20 प्रतिशत नियम का मतलब यह है कि आपके घर की जितनी औसत बिजली खपत है उससे लगभग 20 प्रतिशत अधिक क्षमता वाला सोलर सिस्टम चुनना चाहिए। इसका कारण यह है कि सोलर पैनल हर दिन समान मात्रा में बिजली पैदा नहीं करते। मौसम धूप की तीव्रता बादल बारिश धूल और सर्दियों के छोटे दिनों जैसी परिस्थितियां बिजली उत्पादन को प्रभावित करती हैं। यदि सिस्टम में अतिरिक्त क्षमता होगी तो इन परिस्थितियों में भी आपकी बिजली की जरूरत आसानी से पूरी हो सकेगी।
गर्मियों में एयर कंडीशनर कूलर फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कारण बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है। वहीं सर्दियों में हीटर और गीजर जैसी मशीनें अधिक बिजली खर्च करती हैं। ऐसे समय यदि आपके सोलर सिस्टम में अतिरिक्त क्षमता होगी तो आपको ग्रिड से कम बिजली लेनी पड़ेगी और बिजली बिल में अच्छी बचत होगी।
यह नियम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी बेहद उपयोगी माना जाता है। आज आपके घर में बिजली की खपत सीमित हो सकती है लेकिन आने वाले वर्षों में नया एयर कंडीशनर इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य आधुनिक उपकरण जुड़ने पर बिजली की मांग बढ़ सकती है। यदि शुरुआत में ही पर्याप्त क्षमता वाला सोलर सिस्टम लगाया जाए तो बाद में सिस्टम अपग्रेड कराने का अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
यदि आपके इलाके में नेट मीटरिंग की सुविधा उपलब्ध है तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है। इससे बिजली बिल में और अधिक बचत होती है। कई मामलों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली का आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। इसलिए जरूरत से थोड़ा अधिक क्षमता वाला सिस्टम लंबे समय में अधिक लाभदायक साबित होता है।
सोलर पैनल लगवाते समय केवल पैनल की क्षमता ही नहीं बल्कि इनवर्टर बैटरी वायरिंग और इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाले उपकरण लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करते हैं और रखरखाव का खर्च भी कम रहता है। साथ ही ऐसे स्थान का चयन करें जहां पूरे दिन पर्याप्त धूप मिलती हो और पैनलों पर पेड़ों या इमारतों की छाया न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना बनाकर लगाया गया सोलर सिस्टम कई वर्षों तक कम लागत में बिजली उपलब्ध कराता है। इसलिए जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय अपनी वास्तविक और भविष्य की जरूरतों का आकलन करें और लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त क्षमता वाला सिस्टम चुनें। यह छोटा सा निर्णय भविष्य में बड़ी बचत और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
