परचम कुशाई के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम, हजारों लोगों ने की शिरकत; निर्धारित मार्ग से होकर घंटाघर पहुंचा जुलूस, प्रशासन और पुलिस ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
दमोह। ईद मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर दमोह शहर में आस्था, उत्साह और आपसी भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों की तरह दमोह में भी मुस्लिम समाज के लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए अमन, शांति और भाईचारे का संदेश दिया।
शहर में ईद मिलादुन्नबी को लेकर सुबह से ही उत्साह का वातावरण दिखाई दिया। पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत मुर्शीद बाबा मैदान में सुबह करीब 7 बजे परचम कुशाई के साथ हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। हजारों की संख्या में लोग सिर पर टोपी लगाए और पारंपरिक वेशभूषा में मैदान में पहुंचे। यहां लोगों ने एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की शुभकामनाएं दीं और देश में अमन-चैन तथा खुशहाली की दुआ की।
मुर्शीद बाबा मैदान से निकला जुलूस
परचम कुशाई के बाद शहर के विभिन्न मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से समाज के लोग एकत्रित होकर जुलूस की शक्ल में निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़े। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। जुलूस के दौरान धार्मिक एवं सामाजिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।जुलूस जिस मार्ग से गुजरा, वहां विभिन्न स्थानों पर लोगों ने स्वागत किया। कई स्थानों पर जुलूस में शामिल लोगों के लिए स्वागत एवं अन्य व्यवस्थाएं की गईं। जुलूस निर्धारित मार्ग से होते हुए शहर के प्रमुख केंद्र घंटाघर पहुंचा।
प्रशासन ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान

ईद मिलादुन्नबी के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। एसडीएम निकेत चौरसिया, तहसीलदार रॉबिन जैन, तहसीलदार पारूल चौधरी सहित राजस्व विभाग की टीम प्रमुख स्थानों पर मौजूद रही और व्यवस्थाओं का जायजा लेती रही।प्रशासनिक अधिकारियों ने जुलूस मार्ग, भीड़ की स्थिति तथा यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण किया। अधिकारियों की मौजूदगी से आयोजन स्थल और प्रमुख चौराहों पर प्रशासन की सक्रियता दिखाई दी।
एसपी ने स्वयं संभाली सुरक्षा व्यवस्था

सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने भी व्यापक इंतजाम किए। पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी स्वयं शहर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते दिखाई दिए। ऊंचे भवनों से दूरबीन के माध्यम से निगरानी के साथ ड्रोन की मदद से भी जुलूस और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी गई।पुलिस अधीक्षक के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडे, सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार, दमोह देहात थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय सहित पुलिस के अनेक अधिकारी एवं जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे।
यातायात व्यवस्था को लेकर भी पुलिस रही सक्रिय
जुलूस के चलते शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए यातायात पुलिस की टीम भी सक्रिय रही। थाना प्रभारी दलबीर मार्को, यातायात थाना निरीक्षक अंजली जोशी सहित यातायात पुलिस के अधिकारी और जवान प्रमुख मार्गों एवं चौराहों पर तैनात रहे।पुलिस टीम ने जुलूस के साथ-साथ आम नागरिकों के आवागमन को भी व्यवस्थित रखने का प्रयास किया। प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती के चलते यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया गया।
शांति और भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हुआ आयोजन
ईद मिलादुन्नबी का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता नजर आया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के लिए किए गए इंतजाम भी पूरे आयोजन के दौरान दिखाई दिए।दमोह में विभिन्न समुदायों द्वारा पर्व और त्योहारों को आपसी भाईचारे के साथ मनाने की परंपरा रही है। ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर भी यही संदेश सामने आया कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था का सम्मान करते हुए पर्वों को गरिमापूर्ण तरीके से मनाया जाए।
आयोजन के बीच उठे सवाल
डीजे की तेज आवाज पर किसकी जिम्मेदारी? शांति समिति के निर्देशों और जमीनी अमल के बीच दूरी क्यों?

ईद मिलादुन्नबी का आयोजन जहां एक ओर शांति, सौहार्द और भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हुआ, वहीं जुलूस और आयोजन के दौरान तेज आवाज में बजने वाले भारी-भरकम डीजे को लेकर भी चर्चाएं सामने आईं।जुलूस में बड़ी संख्या में डीजे शामिल होने तथा शहर की कुछ गलियों में भी तेज आवाज में डीजे बजने की बात लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब विभिन्न त्योहारों और आयोजनों से पहले शांति समिति की बैठकों में ध्वनि प्रदूषण, डीजे की आवाज, समय सीमा और कानून-व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, तो इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी किस स्तर पर है?सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि ध्वनि प्रदूषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। इनका पालन धार्मिक आयोजन हो या सामाजिक कार्यक्रम—सभी के लिए समान रूप से होना अपेक्षित है।
सोशल मीडिया पर भी उठी कार्रवाई को लेकर चर्चा
आयोजन के दौरान डीजे की तेज आवाज को लेकर सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने पुलिस एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना रहा कि यदि किसी आयोजन में नियमों का उल्लंघन होता है तो कार्रवाई के लिए स्पष्ट और समान मापदंड होना चाहिए।इसी संदर्भ में कुछ लोगों ने पूर्व में अन्य आयोजनों के दौरान डीजे के खिलाफ की गई कार्रवाई का उदाहरण भी सोशल मीडिया पर सामने रखा। उनका सवाल था कि यदि पहले नियमों के उल्लंघन पर डीजे जब्त किए जा सकते हैं, तो अन्य आयोजनों में भी उसी तरह की कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
सवाल किसी समाज से नहीं, नियमों के समान पालन से जुड़ा है
यह पूरा विषय किसी धर्म या समाज विशेष के आयोजन पर सवाल खड़ा करने के बजाय प्रशासन की कार्यप्रणाली और नियमों के समान पालन से जुड़ा है। प्रत्येक समुदाय को अपने धार्मिक पर्व और आयोजन श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाने का अधिकार है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण, यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
जनता के बीच अब यह सवाल चर्चा में है कि क्या प्रशासन आने वाले सभी धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में डीजे और ध्वनि सीमा से जुड़े नियमों का एक समान और प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करेगा?ईद मिलादुन्नबी का शांतिपूर्ण आयोजन दमोह की सामाजिक एकता और भाईचारे का सकारात्मक संदेश देता है, लेकिन डीजे और नियमों के पालन को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए भविष्य की व्यवस्थाओं को और बेहतर तथा समान बनाने का अवसर भी हैं।
