वॉशिंगटन। अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं।
यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए “अंतिम नियम” के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था” की जगह लेगा।
15 सितंबर से लागू होगा नया नियम
नए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की शर्तों का पालन करते रहते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में कहा, “इस अंतिम नियम को लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। हम सभी छात्रों को सलाह देते हैं कि वे 8 सितंबर, 2026 से शुरू होने वाली कक्षाओं से पहले न्यूयॉर्क लौट आएं।”
क्या-क्या बदलेगा?
– डीएचएस ने एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय कर दी है।
– नए नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने की छूट 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।
– अगर किसी छात्र को अपनी अवधि बढ़ानी होगी तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से फॉर्म आई-539 के माध्यम से मंजूरी लेनी होगी।
किन छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम?
डीएचएस के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर को पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” के तहत मौजूद होंगे, वे अपने फॉर्म आई-20 में दर्ज कार्यक्रम पूरा होने तक या स्वीकृत ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी/एसटीईएम ओपीटी) की अवधि तक अमेरिका में रह सकेंगे। हालांकि, यह छूट भी नए नियम के लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य होगी और किसी भी स्थिति में 14 नवंबर, 2030 के बाद लागू नहीं रहेगी। इसमें देश छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि भी शामिल होगी।
भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता
नए नियम के बाद भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि इसका असर उनकी पढ़ाई और करियर की योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है, “चार वर्ष की सीमा आधुनिक डिग्री पाठ्यक्रमों के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में लगभग 5.7 वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और उनके निपटारे में करीब एक वर्ष लग रहा है।”
विशेषज्ञों का कहना है, “छात्रों को पढ़ाई या शोध के बीच में ही अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे प्रयोगशालाओं को प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं का नुकसान होगा और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।” एफआईआईडीएस के अनुसार, शोध आधारित कई पाठ्यक्रम, विशेषकर पीएचडी और चिकित्सा शिक्षा, सामान्य तौर पर चार वर्ष से अधिक समय लेते हैं। वहीं, जे-1 श्रेणी के शोधकर्ता और चिकित्सकों को अपना कार्यक्रम पूरा करने में अक्सर पांच से सात वर्ष तक लग जाते हैं।
