दमोह , 6 अगस्त 2026/ जिले में लगातार अपने औचक निरीक्षणों से प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने वाले कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार सुबह एक बार फिर ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मचा दी। इस बार उनका काफिला सीधे जिला जेल पहुंचा, जहां बिना किसी पूर्व सूचना के उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। कलेक्टर के अचानक पहुंचने से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और अधिकारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जेल परिसर का विस्तृत भ्रमण किया और सबसे पहले बंदियों से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने एक-एक कर बंदियों से पूछा कि उन्हें समय पर भोजन, नाश्ता, चाय, स्वास्थ्य सुविधाएं, साबुन, तेल, स्वच्छ पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने यह भी जाना कि किसी बंदी को किसी प्रकार की शिकायत या समस्या तो नहीं है।
भोजनशाला पहुंचते ही सामने आई गड़बड़ी
जेल की भोजनशाला का निरीक्षण करते समय कलेक्टर ने भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और मेन्यू का बारीकी से परीक्षण किया। इसी दौरान एक महत्वपूर्ण अनियमितता सामने आई। निर्धारित मेन्यू के अनुसार बंदियों को अरहर की दाल परोसी जानी थी, लेकिन उसकी जगह चना दाल दी जा रही थी।
यह देखकर कलेक्टर ने तत्काल नाराजगी व्यक्त की और जेल उप अधीक्षक एम.एल. पटेल को निर्देश दिए कि शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू का पूरी तरह पालन कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बंदियों को जो सुविधाएं और भोजन शासन ने तय किया है, उसमें किसी प्रकार की कटौती या मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्टॉक रजिस्टर की भी होगी जांच-
कलेक्टर ने भोजन सामग्री के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और खाद्य सामग्री की मात्रा का मिलान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया गया कि निर्धारित मानकों से कम सामग्री दी जा रही है या रिकॉर्ड और वास्तविक व्यवस्था में अंतर है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बंदियों के अधिकारों पर दिया विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि जेल में बंद प्रत्येक व्यक्ति को संविधान और कानून के तहत मिलने वाले सभी मौलिक एवं संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी बंदियों को समय पर आवास, भोजन, साबुन, तेल, स्वास्थ्य सेवाएं तथा निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
“गलती हुई है तो अब नया जीवन शुरू करें”
बंदियों से बातचीत करते हुए कलेक्टर ने उन्हें सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी-कभी जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन सुधार का अवसर हमेशा रहता है। प्रशासन चाहता है कि जेल से बाहर निकलने के बाद सभी बंदी समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। इसके लिए समय-समय पर परामर्श, मार्गदर्शन और पुनर्वास कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
लगातार एक्शन मोड में हैं कलेक्टर-
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव इन दिनों अपने सख्त प्रशासनिक रवैये के कारण लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कलेक्ट्रेट के विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर 48 अधिकारी-कर्मचारियों को अनुपस्थित पाया था, जिसके बाद उनके एक दिन का वेतन काटने के निर्देश जारी किए गए थे।
इसके अलावा उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में बिना हेलमेट दोपहिया चलाने और बिना सीट बेल्ट चारपहिया वाहन चलाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कराई। अब जिला जेल का यह औचक निरीक्षण प्रशासनिक सख्ती की उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
जिले में चर्चा का विषय बना निरीक्षण–
जेल में भोजन व्यवस्था की जांच, बंदियों से सीधा संवाद और छोटी से छोटी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई के निर्देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन अब व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक महकमे में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
