दमोह, 28 मई 2026/इस्लाम धर्म के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में शामिल ईदुल अज़हा (बकरीद) का पर्व गुरुवार को दमोह जिले में धार्मिक श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों तथा ईदगाहों में नमाजियों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुस्लिम समाज के लोगों ने नए परिधानों में सजकर अल्लाह की इबादत की और मानवता, शांति तथा खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगीं। पूरे जिले में ईद का उत्साह और रौनक देखते ही बन रही थी।

शहर की ऐतिहासिक ईदगाह मस्जिद में ईदुल अज़हा की मुख्य नमाज बड़ी संख्या में उपस्थित मुस्लिम समाज के लोगों ने अदा की। नमाज की इमामत हाफिज़ मुनव्वर रज़ा साहब ने की। नमाज से पूर्व उन्होंने ईदुल अज़हा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व त्याग, समर्पण, इंसानियत और अल्लाह की राह में कुर्बानी देने की भावना का प्रतीक है। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और एक-दूसरे की मदद करने की सीख को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
नमाज के दौरान हजारों हाथ दुआ के लिए उठे और देश की एकता, अखंडता, खुशहाली तथा विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। साथ ही प्रदेश और जिले की तरक्की, किसानों की समृद्धि, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य तथा समाज में सौहार्द कायम रहने की दुआ भी मांगी गई। नमाज के बाद ईदगाह परिसर में भावुक और आत्मीय दृश्य देखने को मिले, जब लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर “ईद मुबारक” कहा और भाईचारे का संदेश दिया।
ईदगाह और मस्जिदों के आसपास सुबह से ही मेले जैसा माहौल बना रहा। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। नए कपड़ों में सजे बच्चे अपने परिजनों के साथ ईदगाह पहुंचे और नमाज के बाद एक-दूसरे को बधाइयां देते नजर आए। कई स्थानों पर लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। परिवारों, रिश्तेदारों और मित्रों के बीच मुलाकातों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
ईदुल अज़हा के अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगरपालिका प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा। ईदगाह परिसर तथा शहर के प्रमुख नमाज स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। यातायात व्यवस्था सुचारू रखने, पेयजल उपलब्ध कराने, साफ-सफाई बनाए रखने और चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और पर्व के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से विशेष सतर्कता बरती गई। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। प्रशासन की मुस्तैदी और समाज के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर शहर ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष आज़म ने जिलेवासियों को ईदुल अज़हा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को मिल-जुलकर समाज में प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनाए रखना चाहिए।
ईदुल अज़हा के अवसर पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मुस्लिम समाज को शुभकामनाएं दीं। कई स्थानों पर सर्वधर्म सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया।
दमोह जिले में मनाया गया ईदुल अज़हा का पर्व एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना में निहित है। धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत इस पर्व ने जिले में प्रेम, एकता और सद्भाव की नई मिसाल प्रस्तुत की।
