24 घंटे में 33.9 मिमी औसत बारिश, पटेरा में सर्वाधिक 78 मिमी वर्षा दर्ज

मानसून ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन जिले में अब भी सामान्य से कम बारिश
दमोह। जिले में मानसून ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है, हालांकि इस वर्ष अब तक हुई वर्षा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम बनी हुई है। भू-अभिलेख विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 7 जुलाई 2026 तक जिले में 225.5 मिलीमीटर (8.8 इंच) औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुई 364.9 मिलीमीटर (14.3 इंच) औसत वर्षा से 139.4 मिलीमीटर (5.5 इंच) कम है।
बारिश की कमी को देखते हुए किसानों और कृषि विशेषज्ञों की निगाहें आगामी दिनों की वर्षा पर टिकी हुई हैं। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है, ऐसे में जुलाई के शेष दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद की जा रही है।
पटेरा सबसे अधिक भीगा, बटियागढ़ में सबसे कम वर्षा
जिले के सभी वर्षामापी केंद्रों में पटेरा सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र रहा है, जहां अब तक 366.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत बटियागढ़ में सबसे कम 103 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अब तक दर्ज वर्षा (1 जून से 7 जुलाई तक)
- पटेरा – 366.4 मिमी
- पथरिया – 325 मिमी
- हटा – 250 मिमी
- दमोह – 198 मिमी
- जबेरा – 189 मिमी
- तेंदूखेड़ा – 150.2 मिमी
- बटियागढ़ – 103 मिमी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले में वर्षा का वितरण समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
बीते 24 घंटे में औसतन 33.9 मिमी वर्षा
भू-अभिलेख अधीक्षक के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 33.9 मिमी (1.3 इंच) वर्षा दर्ज की गई।
24 घंटे में हुई वर्षा
- पटेरा – 78 मिमी
- हटा – 47.4 मिमी
- पथरिया – 46 मिमी
- जबेरा – 32 मिमी
- दमोह – 26 मिमी
- तेंदूखेड़ा – 4.4 मिमी
- बटियागढ़ – 4.0 मिमी
पटेरा में हुई तेज वर्षा से क्षेत्र के तालाबों, नालों और जल स्रोतों में पानी की आवक बढ़ी है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में हल्की बारिश ही दर्ज की गई।
कृषि पर टिकी निगाहें
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन के लिए जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण होता है। धान, सोयाबीन, उड़द, मूंग और मक्का जैसी फसलों की बुवाई एवं प्रारंभिक वृद्धि के लिए पर्याप्त वर्षा आवश्यक है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश होती है तो किसानों को राहत मिलेगी और फसलों की स्थिति में सुधार होगा।
प्रशासन की लगातार निगरानी
जिला प्रशासन और भू-अभिलेख विभाग लगातार वर्षा की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सभी वर्षामापी केंद्रों से प्रतिदिन आंकड़े संकलित किए जा रहे हैं, ताकि आवश्यकतानुसार किसानों और संबंधित विभागों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
हालांकि मानसून सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में अब भी वर्षा का बड़ा अंतर बना हुआ है। ऐसे में जिले के किसानों की उम्मीदें आने वाले दिनों की अच्छी बारिश पर टिकी हुई हैं।
