कला, समर्पण और संघर्ष की यात्रा को मिला सम्मान, मालवा की धरती ने अपने प्रतिभाशाली सपूत का किया अभिनंदन
इंदौर, 26 मई 2026। प्रतिभा जब निरंतर अभ्यास से जुड़ती है और समर्पण जब जुनून का रूप ले लेता है, तब उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत नहीं रहतीं, बल्कि समाज, क्षेत्र और संस्कृति की पहचान बन जाती हैं। इंदौर के रवींद्र नाट्य गृह में ऐसा ही गौरवशाली और भावुक क्षण देखने को मिला, जब विश्व स्तर पर अपनी जादुई कला से पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध जादूगर प्रिंस वी.डी. बैरागी को प्रतिष्ठित ‘मालवा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
भव्य समारोह के दौरान उपस्थित समाज के वरिष्ठजनों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, संत-महंतों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने खड़े होकर तालियों की गूंज के बीच प्रिंस वी.डी. बैरागी का सम्मान किया। यह सम्मान उन्हें जादू कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान, वर्षों की साधना, रचनात्मक प्रयोगों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मालवा की पहचान को नई ऊंचाई देने के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का वातावरण केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं था, बल्कि यह मालवा की सांस्कृतिक चेतना, कला के प्रति सम्मान और समाज के सामूहिक गौरव का उत्सव बन गया।
संघर्ष, साधना और सफलता की कहानी बने वी.डी. बैरागी
प्रिंस वी.डी. बैरागी ने अपनी जादुई कला के माध्यम से केवल मंचीय प्रस्तुतियां ही नहीं दीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और समर्पण से कला जगत में अपनी अलग पहचान स्थापित की।
उनकी प्रस्तुतियों ने अनेक मंचों पर दर्शकों को आश्चर्यचकित किया है। कला के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहकर उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिबद्धता और मेहनत के सामने चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जहां नई पीढ़ी तेजी से पारंपरिक कलाओं से दूर होती दिखाई देती है, वहां प्रिंस वी.डी. बैरागी ने जादू कला को नई पहचान देकर युवाओं के लिए प्रेरणा का कार्य किया है।
समाज ने कहा – यह सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, पूरी कला संस्कृति का सम्मान
कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ सामाजिकजनों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं बल्कि उस विचार का सम्मान है, जो प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर प्रयास को आगे बढ़ाता है।
समारोह में प्रकाश वैष्णव (संरक्षक, वैष्णव बैरागी ब्राह्मण समाज संघ), कृष्णा बैरागी (अध्यक्ष, वैष्णव बैरागी ब्राह्मण समाज संघ, इंदौर), डॉ. रोहित बैरागी (प्रदेश अध्यक्ष, रामानंदी नवनिर्माण सेना, मध्यप्रदेश), संजय शर्मा (महासचिव, वैष्णव बैरागी ब्राह्मण समाज संघ), चंद्रभूषण वैष्णव (कोषाध्यक्ष), रामेश्वर दास बैरागी, एम.डी. मंहत, नारायण दास वैष्णव (प्रधान संपादक, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘वैष्णव प्रभा’) और बालकृष्ण त्यागी (प्रधान संपादक, वैष्णव जन टुडे) सहित अनेक सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अतिथियों ने स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और साफा भेंट कर सम्मानित करते हुए कहा कि प्रिंस वी.डी. बैरागी ने अपनी कला से समाज का मान बढ़ाया है और मालवा की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
संत-महंतों की उपस्थिति से मिला आध्यात्मिक आयाम
कार्यक्रम में धार्मिक और सामाजिक समन्वय का सुंदर दृश्य देखने को मिला। संत-महंतों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊर्जा प्रदान की।
वक्ताओं ने कहा कि कला समाज को जोड़ने का माध्यम होती है और जब कला संस्कारों से जुड़ती है तो उसका प्रभाव पीढ़ियों तक दिखाई देता है।
भावुक हुए प्रिंस वी.डी. बैरागी, बोले – “यह सम्मान केवल मेरा नहीं”
‘मालवा गौरव सम्मान’ प्राप्त करने के बाद भावुक नजर आए प्रिंस वी.डी. बैरागी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के विश्वास, प्रेम और समर्थन का परिणाम है जिन्होंने उनके सफर में साथ दिया।
उन्होंने कहा कि कला की यात्रा आसान नहीं होती, लेकिन समाज का विश्वास कलाकार को आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने संपूर्ण समाज, आयोजकों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा।
मालवा की प्रतिभा का राष्ट्रीय सम्मान
‘मालवा गौरव सम्मान’ ने एक बार फिर यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ने वाले कलाकार न केवल स्वयं को स्थापित करते हैं, बल्कि पूरे समाज और क्षेत्र को गौरवान्वित करते हैं।
इंदौर में आयोजित यह समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि वह क्षण बन गया जिसने कला, संस्कृति, सामाजिक एकता और प्रतिभा के सम्मान को एक मंच पर खड़ा कर दिया।
