7 दिन में ही आदेश पर रोक, 10 में से तीन पर कार्रवाई; तबादले और हटाने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
दमोह। मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर सामने आया विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जिला पंचायत की ओर से जारी कार्रवाई के बाद प्रभावित अधिकारियों-कर्मचारियों ने न्यायालय की शरण ली, जहां प्रारंभिक सुनवाई के बाद दो मामलों में हाईकोर्ट ने राहत देते हुए पूर्व की स्थिति बहाल रखने के निर्देश दिए हैं। महज कुछ दिनों के भीतर प्रशासनिक आदेशों पर न्यायिक रोक लगने से पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला जिला ग्रामीण आजीविका मिशन की परियोजना इकाई में पदस्थापना और जिम्मेदारियां बदले जाने से जुड़ा है। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के आधार पर जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) शैलेंद्र श्रीवास्तव को पद से हटाकर उनकी जगह नितेंद्र अहिरवार को जिम्मेदारी दिए जाने का आदेश जारी किया गया था। इसी क्रम में आईसीएस में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर अनुराग सोनी को जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ करने के निर्देश भी जारी हुए थे।इन आदेशों को चुनौती देते हुए संबंधित पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों मामलों में तत्काल राहत प्रदान करते हुए संबंधित आदेशों पर रोक लगा दी। इसके बाद दोनों कर्मचारी अपनी पूर्व पदस्थापना पर बने रहने की स्थिति में आ गए हैं।
पदस्थापना के आदेश पर ही उठ गया बड़ा सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु शैलेंद्र श्रीवास्तव को हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी मूल पदस्थापना वर्ष 2025 में भोपाल स्तर से आदेश जारी होने के बाद हुई थी और वे करीब डेढ़ वर्ष से पद पर कार्यरत थे। ऐसे में उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी देने के लिए किस स्तर से आदेश जारी किया जाना चाहिए था, इसी मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा हुआ।हाईकोर्ट में प्रस्तुत मामले में पदस्थापना प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर किए गए बदलावों की वैधानिक प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है।
कंप्यूटर ऑपरेटर के तबादले पर भी न्यायालय की रोक
दूसरे मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर अनुराग सोनी से जुड़ा आदेश था। उन्हें आईसीएस कार्यालय से हटाकर जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी।इस प्रकार एक ही प्रशासनिक घटनाक्रम से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में न्यायालय से राहत मिलने के बाद अब विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
10 में से तीन पर कार्रवाई, दो मामलों में हाईकोर्ट की राहत
मामले से जुड़े घटनाक्रम में करीब 10 अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात सामने आई थी। इनमें से तीन के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई गई, जबकि दो संबंधित मामलों में हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और उसके आधार क्या थे।फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की स्थिति पहले जैसी हो गई है। हालांकि पूरे प्रकरण में आगे होने वाली सुनवाई और प्रशासनिक निर्णयों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
प्रभारी मंत्री की अनुशंसा से शुरू हुआ मामला अब अदालत तक पहुंचा
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के बाद हुए प्रशासनिक बदलाव से हुई। पहले जिला परियोजना प्रबंधक की जिम्मेदारी बदली गई और इसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर की पदस्थापना में परिवर्तन किया गया। प्रभावित पक्षों ने इन आदेशों को न्यायालय में चुनौती दी और प्रारंभिक स्तर पर ही राहत हासिल कर ली।अब बड़ा सवाल यह है कि आगामी सुनवाई में हाईकोर्ट इस पूरे मामले में प्रशासनिक आदेशों की प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को किस नजरिए से देखता है। फिलहाल अदालत की रोक के चलते दोनों मामलों में पूर्व व्यवस्था कायम है।
