मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 7 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारी की बहाली पर रोक रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने की बात कही गई है।
यह विवाद वर्ष 2022 का है। रिंकू दुग्गा 1994 बैच की एजीएमयूटी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन पर आरोप लगा था कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को इस वजह से खाली करवाया गया, ताकि वह वहां अपने कुत्ते को टहला सकें और उस दौरान दूसरे लोगों को स्टेडियम में आने की अनुमति न हो।
इस घटनाक्रम के दौरान उनके पति संजीव खैरवार भी उनके साथ मौजूद थे। संजीव खैरवार भी आईएएस अधिकारी हैं। स्टेडियम से जुड़ी तस्वीर और घटना की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया और इसे लेकर विवाद खड़ा हुआ।
बाद में केंद्र सरकार ने रिंकू दुग्गा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। इस फैसले को उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी सीएटी के समक्ष चुनौती दी। सीएटी ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया था।
इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को सीएटी के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत रिंकू दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। इसके बाद उनकी सेवा में बहाली का रास्ता खुल गया था।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अब हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में रिंकू दुग्गा को नोटिस भी जारी किया है।
इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बहाली पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में केंद्र की चुनौती और रिंकू दुग्गा की सेवा से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया सामने आएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के आधार पर उनकी बहाली पर रोक लागू रहेगी, जिसने केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को खारिज किया था।
