पॉक्सो विशेष न्यायालय का फैसला, विभिन्न धाराओं में सजा के साथ 16 हजार रुपये का अर्थदंड
इंदौर। उप संचालक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) श्रीमती रमा जयंत मित्तल की अदालत ने 11 अगस्त 2026 को थाना लसूडिया से संबंधित विशेष प्रकरण क्रमांक 173/2023 में निर्णय पारित किया। न्यायालय ने नाबालिग बालिका से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी नितिन सप्रे, उम्र 60 वर्ष, निवासी इंदौर को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। वहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए(1)(i) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही न्यायालय ने कुल 16 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुश्री सीमा शर्मा ने पैरवी की।
ट्यूशन पढ़ाने के दौरान घटना का आरोप
अभियोजन के अनुसार, जून 2022 में नाबालिग बालिका द्वारा थाना लसूडिया में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में बताया गया था कि वह कक्षा 9वीं में अध्ययनरत थी और अपने रिश्तेदारों के साथ रहती थी। घर पर ट्यूशन पढ़ाने के लिए आरोपी को बुलाया गया था।प्रेस नोट के अनुसार, ट्यूशन के दौरान घर पर अन्य सदस्य मौजूद नहीं थे। इसी दौरान आरोपी द्वारा बालिका के साथ अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत सामने आई। बालिका द्वारा स्वयं को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया और बाद में घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।
शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था प्रकरण
बालिका के आवेदन के आधार पर थाना लसूडिया में अपराध क्रमांक 883/2022 दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए(1)(i), 354ए(1)(ii) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान संबंधित साक्षियों के कथन दर्ज किए गए और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन ने प्रस्तुत किए 8 साक्षी
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 8 साक्षियों के कथन न्यायालय के समक्ष कराए गए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभिलेखीय सामग्री के आधार पर अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा गया।
उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया और संबंधित धाराओं में सजा सुनाई।
