करोड़ों की लैब बंद, सागर भेजे जा रहे मीटर; वेतन विवाद में थमा काम
दमोह 18 March/शहर में लागू की गई स्मार्ट मीटर योजना अब उपभोक्ताओं के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। बिजली बिलों में अचानक बढ़ोतरी और जांच व्यवस्था के ठप होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हालात यह हैं कि जिले में स्थापित स्मार्ट मीटर टेस्टिंग लैब पिछले कई महीनों से बंद पड़ी है, जिसके चलते मीटरों की जांच के लिए अब उन्हें सागर भेजना पड़ रहा है।करीब एक करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस लैब का उद्देश्य था कि स्थानीय स्तर पर ही मीटरों की जांच हो सके और उपभोक्ताओं को सही बिल मिल सके। लेकिन लैब पर ताला लटकने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है और जांच प्रक्रिया लंबी हो गई है।
बिलों में उछाल से बढ़ी चिंता
शहर के हजारों उपभोक्ता इन दिनों बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान हैं। कई घरों में पहले जहां 500 से 700 रुपए तक का बिल आता था, अब वही बिल 1500 से 2000 रुपए तक पहुंच रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी बिल कई गुना बढ़ गए हैं।बिजली कंपनी के दफ्तरों में शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन समाधान समय पर नहीं मिल पा रहा। जांच के लिए मीटर बाहर भेजने से समस्या और लंबित हो रही है।
वेतन न मिलने से बंद हुआ काम
सूत्रों के अनुसार टेस्टिंग लैब में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसी कारण उन्होंने काम बंद कर दिया, जिसके बाद से लैब पूरी तरह निष्क्रिय हो गई। इससे महंगी मशीनें भी बेकार पड़ी हैं और उनके खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी असर
बिजली व्यवस्था की समस्याएं केवल शहर तक सीमित नहीं हैं। पथरिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत रजवांस में बकाया बिल के कारण नल-जल योजना का कनेक्शन काट दिया गया, जिससे गांव में पानी की आपूर्ति रुक गई।इसी तरह ग्राम पंचायत बिलानी और ग्राम पंचायत बांसा कला सहित कई पंचायतों में लाखों रुपए के बिजली बिल लंबित हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि योजनाओं का अधूरा हस्तांतरण और जिम्मेदारी स्पष्ट न होने से भुगतान को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
समाधान की उम्मीद
प्रशासन ने पंचायतों को बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं और बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं के समाधान की बात कही है। हालांकि, जब तक स्मार्ट मीटरों की स्थानीय जांच व्यवस्था शुरू नहीं होती, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
