दमोह। बुंदेलखंड की मिट्टी, लोककला और सामाजिक यथार्थ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार ने चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द कर्सड क्वीन (अभिशप्त रानियां)’ को अपने प्रतिष्ठित वेव बाजार कैटलॉग में शामिल किया है। दमोह की फिल्म निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रश्मि जेता द्वारा निर्मित यह फिल्म बुंदेलखंड की प्रसिद्ध लोकनृत्य परंपरा राई और उससे जुड़ी नृत्यांगनाओं के जीवन संघर्ष को संवेदनशीलता के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा National Film Development Corporation (एनएफडीसी) के सहयोग से तैयार किए गए वेव बाजार का उद्देश्य भारतीय सिनेमा की विविधता को वैश्विक फिल्म उद्योग तक पहुंचाना है। इस मंच के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में निर्मित उत्कृष्ट फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं, वितरकों, शोधकर्ताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का अवसर मिलता है।
वेव बाजार में शामिल होने के बाद ‘द कर्सड क्वीन’ अब दुनिया भर के फिल्म विशेषज्ञों, डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं की नजरों में आएगी। इससे न केवल फिल्म को व्यापक पहचान मिलेगी, बल्कि बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित विषयों को भी वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं प्राप्त होंगी।
राई नृत्य की अनकही दुनिया को दिखाती है फिल्म
बुंदेलखंड का राई नृत्य अपनी विशिष्ट शैली, लय और लोकजीवन से गहरे जुड़ाव के लिए जाना जाता है। सदियों पुरानी इस लोक परंपरा से जुड़ी नृत्यांगनाओं का जीवन कला और संघर्ष का अनूठा संगम है। सामाजिक उपेक्षा, आर्थिक असुरक्षा और परंपरागत बंधनों के बीच जीने वाली इन महिलाओं की वास्तविक परिस्थितियों को ‘द कर्सड क्वीन’ में बेहद मार्मिक ढंग से चित्रित किया गया है।
फिल्म केवल एक सांस्कृतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि उन अनसुनी आवाजों को सामने लाने का प्रयास है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की चर्चाओं में स्थान नहीं मिल पाता। इसमें राई नृत्यांगनाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं—उनके सपनों, संघर्षों, सामाजिक पहचान और बदलते परिवेश—को करीब से दिखाया गया है।
पहले भी मिल चुके हैं अंतरराष्ट्रीय सम्मान
‘द कर्सड क्वीन’ को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिल चुकी है। फिल्म की विषयवस्तु, प्रस्तुति और संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शकों और समीक्षकों ने विशेष रूप से पसंद किया है।
डॉ. रश्मि जेता लंबे समय से बुंदेलखंड की लोक परंपराओं, कला, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों का निर्माण कर रही हैं। उनकी कोशिश रही है कि क्षेत्रीय विषयों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों तक पहुंचाया जाए।
पूरी टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
फिल्म में मनीष सोनी ने सूत्रधार की भूमिका निभाई है, जबकि संपादन का कार्य नरेंद्र अठ्या ने संभाला है। जूही सोनी की विशेष भूमिका के साथ मधुरकांत गार्डिनियर और दिनेश सिंह का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा है।
बुंदेलखंड के लिए गर्व का क्षण
वेव बाजार में शामिल होने के साथ ही ‘द कर्सड क्वीन’ अब केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान की प्रतिनिधि बन गई है। यह उपलब्धि क्षेत्र के युवा फिल्मकारों, कलाकारों और लोकसंस्कृति से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से क्षेत्रीय कहानियों और लोक कलाओं पर आधारित फिल्मों को नई दिशा मिलेगी। साथ ही, बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत विश्व पटल पर और अधिक मजबूती के साथ स्थापित हो सकेगी।
