करें और पाइपलाइन से छेड़छाड़ करने वालों की सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और गांवों की जलापूर्ति बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
