मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की पहल को राष्ट्रीय स्वीकृति, दमोह की 26 पंचायतों ने लिखी ग्रामीण विकास की नई इबारत

(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
भोपाल/दमोह /मध्य प्रदेश के दमोह जिले से शुरू हुआ ग्रामीण विकास का एक अभिनव प्रयोग अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर चुका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के मार्गदर्शन में दमोह जिले की 26 ग्राम पंचायतों में तैयार किया गया “विकसित भारत–जी रामजी अधिनियम 2025” का प्रारूप अब पूरे देश की ग्राम पंचायतों के लिए विकास का आधार बनने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भारत सरकार ने इस मॉडल को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए इसे आगामी समय में राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में तैयारी प्रारंभ कर दी है।
जानकारी के अनुसार विकसित भारत–जी रामजी अधिनियम 2025 को देशभर में 1 जुलाई 2026 से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर प्लानिंग शुरू कर दी गई है। भोपाल स्थित विभागीय मुख्यालय में उपयंत्रियों, सहायक यंत्रियों एवं अन्य तकनीकी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए और पूरे देश में एक समान कार्य प्रणाली विकसित की जा सके।
दमोह की 26 पंचायतों ने तैयार किया राष्ट्रीय मॉडल
प्राप्त जानकारी के अनुसार जब इस अधिनियम का प्रारूप तैयार किया जा रहा था, तब भारत सरकार ने विभिन्न राज्यों और जिलों से सुझाव आमंत्रित किए थे। इसी दौरान दमोह जिले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया गया। जिले की 26 ग्राम पंचायतों का विस्तृत विकास प्लान तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया, जिसमें पंचायत स्तर पर विकास की प्राथमिकताओं, स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों के समुचित उपयोग का खाका शामिल था।
बताया जाता है कि दमोह जिले द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और विकास मॉडल का केंद्र स्तर पर गंभीरता से अध्ययन किया गया। इसके बाद इस मॉडल को स्वीकृति प्रदान करते हुए इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया। अब दमोह की रिपोर्ट के आधार पर पहले प्रदेश और उसके बाद पूरे देश की पंचायतों के लिए विकास योजनाओं का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता: गांव स्वयं तय करेंगे विकास की दिशा
विकसित भारत–जी रामजी अधिनियम 2025 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अब विकास योजनाएं केवल सरकारी कार्यालयों में नहीं बनेंगी, बल्कि ग्राम पंचायतें स्वयं अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का एजेंडा तय करेंगी। प्रत्येक पंचायत को वर्ष की शुरुआत में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, कृषि, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित कर विकास योजना तैयार करनी होगी।
योजना के अनुमोदन के बाद उसी के अनुसार कार्य किए जाएंगे। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनावश्यक बदलावों पर रोक लगेगी और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकेगा। ग्रामीण विकास के जानकार इसे पंचायत राज व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
मनरेगा में बेहतर प्रदर्शन का मिला लाभ
सूत्रों का कहना है कि दमोह जिले को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुनने के पीछे मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं में जिले का बेहतर प्रदर्शन भी एक प्रमुख कारण रहा। पंचायत स्तर पर किए गए नवाचार, जनभागीदारी और विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन ने जिले को एक अलग पहचान दिलाई। यही वजह रही कि प्रारंभिक चरण में 26 ग्राम पंचायतों को योजना निर्माण के लिए चुना गया और उनके अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर की नीति का आधार बनाया गया।
विशेषज्ञों की टीम में दमोह को मिला प्रतिनिधित्व
जानकारी के अनुसार भारत सरकार द्वारा अधिनियम का प्रारूप तैयार करने के लिए देशभर के विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए थे। इस प्रक्रिया में दमोह जिले से भी दो विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। इन विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को योजना निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिससे दमोह की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई।
दमोह से जुड़ा है मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का विशेष रिश्ता
वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का दमोह जिले से गहरा राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। वे लगभग एक दशक तक दमोह लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी कर्मभूमि भी दमोह ही रही है। यही कारण है कि ग्रामीण विकास से जुड़ी इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत भी दमोह की धरती से हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्री पटेल की ग्रामीण विकास संबंधी सोच और पंचायतों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता ने इस योजना को जमीन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है, तब यह न केवल मंत्री पटेल के लिए बल्कि दमोह जिले और मध्य प्रदेश के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
देश के लाखों गांवों की बदल सकती है तस्वीर
यदि निर्धारित समय-सीमा के अनुसार विकसित भारत–जी रामजी अधिनियम 2025 लागू होता है तो देश की लाखों ग्राम पंचायतों में विकास की नई कार्य संस्कृति विकसित होगी। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं बनेंगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिनियम केवल एक योजना नहीं बल्कि गांवों को विकास की मुख्यधारा में लाने का एक व्यापक अभियान साबित हो सकता है। दमोह जिले की 26 पंचायतों से शुरू हुआ यह प्रयोग आने वाले समय में भारत के ग्रामीण विकास इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है।
दमोह की धरती पर तैयार हुआ यह मॉडल अब देश के करोड़ों ग्रामीणों के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
