(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। सड़क पर सुरक्षित सफर हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन इसके लिए यातायात नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली असमय मौतों को रोकने और लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दमोह जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाया है। अभियान का दायरा केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को भी यातायात नियमों का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाया जा रहा है।
जिले में हेलमेट, सीट बेल्ट, काली फिल्म, अनधिकृत हूटर, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट तथा मॉडिफाइड साइलेंसर जैसे मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों में यातायात नियमों के प्रति स्थायी जागरूकता पैदा करना और सड़क दुर्घटनाओं को रोकना बताया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट से शुरू हुआ सख्ती का संदेश
हाल ही में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के पालन में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद जिला प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
इसके बाद यातायात पुलिस ने कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के वाहनों की जांच शुरू की। दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट और चारपहिया वाहन चालकों से सीट बेल्ट के उपयोग को लेकर पूछताछ की गई। नियमों का पालन नहीं करने वालों को समझाइश देने के साथ आवश्यक कार्रवाई भी की गई।इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क सुरक्षा के नियम किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान हैं।
अब पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में
यातायात नियमों को लेकर चलाए जा रहे अभियान में अब पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। पुलिसकर्मियों के वाहनों की भी हेलमेट, सीट बेल्ट और काली फिल्म सहित अन्य यातायात नियमों के आधार पर जांच की जा रही है।नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कानून लागू करने वाली एजेंसी के सदस्य भी उन्हीं नियमों का पालन करें, जिनका पालन आम नागरिकों से कराया जा रहा है।
“नियम सभी के लिए बराबर” का संदेश
सड़क सुरक्षा अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि कार्रवाई में किसी प्रकार का भेदभाव न हो। आम नागरिक हो, व्यापारी हो, सरकारी कर्मचारी हो या पुलिसकर्मी—यदि कोई व्यक्ति यातायात नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।प्रशासन और पुलिस का मानना है कि जब सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी स्वयं यातायात नियमों का पालन करेंगे तो इसका सकारात्मक संदेश आम लोगों तक भी पहुंचेगा।
काली फिल्म और हूटर वाले वाहनों पर नजर
यातायात पुलिस द्वारा वाहनों में लगी काली फिल्म को लेकर भी अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे वाहनों की जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है।इसके साथ ही ऐसे वाहनों पर भी नजर रखी जा रही है जिनमें अनधिकृत रूप से हूटर लगाए गए हैं। आम नागरिकों द्वारा निजी वाहनों में हूटर का उपयोग किए जाने के मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।पुलिस द्वारा स्पष्ट किया जा रहा है कि सड़क पर वाहन चलाते समय निर्धारित नियमों और प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।
HSRP नंबर प्लेट नहीं तो कार्रवाई
वाहनों की जांच के दौरान हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी HSRP पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिन वाहनों में निर्धारित हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं पाई जा रही है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।यातायात पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चालकों में भी अब अपने वाहनों के दस्तावेज और नंबर प्लेट संबंधी नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
बुलेट के मॉडिफाइड साइलेंसर बने पुलिस की विशेष निगरानी का केंद्र
दमोह शहर में तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगे बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों के विरुद्ध भी यातायात पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है।मॉडिफाइड साइलेंसर से निकलने वाली तेज आवाज न केवल ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती है, बल्कि सड़क पर अचानक तेज धमाके जैसी आवाज से अन्य वाहन चालकों और राहगीरों में भी असहजता पैदा होती है। कई बार ऐसे वाहन युवाओं के बीच आकर्षण का माध्यम बनते हैं और सड़क पर तेज आवाज के साथ वाहन चलाने की प्रवृत्ति सामने आती है।इसी को देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों को रोककर उनके साइलेंसर जब्त किए जा रहे हैं।
अब तक 100 से अधिक मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त
यातायात पुलिस की कार्रवाई में अब तक 100 से अधिक मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जब्त किए गए साइलेंसरों को सार्वजनिक रूप से नष्ट करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।इसके लिए रोलर के माध्यम से जब्त मॉडिफाइड साइलेंसरों को नष्ट करने की तैयारी की जा रही है। यदि यह कार्रवाई सार्वजनिक रूप से की जाती है तो इसका उद्देश्य वाहन चालकों को स्पष्ट संदेश देना होगा कि नियमों का उल्लंघन कर वाहनों में किए गए अनधिकृत बदलाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में लगातार कार्रवाई
दमोह पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया के निर्देशन में यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।यातायात पुलिस निरीक्षक दलबीर सिंह मार्को एवं आकांक्षा जोशी के मार्गदर्शन में नगर के विभिन्न क्षेत्रों में वाहनों की जांच की जा रही है। अभियान के दौरान पुलिस द्वारा वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी जा रही है।पुलिस की कोशिश है कि कार्रवाई के साथ-साथ लोगों को यह भी समझाया जाए कि हेलमेट और सीट बेल्ट केवल पुलिस कार्रवाई से बचने के साधन नहीं हैं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों में शामिल हैं।
हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर विशेष जोर
दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चारपहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों के लिए सीट बेल्ट को लेकर विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाई जा रही है।सड़क दुर्घटना की स्थिति में हेलमेट सिर में गंभीर चोट के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी प्रकार सीट बेल्ट दुर्घटना के दौरान वाहन के अंदर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यही कारण है कि जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा लोगों से बार-बार अपील की जा रही है कि वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, व्यवहार में बदलाव पर जोर
अभियान का उद्देश्य केवल चालान और जब्ती की कार्रवाई करना नहीं है। प्रशासन चाहता है कि लोगों की यातायात संबंधी आदतों में बदलाव आए।यदि वाहन चालक हेलमेट पहनकर वाहन चलाए, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाए, निर्धारित नंबर प्लेट का उपयोग करे, वाहन में अनधिकृत हूटर और काली फिल्म का इस्तेमाल न करे तथा मॉडिफाइड साइलेंसर से परहेज करे तो सड़क पर दुर्घटनाओं और यातायात संबंधी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है अभियान
दमोह में चल रहे इस अभियान को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो सकती है। विशेष रूप से हेलमेट, सीट बेल्ट, काली फिल्म, हूटर, HSRP और मॉडिफाइड साइलेंसर के मामलों में पुलिस की निगरानी जारी रहने की संभावना है।प्रशासन और पुलिस का संदेश स्पष्ट है—सड़क पर नियमों का पालन करना मजबूरी नहीं, जिम्मेदारी है।
जीवन बचाना ही अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य
सड़क सुरक्षा अभियान के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य किसी वाहन चालक को परेशान करना या केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को सुरक्षित रखना है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार पूरे परिवार की जिंदगी बदल देती है।इसलिए जरूरी है कि यातायात नियमों का पालन पुलिस की कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाए।
“सुरक्षित चलें, नियमों का पालन करें और अपने साथ-साथ दूसरों का जीवन भी सुरक्षित रखें”—दमोह में चल रहे सड़क सुरक्षा अभियान का यही मूल संदेश है।
