सनराइजर्स लीड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 100 गेंदों में चार विकेट के नुकसान पर 142 रन बनाए। टीम की ओर से फोएबे लिचफील्ड ने 31 रन एनाबेल सदरलैंड ने 35 रन ब्रायोनी स्मिश ने 26 रन और कप्तान डैनी गिब्सन ने नाबाद 18 रन की उपयोगी पारी खेली। लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर था लेकिन मंधाना के इरादे उससे भी बड़े थे।
143 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही। कप्तान मेग लैनिंग 24 रन बनाकर आउट हो गईं और इसके बाद लगातार विकेट गिरते रहे। महज 71 रन तक टीम के पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। ऋचा घोष पेज शॉल्फिल्ड और मैडी विलियर्स जैसी प्रमुख बल्लेबाज भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। ऐसे मुश्किल समय में स्मृति मंधाना ने एक छोर संभालकर टीम को जीत की राह पर बनाए रखा।
मंधाना ने शुरुआत से ही संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने केवल 33 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इसके बाद मैच का पूरा रुख बदल दिया। जब आखिरी 25 गेंदों में टीम को 44 रन की जरूरत थी तब मंधाना ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए बड़े शॉट खेलने शुरू किए। भारतीय खिलाड़ी दीप्ति शर्मा की गेंद पर लगाया गया लंबा छक्का मुकाबले का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्हें एक जीवनदान भी मिला जिसका पूरा फायदा उठाते हुए उन्होंने लगातार दो छक्के जड़कर मैच समाप्त कर दिया।
स्मृति मंधाना ने 50 गेंदों में नाबाद 88 रन बनाए जिसमें सात चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उनकी इस पारी की बदौलत मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने चार गेंद शेष रहते चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही और मंधाना की पारी पूरे टूर्नामेंट की सबसे यादगार पारियों में शामिल हो गई।
इस शानदार प्रदर्शन के साथ स्मृति मंधाना ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। नाबाद 88 रन द हंड्रेड 2026 के मौजूदा सीजन का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया। इसके साथ ही यह द हंड्रेड के इतिहास में मंधाना का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है। इससे पहले उनका सर्वोच्च स्कोर 2021 में सदर्न ब्रेव के लिए बनाया गया 78 रन था। इसके अलावा द हंड्रेड में किसी भारतीय बल्लेबाज का यह दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बन गया। इस सूची में शीर्ष स्थान पर जेमिमा रोड्रिग्स हैं जिन्होंने नाबाद 92 रन बनाए थे।
स्मृति मंधाना की यह पारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने यह भी दिखाया कि दबाव की परिस्थितियों में वह अकेले दम पर मैच का परिणाम बदलने की क्षमता रखती हैं। उनकी शानदार फॉर्म भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत है क्योंकि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में उनसे ऐसी ही दमदार पारियों की उम्मीद की जाएगी।
