जिला मुख्यालय पर कार्यालय खुलने से पुरातात्विक कार्य होंगे आसान, पर्यटन विकास की संभावनाएं भी बढ़ीं
दमोह, 12 मार्च/ जिला मुख्यालय पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उपमंडल कार्यालय का शुभारंभ किया गया। लंबे समय से जिले में इस कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसके शुरू होने से अब जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा उनके विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि दमोह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण जिला है। यहां अनेक प्राचीन मंदिर, धार्मिक स्थल और ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिले में उपमंडल कार्यालय स्थापित होने से इन धरोहरों के संरक्षण और देखरेख के कार्यों में तेजी आएगी।उन्होंने बताया कि पहले पुरातत्व विभाग से जुड़े अधिकांश कार्यों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को जबलपुर जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। अब जिला मुख्यालय पर ही कार्यालय उपलब्ध होने से प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में तेजी आएगी तथा स्थानीय स्तर पर ही निर्णय लिए जा सकेंगे।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा कि दमोह जिले में कई ऐसे स्थल हैं जिन्हें पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है। नोहटा का प्राचीन शिव मंदिर, कोडल का मंदिर, बांदकपुर धाम और कुंडलपुर धाम जैसे धार्मिक स्थल पहले से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन स्थलों के संरक्षण और विकास से जिले में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने बताया कि नोहटा क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सड़क डिवाइडर और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही रानी दमयंती के किले के जीर्णोद्धार की योजना भी बनाई गई है, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां भविष्य में प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है, जिससे पर्यटकों को जिले के इतिहास की जानकारी रोचक तरीके से मिल सकेगी।
ऐतिहासिक स्थलों की खोज और संरक्षण होगा आसान
विधायक जयंत मलैया ने कहा कि दमोह और बुंदेलखंड क्षेत्र प्राचीन इतिहास से समृद्ध है। पांचवीं से आठवीं शताब्दी के कई महत्वपूर्ण अवशेष इस क्षेत्र में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उपमंडल कार्यालय शुरू होने से न केवल पहले से चिन्हित स्मारकों का संरक्षण बेहतर ढंग से हो सकेगा, बल्कि ऐसे नए ऐतिहासिक स्थलों की खोज भी संभव हो पाएगी जो अभी तक व्यापक रूप से सामने नहीं आ सके हैं।उन्होंने पुराने गिरजाघर भवन में कार्यालय स्थापित करने के निर्णय को भी सराहनीय बताया और इसके लिए जिला प्रशासन की प्रशंसा की।
जिले को मिला महत्वपूर्ण संस्थागत ढांचा
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि जिले में पुरातत्व सर्वेक्षण का कार्यालय खुलना एक बड़ी उपलब्धि है। इससे जिले की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि दमोह जिले के कई गांवों में पुराने मंदिर, मठ और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो वर्तमान में जर्जर अवस्था में हैं। इन स्थलों के संरक्षण और पुनरुद्धार की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से दमोह जैसे ऐतिहासिक जिले को एक महत्वपूर्ण सुविधा प्राप्त हुई है।
पुराने गिरजाघर भवन में स्थापित हुआ कार्यालय
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद् शिवाकांत बाजपेयी ने बताया कि उपमंडल कार्यालय को जिस भवन में स्थापित किया गया है, वह ब्रिटिश काल का पुराना भवन है। पहले इसका उपयोग चर्च के रूप में किया जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह भवन उपयोग में नहीं था और स्थानीय लोग इसे गिरजाघर भवन के नाम से जानते हैं।उन्होंने बताया कि दमोह जिले में वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत 14 संरक्षित स्मारक हैं। अब तक इन स्मारकों की देखरेख सागर स्थित उपमंडल कार्यालय के माध्यम से की जाती थी, लेकिन दमोह में अलग कार्यालय स्थापित होने से निरीक्षण, संरक्षण और सर्वेक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आलोक सोनवलकर ने किया।
