प्रेस वार्ता में चिकित्सकों ने बताया—वैक्सीन में जीवित या मृत वायरस नहीं, केवल बाहरी आवरण का अंश; 165 देशों में पहले से हो रहा उपयोग
(डॉ एल एन वैष्णव)
दमोह/ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से होने वाले संक्रमण और उससे बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर लोगों के बीच कई तरह की जिज्ञासाएं और भ्रांतियां सामने आ रही हैं। इन्हीं सवालों और शंकाओं का समाधान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सकों और अधिकारियों ने एचपीवी वैक्सीन के निर्माण, उपयोगिता, सुरक्षा और इसके उद्देश्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी।प्रेस वार्ता में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं सिविल सर्जन डॉ. संगीता त्रिवेदी तथा डॉ. प्रहलाद पटेल उपस्थित रहे। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है और इसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
वैक्सीन के निर्माण को लेकर दी वैज्ञानिक जानकारी
प्रेस वार्ता के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वैक्सीन में न तो जीवित वायरस का उपयोग किया गया है और न ही मृत वायरस को इसमें शामिल किया गया है। इसके स्थान पर वायरस के बाहरी आवरण का केवल एक छोटा सा अंश प्रयोग किया गया है। यही अंश शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर देता है और शरीर उस वायरस के खिलाफ सुरक्षा विकसित कर लेता है।विशेषज्ञों ने बताया कि यह वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है और इसी कारण इस वैक्सीन का उपयोग लंबे समय से दुनिया के अनेक देशों में किया जा रहा है।
विश्व के अनेक देशों में पहले से हो रहा उपयोग
चिकित्सकों ने जानकारी देते हुए बताया कि यह वैक्सीन दुनिया के लगभग 165 देशों में पहले से लगाई जा रही है। कई विकसित देशों में यह टीकाकरण कार्यक्रम वर्षों से चल रहा है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।उन्होंने बताया कि पहले यह टीका केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध था, जहां इसे लगवाने के लिए लोगों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह टीका लगवाना आसान नहीं था।
अब किशोरियों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा टीका
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अब इस टीके को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर देश में उन किशोरियों को यह टीका निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है जिनकी आयु 14 से 16 वर्ष के बीच है।सरकार का उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक किशोरियां इस टीकाकरण के माध्यम से भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रह सकें और समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
गर्भधारण को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी दिया स्पष्टीकरण
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने टीके को लेकर फैली कई भ्रांतियों से जुड़े प्रश्न भी उठाए। एक प्रश्न के उत्तर में चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि एचपीवी वैक्सीन लगने के बाद भविष्य में गर्भधारण करने में किसी प्रकार की समस्या आती है।उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक या प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है जिससे यह सिद्ध हो कि इस टीके का गर्भधारण क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस प्रकार की बातें केवल भ्रम और अफवाह हैं।
कैंसर के कारण बनने वाले वायरस पर करता है प्रभाव
चिकित्सकों ने बताया कि यह वैक्सीन विशेष रूप से उन वायरस प्रकारों पर प्रभाव डालती है जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। टीकाकरण के माध्यम से शरीर में ऐसी प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है जो इन वायरस से होने वाले संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।
बीमारी से पहले बचाव पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बीमार व्यक्ति का इलाज करना ही नहीं, बल्कि लोगों को बीमारी से पहले ही सुरक्षित करना भी है। इसी सोच के तहत टीकाकरण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है।उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक ओर जहां लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिन लोगों को बीमारी का सामना करना पड़ता है उनके इलाज के लिए भी विभिन्न योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरल भाषा में दी गई विस्तृत जानकारी
प्रेस वार्ता के दौरान उपस्थित चिकित्सकों ने एचपीवी वैक्सीन, उसके निर्माण, लाभ, सुरक्षा और टीकाकरण की प्रक्रिया के बारे में सरल और स्पष्ट भाषा में जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।अधिकारियों ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रांति पर विश्वास न करें और सही जानकारी प्राप्त कर ही स्वास्थ्य से जुड़े निर्णय लें। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी ही समाज को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
