कोलारस और रन्नौद में कृषि विभाग के कार्यालयों, मृदा परीक्षण केंद्र, बीज प्रक्रिया केंद्र, पॉलीहाउस और आधुनिक नर्सरियों का किया सघन निरीक्षण, रिकॉर्ड से लेकर बीज गुणवत्ता तक की पड़ताल, अधिकारियों को दो टूक चेतावनी—किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं
शिवपुरी /जिले में कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सशक्त और किसान हितैषी बनाने की दिशा में गुरुवार 9 जुलाई को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कोलारस और रन्नौद क्षेत्र के विभिन्न कृषि संस्थानों का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कृषि विभाग के कार्यालयों, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, बीज प्रक्रिया केंद्र, आधुनिक पॉलीहाउस, जैविक खेती कर रहे प्रगतिशील किसानों के फार्म तथा अत्याधुनिक नर्सरियों का बारीकी से जायजा लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि किसानों से जुड़े प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि मुनेश शाक्य सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने पूरे दौरे के दौरान विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी अनुदान योजनाओं की वास्तविक स्थिति का भी विस्तृत मूल्यांकन किया।
मृदा परीक्षण केंद्र में मशीनों, रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली की गहन जांच
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सबसे पहले कोलारस स्थित मृदा परीक्षण केंद्र का औचक निरीक्षण किया। यहां उन्होंने प्रयोगशाला में स्थापित मशीनों की तकनीकी स्थिति, परीक्षण प्रक्रिया, नमूनों के निष्पादन की गति और रखरखाव व्यवस्था का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि किसानों द्वारा दिए जाने वाले मिट्टी के नमूनों की जांच कितने समय में पूरी होती है और रिपोर्ट किसानों तक किस प्रकार पहुंचाई जाती है।
उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को समय पर मृदा परीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए ताकि वैज्ञानिक सलाह के आधार पर वे उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर सकें। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रहेगी।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अभिलेखों का भी अवलोकन किया गया। उन्होंने कहा कि सभी रिकॉर्ड अद्यतन एवं सुव्यवस्थित होने चाहिए ताकि किसी भी समय जांच या समीक्षा में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। साथ ही कार्यालय परिसर की साफ-सफाई, भवन की मरम्मत और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
एसडीओ कृषि कार्यालय में उपस्थिति रजिस्टर से लेकर फाइलों तक की हुई जांच
इसके बाद कलेक्टर ने कोलारस स्थित एसडीओ कृषि कार्यालय का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी का अवलोकन कर समय पर कार्यालय पहुंचने की व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन सर्वोपरि है और प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को समयबद्ध एवं जिम्मेदारीपूर्ण कार्यशैली अपनानी होगी।
उन्होंने कार्यालय की फाइल व्यवस्था, दस्तावेजों के रखरखाव और विभिन्न योजनाओं से संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी महत्वपूर्ण फाइलें व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखी जाएं ताकि किसी भी योजना अथवा प्रकरण में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि पारदर्शी कार्यालय व्यवस्था से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है।
बीज प्रक्रिया केंद्र में गुणवत्ता पर विशेष जोर
रन्नौद स्थित शासकीय कृषि प्रक्षेत्र के बीज प्रक्रिया केंद्र पहुंचकर कलेक्टर ने बीजों की साफ-सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से केंद्र की भंडारण क्षमता, उपलब्ध बीजों की मात्रा तथा किसानों को वितरण की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों तक केवल प्रमाणित एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीज ही पहुंचने चाहिए। यदि बीजों की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बीज वितरण पूरी तरह पारदर्शी हो तथा पात्र किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराए जाएं।
किसानों तक सीधे लाभ पहुंचाना ही विभाग का मुख्य उद्देश्य
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कहा कि कृषि विभाग की सभी योजनाओं और संस्थानों का उद्देश्य किसानों को बेहतर सेवाएं देना है। इसलिए विभागीय अधिकारी केवल कार्यालयीन कार्य तक सीमित न रहें बल्कि गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद स्थापित करें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रगतिशील किसान के फार्म पर देखा आधुनिक कृषि मॉडल
निरीक्षण के दूसरे चरण में कलेक्टर अर्पित वर्मा बड़ागांव पहुंचे, जहां उन्होंने प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह सेंगर के कृषि फार्म का निरीक्षण किया। यहां संचालित मछली पालन इकाई, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था और जैविक खेती की गतिविधियों का उन्होंने विस्तार से अवलोकन किया।
उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल किसानों की लागत कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इस मॉडल की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी ऐसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
जैविक खेती को बताया भविष्य की आवश्यकता
फार्म पर तैयार किए जा रहे ‘जीवामृत’ का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में जैविक खेती और प्राकृतिक खादों का उपयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को जैविक खेती के लाभों के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
पॉलीहाउस में डच गुलाब और खीरे की उन्नत खेती ने किया प्रभावित
ग्राम मुड़ेरी में प्रगतिशील किसान अमित गुप्ता के पॉलीहाउस का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों की सराहना की। लगभग 8000 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित पॉलीहाउस में डच गुलाब और खीरे की उन्नत खेती की जा रही है।
उन्होंने पॉलीहाउस की संरचना, मिट्टी प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था, माइक्रो स्प्रिंकलर तकनीक तथा उत्पादन प्रणाली का अवलोकन किया और कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसान कम भूमि में भी अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
आधुनिक नर्सरी में मशीनीकरण और ड्रिप तकनीक की सराहना
कोलारस के ग्राम निबोदा में किसान गिरवर रावत की आधुनिक नर्सरी का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने मशीनों के माध्यम से पौध तैयार करने की प्रक्रिया, कोकोपीट आधारित पौध उत्पादन, ड्रिप इरीगेशन और ऑटो फर्टिलाइजेशन सिस्टम का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसान भविष्य की कृषि का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे मॉडल पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।
अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
निरीक्षण के समापन पर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में आधुनिक, जैविक और नवाचार आधारित खेती करने वाले किसानों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही ऐसे सफल मॉडलों का प्रदर्शन अन्य किसानों के बीच कराया जाए ताकि अधिक से अधिक कृषक सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग, गुणवत्तापूर्ण बीज, मृदा परीक्षण, पारदर्शी कार्यप्रणाली और किसानों तक योजनाओं की प्रभावी पहुंच ही जिले की कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
