अब मध्यप्रदेश के हर जिले में घर-घर होगी वृद्धजनों की e-KYC, शासन ने जारी किए निर्देश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव बोले- दमोह मॉडल से हजारों बुजुर्गों को मिलेगा पेंशन का अधिकार
दमोह | 03 अगस्त 2026/मध्यप्रदेश के दमोह जिले में प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘आशीर्वाद अभियान‘ अब पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। पात्र होने के बावजूद केवल e-KYC नहीं होने के कारण पेंशन से वंचित रह गए वृद्धजनों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभिनव अभियान की सफलता को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने इसे प्रदेशव्यापी स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है।
शासन द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार अब प्रदेश के सभी जिलों में दमोह मॉडल के आधार पर घर-घर जाकर वृद्धजनों की नि:शुल्क e-KYC कराई जाएगी, ताकि कोई भी पात्र बुजुर्ग केवल तकनीकी कारणों से पेंशन से वंचित न रहे।
जनसुनवाई की एक घटना से शुरू हुआ प्रदेशव्यापी अभियान
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत किसी पूर्व निर्धारित योजना से नहीं, बल्कि जनसुनवाई में आई एक वृद्ध महिला की समस्या से हुई।
जनसुनवाई के दौरान एक वृद्ध महिला अपने नाती के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। महिला के हाथ में प्लास्टर बंधा हुआ था और कई महीनों से उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद थी। जब सामाजिक न्याय विभाग से कारण पूछा गया तो अधिकारियों ने बताया कि कई बार प्रयास करने के बावजूद महिला की e-KYC नहीं हो सकी और विभागीय पोर्टल पर पंचनामा अपलोड कर दिया गया था कि e-KYC संभव नहीं है।
यह सुनते ही कलेक्टर श्री यादव ने मामले को गंभीरता से लिया और आधार केंद्र प्रभारी तथा जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक को तत्काल निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में महिला की e-KYC पूरी कराई जाए।
हार नहीं मानी टीम ने, कई तकनीकों का किया उपयोग
कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने महिला के हाथ धुलवाए, त्वचा को मुलायम बनाने के लिए क्रीम का उपयोग कराया और सभी दसों उंगलियों से कई बार बायोमेट्रिक प्रयास किए। जब फिंगरप्रिंट से सफलता नहीं मिली तो आईरिस स्कैन और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया गया।
लगातार प्रयासों के बाद उसी दिन महिला की सफलतापूर्वक e-KYC पूरी हो गई और उनकी पेंशन दोबारा स्वीकृत कर दी गई।
कलेक्टर स्वयं पहुंचे महिला के घर, सौंपा पेंशन स्वीकृति आदेश
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब कलेक्टर प्रताप नारायण यादव स्वयं वृद्ध महिला के घर पहुंचे और उन्हें पेंशन स्वीकृति आदेश सौंपा।
जांच में यह भी सामने आया कि महिला को पिछले पांच से छह महीनों से पेंशन नहीं मिली थी। मामले में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी से राशि की वसूली कर ₹4,800 तत्काल महिला के बैंक खाते में जमा कराए गए।
एक मामले ने खोली पूरे जिले की तस्वीर
इस घटना के बाद प्रशासन ने यह समझा कि जिले में ऐसे अनेक बुजुर्ग हो सकते हैं जिनकी पेंशन केवल तकनीकी कारणों से बंद है। इसके बाद सामाजिक न्याय विभाग के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण कराया गया।
ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में सर्वे कर ऐसे सभी पात्र हितग्राहियों की पहचान की गई। सर्वे के दौरान 1664 वृद्धजनों की सूची तैयार हुई, जिनकी e-KYC लंबित थी।
बनी विशेष कार्ययोजना, घर-घर पहुंची प्रशासनिक टीम
अभियान को सफल बनाने के लिए कलेक्टर ने सामाजिक न्याय विभाग, पंचायत विभाग, ई-गवर्नेंस, आधार केंद्र प्रभारियों, पंचायत सचिवों, रोजगार सहायकों तथा अन्य कर्मचारियों की संयुक्त बैठक लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कराई।
निर्णय लिया गया कि सभी वृद्धजनों के घर पहुंचकर उनकी नि:शुल्क e-KYC कराई जाएगी, ताकि उन्हें आधार केंद्रों या सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
वृद्धजनों से नहीं लिया गया कोई शुल्क
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि e-KYC के लिए किसी भी वृद्धजन से कोई शुल्क नहीं लिया गया। आधार केंद्रों पर लगने वाला शुल्क भी एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) के माध्यम से वहन कराया गया।
मैदानी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि e-KYC के दौरान हर संभव तकनीकी विकल्प अपनाया जाए। जरूरत पड़ने पर हाथ धुलवाना, क्रीम या बोरिक पाउडर लगाना, बार-बार फिंगरप्रिंट लेना, आईरिस स्कैन और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सभी सुविधाओं का उपयोग किया जाए।
1638 वृद्धजनों की पेंशन फिर से हुई शुरू
सुनियोजित प्रयासों का परिणाम यह रहा कि 1664 में से 1638 वृद्धजनों की सफलतापूर्वक e-KYC पूरी कर उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन पुनः स्वीकृत कर दी गई। इसके साथ ही पेंशन की राशि उनके बैंक खातों में पहुंचनी शुरू हो गई।
प्रशासन ने केवल e-KYC तक ही अभियान को सीमित नहीं रखा, बल्कि पेंशन स्वीकृति आदेश भी अधिकारियों द्वारा घर-घर पहुंचाकर दिए गए, जिससे वृद्धजनों को सम्मानपूर्वक योजना का लाभ मिल सका।
दमोह मॉडल अब पूरे मध्यप्रदेश में होगा लागू
आशीर्वाद अभियान की उल्लेखनीय सफलता के बाद मध्यप्रदेश शासन ने 29 जुलाई 2026 को सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए दमोह मॉडल के आधार पर इसी प्रकार का अभियान संचालित करने के आदेश दिए हैं।
अब प्रदेशभर में घर-घर जाकर वृद्धजनों की e-KYC की जाएगी, जिससे हजारों ऐसे बुजुर्गों को राहत मिलेगी जिनकी पेंशन केवल तकनीकी कारणों से बंद है।
कलेक्टर बोले- योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासन का उद्देश्य
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक उसका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि दमोह मॉडल इसी सोच का परिणाम है और अब पूरे प्रदेश में लागू होकर हजारों वृद्धजनों के जीवन में नई उम्मीद और सम्मान लेकर आएगा।
उन्होंने कहा कि जब प्रशासन संवेदनशीलता, तकनीक और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करता है, तब छोटे स्तर पर शुरू हुई पहल भी पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन जाती है। दमोह का आशीर्वाद अभियान इसका जीवंत उदाहरण है।
