नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,708.52 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 अंक पर आ गया। इसके साथ ही सेंसेक्स एक बार फिर 78 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।
बाजार में सबसे अधिक दबाव वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों पर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सर्विसेज क्षेत्र के अधिकांश शेयर भी कमजोर रहे। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार की चाल प्रभावित हुई।
हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, फार्मा, हेल्थकेयर, ऊर्जा, धातु, मीडिया, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा और बाजार को आंशिक सहारा मिला।
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, सन फार्मा, आईटीसी, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बीईएल और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 373.70 अंकों की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी 30.15 अंकों की मजबूती के साथ 19,326.45 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा क्षेत्रों और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात लागत, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,370 से 24,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 24,130 से 24,100 अंक का क्षेत्र प्रमुख समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
