दमोह। जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र के चीलघाट में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे में नदी में समाए 18 चक्का ट्राला से करीब 24 घंटे बाद चालक और क्लीनर के शव बरामद कर लिए गए। दोनों मृतकों की पहचान विदिशा जिले के त्योंदा थाना क्षेत्र के सुन्नंता निवासी के रूप में हुई है। हादसे के बाद से ट्राला को नदी से बाहर निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात सीमेंट से लदा 18 चक्का ट्राला चीलघाट नदी के पुल की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 40 फीट नीचे जा गिरा। हादसे के बाद ट्राला नदी में इस तरह समा गया कि उसके पहिए ऊपर की ओर दिखाई दे रहे थे, जबकि केबिन पानी के भीतर पूरी तरह दब गया था। दुर्घटना इतनी अचानक हुई कि चालक और क्लीनर को संभलने या वाहन से बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।
हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सड़क से गुजर रहे वाहन भी रुक गए। ग्रामीणों ने तत्काल कुम्हारी थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कुछ ही समय बाद एसडीआरएफ की टीम को भी रेस्क्यू के लिए बुलाया गया।नदी में पानी और ट्राला का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा। एसडीआरएफ की टीम ने काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर भारी क्षमता वाली क्रेन की मदद ली गई। करीब 24 घंटे तक चले अभियान के बाद शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 2 से 4 बजे के बीच ट्राला के केबिन से दोनों शव बाहर निकाले जा सके।
कुम्हारी थाना प्रभारी बृजेश पांडे के अनुसार मृतकों की पहचान 23 वर्षीय चालक अभिषेक पुत्र सुरेश तथा 38 वर्षीय क्लीनर तुलसी भाई पुत्र गणेश, दोनों निवासी सुन्नंता थाना त्योंदा, जिला विदिशा के रूप में हुई है।पुलिस के मुताबिक ट्राला सतना से सीमेंट लेकर इंदौर की ओर जा रहा था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि रात के समय चालक को नींद का झपका आने के कारण वाहन अनियंत्रित हुआ और पुल की रेलिंग तोड़ते हुए नदी में जा गिरा। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।बताया जा रहा है कि ट्राला में करीब 35 से 40 टन सीमेंट लदा हुआ था। भारी बारिश के कारण क्षेत्र की सड़क कई स्थानों पर खराब होने और जगह-जगह गड्ढे होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सड़क की स्थिति भी हादसे की संभावित वजहों में शामिल हो सकती है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।वहीं हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती नदी में गिरे भारी-भरकम ट्राला को बाहर निकालना बनी हुई है। दमोह में पर्याप्त क्षमता की क्रेन उपलब्ध नहीं होने के कारण जबलपुर से बड़ी क्रेन मंगाई गई है। क्रेन की मदद से ट्राला को नदी से बाहर निकालने का काम किया जा रहा है।
