बुजुर्गों के साथ जमीन पर बैठकर खाई खीर, सुनीं समस्याएं, रुकी पेंशन कराई शुरू; आस्था यादव ने युवाओं से कहा— माता-पिता को कभी अकेला न छोड़ें
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)

दमोह। आधुनिक दौर में जहां जन्मदिन समारोह अक्सर होटल, रिसॉर्ट और भव्य आयोजनों तक सीमित होकर रह गए हैं, वहीं दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अपनी पुत्री कु. आस्था यादव का जन्मदिन जिला मुख्यालय स्थित वृद्धाश्रम में मनाकर समाज को संवेदनशीलता, संस्कार और बुजुर्ग सम्मान का अनूठा संदेश दिया। यह आयोजन केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच आत्मीय रिश्तों का ऐसा उदाहरण बन गया जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को भावुक कर दिया।
वृद्धाश्रम में उस समय का दृश्य किसी परिवार के उत्सव से कम नहीं था। वर्षों की उपेक्षा और अकेलेपन का दर्द अपने भीतर समेटे कई वृद्धजनों के चेहरों पर उस समय मुस्कान दिखाई दे रही थी, जब जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी अपनी बेटी के साथ उनके बीच बैठा था। बुजुर्गों के लिए यह केवल जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि अपनेपन और सम्मान का एहसास कराने वाला विशेष अवसर बन गया।
बुजुर्गों के आशीर्वाद से मनाया जन्मदिन
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव अपनी पुत्री आस्था यादव के साथ वृद्धाश्रम पहुंचे तो वहां रह रहे वृद्धजनों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत बुजुर्गों से मुलाकात और उनका आशीर्वाद लेने से हुई। इसके बाद कलेक्टर एवं उनकी पुत्री ने अपने हाथों से सभी वृद्धजनों को खीर और फल वितरित किए।
सबसे भावुक क्षण तब आया जब कलेक्टर और उनकी बेटी सभी औपचारिकताओं को छोड़कर बुजुर्गों के साथ जमीन पर बैठ गए। उन्होंने वृद्धजनों के साथ भोजन किया, उनकी बातें सुनीं और उनके जीवन के अनुभवों को जाना। कई वृद्ध महिलाएं उन्हें अपने बेटे और पोती की तरह दुलारती रहीं। किसी ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया तो किसी की आंखों में अपनेपन की खुशी के आंसू छलक उठे।
भजनों की गूंज और खुशियों का माहौल
जन्मदिन समारोह के दौरान वृद्धाश्रम में भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर भक्ति गीत गाए। जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले गीतों से पूरा परिसर गूंज उठा। कई वृद्ध महिलाओं ने खुशी में नृत्य किया और आस्था यादव को अपने परिवार की बेटी की तरह आशीर्वाद दिया।
वृद्धाश्रम के कर्मचारियों के अनुसार लंबे समय बाद ऐसा अवसर आया जब आश्रम में रह रहे सभी बुजुर्ग इतने प्रसन्न और उत्साहित दिखाई दिए। कार्यक्रम के दौरान कई बार ऐसा लगा मानो पूरा वृद्धाश्रम एक संयुक्त परिवार में बदल गया हो।
“माताओं की आंखों में दर्द देखा था, इसलिए यहां मनाया जन्मदिन”
इस अवसर पर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि पिछली बार वृद्धाश्रम के दौरे के दौरान उन्होंने कई बुजुर्ग माताओं और पिताओं की आंखों में अपने परिवार से दूर रहने का दर्द महसूस किया था।
उन्होंने कहा, “जब मैं यहां आया था तो मैंने देखा कि कई माताएं अपने बच्चों और परिवार को याद करके भावुक हो जाती हैं। उस समय मेरे मन में विचार आया कि यदि कभी अवसर मिले तो अपने परिवार की खुशियां इनके साथ साझा करूंगा। आज मेरी बेटी का जन्मदिन था, इसलिए मुझे लगा कि इससे बेहतर स्थान कोई नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की मुस्कान और उनका आशीर्वाद किसी भी बड़े आयोजन से अधिक मूल्यवान है।
“यहां का कलेक्टर आपका बेटा है”
बुजुर्गों से बातचीत के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का भावुक पक्ष भी सामने आया। उन्होंने वृद्धजनों को संबोधित करते हुए कहा—
“आप सभी स्वयं को कभी अकेला मत समझिए। आप निश्चिंत होकर भगवान का भजन कीजिए। यहां का कलेक्टर आपका बेटा है। आपकी किसी भी समस्या को अनदेखा नहीं किया जाएगा। प्रशासन आपके साथ खड़ा है।”
कलेक्टर के इन शब्दों को सुनकर कई बुजुर्ग भावुक हो गए। कुछ वृद्ध महिलाओं ने कहा कि उन्हें लंबे समय बाद अपने बेटे जैसा अपनापन महसूस हुआ है।
समस्याएं सुनीं और मौके पर कराया समाधान
कार्यक्रम केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। कलेक्टर ने प्रत्येक वृद्धजन से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
इस दौरान कुछ बुजुर्गों ने बताया कि आधार ई-केवाईसी संबंधी तकनीकी कारणों से उनकी पेंशन रुकी हुई है। कलेक्टर ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को बुलाकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए। आधार केंद्र के कर्मचारियों को मौके पर बुलाया गया और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं।
एक वृद्ध महिला ने बताया कि उनकी पेंशन पिछले नौ महीनों से बंद है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर पेंशन पुनः प्रारंभ कराने के निर्देश दिए।
बैंक अब खुद पहुंचेगा वृद्धाश्रम
संवाद के दौरान कई वृद्ध महिलाओं ने शिकायत की कि बैंक शाखाओं में उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण बैंक तक पहुंचना उनके लिए कठिन होता है।
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक माह की 1 और 15 तारीख को बैंक प्रतिनिधि स्वयं वृद्धाश्रम पहुंचें और बुजुर्गों को पेंशन वितरण सहित आवश्यक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराएं।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि बुजुर्गों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
युवाओं को दिया बुजुर्ग सम्मान का संदेश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने समाज के युवाओं और नागरिकों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है।
उन्होंने कहा, “जिन माता-पिता ने हमें चलना सिखाया, जीवन के संघर्षों से लड़ना सिखाया और अपने सपनों का त्याग कर हमें आगे बढ़ाया, उनकी सेवा करना हमारा कर्तव्य है। यदि हम अपने माता-पिता का सम्मान नहीं कर सकते तो हमारी सारी उपलब्धियां अधूरी हैं।”
बुजुर्गों का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी — आस्था यादव
अपने जन्मदिन को लेकर कु. आस्था यादव भी बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के बीच जन्मदिन मनाना उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव रहेगा।
उन्होंने कहा, “आज मुझे इतने सारे दादा-दादी और नाना-नानी का आशीर्वाद मिला है। यह मेरे लिए किसी भी उपहार से अधिक महत्वपूर्ण है। इन सभी के प्यार और स्नेह ने मेरे जन्मदिन को अविस्मरणीय बना दिया है।”
आस्था ने कहा कि वह अक्सर अपने पिता को समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करते हुए देखती हैं और उनसे प्रेरणा प्राप्त करती हैं।
“माता-पिता को कभी अकेला मत छोड़िए”
युवाओं के लिए संदेश देते हुए आस्था यादव ने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक जरूरत अपने बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील होने की है।
उन्होंने कहा, “जिन माता-पिता ने हमें बचपन से संभाला, हमारी हर खुशी के लिए त्याग किया, जब उन्हें हमारी आवश्यकता हो तो हमें उनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मैं सभी युवाओं से आग्रह करती हूं कि अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें, उनका ध्यान रखें और उन्हें कभी अकेला महसूस न होने दें।”
संवेदनशील प्रशासन और मानवीय मूल्यों का प्रेरक उदाहरण
वृद्धाश्रम में आयोजित यह जन्मदिन समारोह प्रशासनिक संवेदनशीलता, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण बन गया जिसने यह संदेश दिया कि पद और अधिकार से बड़ा मानवता का भाव होता है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और उनकी पुत्री आस्था यादव की यह पहल न केवल वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के लिए यादगार बन गई, बल्कि समाज को यह सोचने के लिए भी प्रेरित कर गई कि बुजुर्गों का सम्मान और उनका साथ ही किसी सभ्य समाज की सबसे बड़ी पहचान है।
