प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि व दीप प्रज्वलन कर किया शुभारंभ, न्यायालय कर्मियों को किया सम्मानित
(डॉ एल एन वैष्णव)

दमोह, 14 मार्च/जिला मुख्यालय दमोह में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी सहित जिले के लगभग सभी न्यायाधीशगण उपस्थित रहे और लोक अदालत की कार्यवाही में सक्रिय सहभागिता की।कार्यक्रम के दौरान न्यायालय में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को भी न्यायाधीशगणों द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी एवं अन्य न्यायाधीशों ने लोक अदालत के लिए गठित विभिन्न खंडपीठों का निरीक्षण किया। साथ ही न्यायालय परिसर में लगाए गए पंडालों और विभागीय शिविरों का भी अवलोकन किया, जहां बैंक, विद्युत मंडल, नगर पालिका और बीएसएनएल सहित विभिन्न विभागों द्वारा नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैम्प लगाए गए थे।प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने अपने संबोधन में कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सुलभ, सरल और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से ऐसे प्रकरणों का निराकरण आपसी सहमति और समझौते के आधार पर किया जाता है, जिससे लंबित मामलों का शीघ्र समाधान संभव हो पाता है और पक्षकारों के बीच आपसी सौहार्द भी बना रहता है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और इसके विरुद्ध किसी प्रकार की अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे मामले का स्थायी रूप से निपटारा हो जाता है। साथ ही सिविल प्रकरणों और चेक अनादरण जैसे मामलों में जमा की गई कोर्ट फीस भी नियम अनुसार वापस मिल जाती है, जिससे आम लोगों को आर्थिक राहत भी प्राप्त होती है।जिला न्यायालय प्रशासन के अनुसार, इस बार नेशनल लोक अदालत के आयोजन के लिए जिले में कुल 23 खंडपीठों का गठन किया गया है। इनमें जिला मुख्यालय दमोह में 15 खंडपीठ, तहसील न्यायालय हटा में 6 खंडपीठ तथा पथरिया और तेंदूखेड़ा में 1-1 खंडपीठ गठित की गई हैं। इन खंडपीठों में लगभग 560 प्रकरणों के निराकरण के लिए रखा गया है, जिनमें सिविल, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक ऋण, विद्युत बकाया, दूरसंचार और अन्य राजीनामा योग्य मामलों को शामिल किया गया है।
एमएसीटी (मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण) के मामलों में भी बीमा कंपनियों के अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ प्री-सीटिंग कर प्रकरणों के निपटारे का प्रयास किया गया है, ताकि पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा मिल सके। वहीं 50 हजार रुपये से कम राशि वाले एनआई एक्ट के मामलों में भी न्यायाधिकरण के माध्यम से पक्षकारों के साथ चर्चा कर समझौते की दिशा में पहल की गई है।न्यायालय प्रशासन ने बताया कि लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर, लीगल एड क्लीनिक, पंचायतों के माध्यम से मुनादी, पैम्पलेट वितरण और प्रचार वाहनों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया, जिससे अधिक से अधिक लोग इस वैकल्पिक न्याय व्यवस्था का लाभ उठा सकें।
नेशनल लोक अदालत की अवधारणा और उद्देश्य
देशभर में लंबित मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निराकरण के उद्देश्य से नेशनल लोक अदालत की शुरुआत 23 नवंबर 2013 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि ऐसे मामले, जिनका समाधान आपसी सहमति से संभव है, उन्हें न्यायालयों में वर्षों तक लंबित रखने के बजाय आपसी समझौते के माध्यम से शीघ्र निपटाया जाए।इस व्यवस्था के माध्यम से आम नागरिकों को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय उपलब्ध होता है, साथ ही न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रकरणों के निराकरण से दोनों पक्षों की जीत होती है और आपसी विवाद समाप्त होकर सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है। यही कारण है कि आज लोक अदालतें देश की न्याय प्रणाली में वैकल्पिक विवाद निपटान की एक प्रभावी व्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।
