दमोह, 25 जुलाई 2026। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही जनहानि को रोकने और जिले में सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिया है। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिले के सभी शासकीय विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब दोपहिया वाहन से कार्यालय आने वाले सभी शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। इस निर्णय का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों एवं गंभीर चोटों को कम करना है।
कलेक्टर श्री यादव ने स्पष्ट कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी विभागों को एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस अवधि में अधिकारी और कर्मचारी स्वयं को नए नियम के अनुरूप तैयार कर लें। इसके बाद यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन से कार्यालय पहुंचता है तो उसे कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया है कि वे अपने कार्यालयों में इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्वयं यातायात नियमों का पालन करेंगे तो आम नागरिकों पर भी उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रशासन चाहता है कि हेलमेट पहनना लोगों की आदत बने, न कि केवल चालान से बचने का माध्यम।
उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले लोग अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में हेलमेट नहीं पहनने के कारण सिर में गंभीर चोट लगती है। यदि सभी लोग हेलमेट का नियमित उपयोग करें तो अनेक दुर्घटनाओं में जान बचाई जा सकती है।
कॉलेज छात्रों के लिए भी विशेष निर्देश
कलेक्टर श्री यादव ने जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भी निर्देशित करने की बात कही है कि वे अपने संस्थानों में हेलमेट पहनने को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाएं। विद्यार्थियों को नियमित रूप से सड़क सुरक्षा के नियमों की जानकारी दी जाए तथा उन्हें दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनकर ही कॉलेज आने के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने कहा कि युवा वर्ग समाज का भविष्य है। यदि विद्यार्थियों में अभी से सुरक्षित वाहन संचालन की आदत विकसित होगी तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी। महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा विषय पर जागरूकता कार्यक्रम, शपथ समारोह, पोस्टर प्रतियोगिता और यातायात नियमों पर विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए जा सकते हैं।
सभी विभागों को जारी होंगे निर्देश
जिला प्रशासन द्वारा सभी शासकीय कार्यालयों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए जा रहे हैं। विभाग प्रमुखों को अपने कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्यता का पालन सुनिश्चित करने, कर्मचारियों को जागरूक करने तथा आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय प्रवेश के समय हेलमेट की जांच कराने के निर्देश दिए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि यदि सरकारी कार्यालयों से इस अभियान की शुरुआत होगी तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पूरे जिले में दिखाई देगा।
जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान को मिलेगी मजबूती
प्रशासन का यह कदम जिले में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और “जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हाल ही में सड़क सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर हुई बैठकों में भी हेलमेट के अनिवार्य उपयोग, यातायात नियमों के पालन और जन-जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया था। अब जिला प्रशासन ने इन निर्णयों को धरातल पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है।
कलेक्टर की अपील
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिले के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि “हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पहनें। एक छोटी-सी सावधानी किसी परिवार की खुशियां बचा सकती है। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।”
इस निर्णय के बाद माना जा रहा है कि दमोह जिला सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।
