मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन, कॉरिडोर निर्माण में तेजी और कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई की उठेगी मांग
दमोह। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध सिद्ध तीर्थ बांदकपुर धाम में निर्माणाधीन भव्य कॉरिडोर को लेकर जिले में एक बार फिर माहौल गर्माने लगा है। कॉरिडोर निर्माण में हो रही देरी, कथित अतिक्रमण और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं के विरोध में जिले भर के विभिन्न हिंदू संगठनों, धर्मप्रेमियों और शिवभक्तों ने 30 जून, मंगलवार को दमोह में विशाल एकत्रीकरण का आह्वान किया है। आयोजन के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर तथा जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बुंदेलखंड की आस्था का प्रमुख केंद्र है बांदकपुर धाम
दमोह जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित बांदकपुर धाम बुंदेलखंड का प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। यहां विराजमान विशाल स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु वर्षभर पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग द्वारा यहां भव्य कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है।
निर्माण कार्य में देरी से बढ़ रहा श्रद्धालुओं का आक्रोश
श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि लगभग एक वर्ष से कॉरिडोर निर्माण का कार्य जारी है, लेकिन मुख्य प्रवेश क्षेत्र में पर्याप्त भूमि उपलब्ध न होने और कथित अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उनका आरोप है कि कुछ लोग लगातार परियोजना में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं और करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना प्रभावित हो रही है।
कलेक्टर की बैठक में हुआ था तीखा विवाद
कॉरिडोर निर्माण को लेकर गत माह आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की उपस्थिति में पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए थे। बैठक के दौरान हुए विवाद के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुए, जिसके बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद से कॉरिडोर निर्माण में बाधा बन रहे कथित अतिक्रमण को हटाने की मांग और तेज हो गई है।
श्रद्धालुओं का तर्क—देशभर में हुए कॉरिडोर, फिर बांदकपुर में देरी क्यों?
कॉरिडोर समर्थकों का कहना है कि देश के अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विकास, सौंदर्यीकरण और कॉरिडोर निर्माण के लिए आवश्यकतानुसार अतिक्रमण हटाए गए और भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। उनका कहना है कि जब अन्य तीर्थ स्थलों के विकास में प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए हैं, तो बांदकपुर धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के मामले में भी शासन और प्रशासन को नियमानुसार शीघ्र निर्णय लेकर विकास कार्यों को गति देनी चाहिए।
विवादित पक्ष भी रख रहा है अपना पक्ष
जिस व्यक्ति पर कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह वर्तमान में ग्राम पंचायत का सरपंच बताया जाता है। संबंधित पक्ष लगातार स्वयं को निर्दोष बताते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रख रहा है और अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का खंडन करता रहा है। ऐसे में यह मामला प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है तथा अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरण द्वारा लिया जाना है।
30 जून को हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना
आयोजकों के अनुसार, 30 जून को दोपहर 12 बजे दमोह के जटाशंकर मंदिर परिसर के समीप जिले भर से हजारों शिवभक्त, धर्मप्रेमी और विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि एकत्र होंगे। यहां से मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि जिला पुलिस अधीक्षक को दिए जाने वाले ज्ञापन में कॉरिडोर निर्माण में कथित रूप से बाधा उत्पन्न करने वाले तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
आयोजकों ने सभी शिवभक्तों और धर्मप्रेमी नागरिकों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर बांदकपुर धाम के विकास और कॉरिडोर निर्माण के समर्थन में अपनी सहभागिता दर्ज कराने का आह्वान किया है।
