कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की कई धाराओं के उल्लंघन उजागर, प्रबंधन से 7 दिन में मांगा जवाब, अब सामान्य श्रम विभाग की दूसरी विंग भी कर रही अलग जांच

दमोह, 26 जून/ दमोह जिले के नरसिंहगढ़ स्थित डायमंड सीमेंट प्रॉपर्टियर हाइडलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड में कार्यरत श्रमिकों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। श्रमिकों की सुरक्षा, ओवरटाइम भुगतान, विश्राम कक्ष और अन्य मूलभूत सुविधाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम विभाग द्वारा फैक्ट्री का विस्तृत निरीक्षण कराया गया। जांच में सामने आए तथ्यों ने श्रमिकों की शिकायतों को काफी हद तक सही साबित कर दिया है।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद फैक्ट्री प्रबंधन को कारखाना अधिनियम, 1948 की विभिन्न धाराओं के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही सात दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि प्रबंधन का उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया तो नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई विस्तृत जांच
कलेक्टर के निर्देशानुसार औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा एवं श्रम विभाग की उपसंचालक माधुरी बरबा द्वारा 20 जून 2026 को फैक्ट्री का विधिवत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में श्रमिकों के बयान दर्ज किए गए तथा विभिन्न अभिलेखों और दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच दल ने ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों सहित कई कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट तैयार की।
सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए जा रहे थे
जांच के दौरान श्रमिकों ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा उन्हें हेलमेट, सेफ्टी शूज, दस्ताने, गॉगल्स, सुरक्षा जैकेट सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। कई श्रमिकों ने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा सामग्री स्वयं खरीदकर काम करना पड़ रहा था। भारी मशीनों और जोखिम वाले क्षेत्रों में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के कार्य करना उनकी मजबूरी बन गया था।
श्रम विभाग ने इसे कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 41 एवं नियम 73(1) का उल्लंघन माना है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना फैक्ट्री प्रबंधन की कानूनी जिम्मेदारी है।

ओवरटाइम कराया, लेकिन नहीं मिला कानूनन भुगतान
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि श्रमिकों से नियमित कार्य अवधि के बाद अतिरिक्त समय तक कार्य कराया जाता रहा, लेकिन उन्हें नियमानुसार दोगुना ओवरटाइम भुगतान नहीं दिया गया। श्रमिकों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर श्रम विभाग ने इसे कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 59 का उल्लंघन माना है।
यदि जांच में यह आरोप पूरी तरह प्रमाणित होते हैं तो प्रबंधन पर आर्थिक दायित्व के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
रेस्ट रूम और भोजन की सुविधा का अभाव
निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि फैक्ट्री परिसर में श्रमिकों के लिए पर्याप्त रेस्ट रूम (विश्राम कक्ष) और लंच रूम की व्यवस्था नहीं थी। दिनभर कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए यह एक गंभीर कमी मानी गई है। श्रम विभाग ने इसे कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 47 का उल्लंघन माना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता के लिए भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था अनिवार्य होती है।
20 से 22 दिन तक लगातार कराया गया कार्य
निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों से प्लांट के विभिन्न विभागों में लगातार 20 से 22 दिनों तक कार्य कराया गया। इस संबंध में श्रमिकों के बयान दर्ज कर दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
प्रबंधन को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फैक्ट्री अधिभोगी एवं फैक्ट्री प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला अथवा जांच में आरोप सही पाए गए तो कारखाना अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी विंग भी कर रही अलग जांच
मामला केवल औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग तक सीमित नहीं है। श्रम विभाग की सामान्य (जनरल) विंग भी पूरे प्रकरण की अलग से जांच कर रही है। इस जांच में श्रमिकों के वेतन, सेवा शर्तों, ठेका श्रमिकों की नियुक्ति, श्रम कानूनों के पालन और अन्य प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार दूसरी जांच रिपोर्ट भी शीघ्र प्राप्त होने की संभावना है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि श्रमिकों के अधिकारों, सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ी हलचल
डायमंड सीमेंट जैसी बड़ी औद्योगिक इकाई के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में भी हलचल तेज हो गई है। श्रम कानूनों का पालन नहीं करने वाले उद्योगों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है।
श्रमिकों को न्याय की उम्मीद
फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिकों ने उम्मीद जताई है कि इस कार्रवाई के बाद उन्हें सुरक्षा उपकरण, नियमानुसार ओवरटाइम भुगतान, विश्राम कक्ष और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उनका कहना है कि पहली बार उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना गया है।
यदि प्रशासन की यह कार्रवाई अंतिम चरण तक प्रभावी ढंग से पहुंचती है तो यह केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए यह स्पष्ट संदेश होगा कि श्रम कानूनों का पालन हर स्थिति में सुनिश्चित करना होगा।
