पुराने विवाद ने लिया खूनी रूप, इंदर वर्मा की हत्या के मामले में न्यायालय का कड़ा फैसला; अपराध के बाद शव छिपाने की कोशिश भी पड़ी भारी
इंदौर। आपसी विवाद और समझौते के नाम पर शुरू हुआ घटनाक्रम आखिरकार एक व्यक्ति की हत्या में बदल गया। वर्ष 2019 में थाना एरोड्रम क्षेत्र में हुई इंदर वर्मा की हत्या के मामले में न्यायालय ने करीब सात वर्ष बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या के साथ-साथ शव को ठिकाने लगाने के अपराध को भी गंभीरता से लेते हुए सभी आरोपियों को सात वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर 8-8 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल ने 9 सितंबर 2026 को थाना एरोड्रम के सत्र प्रकरण क्रमांक 433/2020 में यह फैसला सुनाया। दोषी ठहराए गए आरोपियों में संगीता पति गब्बर गौड़, रोहित उर्फ लालू, राजेश बौरासी, बबलू मालवीय, अजय उर्फ कालू भोई तथा करण उर्फ भूरी शामिल हैं।अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह वास्केल ने न्यायालय के समक्ष मामले की पैरवी की। उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन के पक्ष को सुनने के बाद आरोपियों को दोषी पाया।
मामला 24 दिसंबर 2019 की सुबह सामने आया, जब कमल तेलंग काम पर जाने के दौरान अम्बिकापुरी कॉलोनी के बगीचे के पास पहुंचा। वहां उसने करीब 35 से 40 वर्ष उम्र के एक अज्ञात व्यक्ति को पड़ा देखा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी थी।पुलिस ने घटनास्थल की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल अधिकारी और शासकीय फोटोग्राफर को बुलाया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और आवश्यक छायाचित्र लिए गए। मृतक के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले। उसके नाक और मुंह पर लाल रंग का दुपट्टा बंधा था तथा हाथ में प्लास्टिक की पट्टी बंधी हुई थी।
प्रारंभिक जांच में ही पुलिस को संदेह हुआ कि व्यक्ति की हत्या घटनास्थल पर नहीं हुई, बल्कि किसी अन्य स्थान पर हत्या करने के बाद शव को यहां लाकर फेंका गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की।अगले दिन मृतक की पहचान इंदर वर्मा, उम्र 33 वर्ष, निवासी अभिषेक नगर क्षेत्र के रूप में उसकी पत्नी सीमा वर्मा ने की। पोस्टमार्टम और मर्ग जांच से मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 302 और 201 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को मृतक के पुराने विवाद से जुड़े लोगों के संबंध में जानकारी मिली। अभियोजन के अनुसार, पूछताछ और सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि इंदर को पुराने विवाद को समाप्त करने और समझौते की बात के लिए बुलाया गया था।
अभियोजन के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और इंदर के साथ डंडों तथा चाकू से मारपीट की गई। गंभीर चोट लगने के बाद वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। इसके बाद आरोपियों ने उसे मृत समझ लिया और शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।जांच के मुताबिक, शव के हाथ बांधे गए और उसके मुंह तथा गले पर कपड़ा बांधा गया। इसके बाद शव को दोपहिया वाहन के माध्यम से अम्बिकापुरी क्षेत्र की खाली जमीन तक ले जाया गया और वहां फेंक दिया गया।पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्य एकत्र किए। गवाहों के कथन दर्ज किए गए और संपूर्ण विवेचना के बाद अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में चले विचारण के दौरान अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्थापित करने का प्रयास किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने छहों आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी माना और धारा 302 सहपठित धारा 149 भारतीय दंड संहिता के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 201 के तहत प्रत्येक आरोपी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और 8-8 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
फैसला समाज के लिए भी एक स्पष्ट संदेश
इस मामले का न्यायालयीन फैसला केवल एक हत्या के प्रकरण में सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि आपसी विवाद, पुरानी रंजिश या समझौते की आड़ में कानून अपने हाथ में लेने का परिणाम गंभीर हो सकता है। विवाद कितना भी पुराना क्यों न हो, उसका समाधान हिंसा के माध्यम से करने का अधिकार किसी को नहीं है।
हत्या के बाद शव को छिपाने या घटनास्थल बदलकर पुलिस जांच को गुमराह करने का प्रयास भी अपराध की गंभीरता को कम नहीं करता। आधुनिक जांच तकनीक, वैज्ञानिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और पुलिस विवेचना के माध्यम से अपराध की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं।न्यायालय का यह निर्णय उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो आपसी विवादों को बातचीत या कानूनी प्रक्रिया के बजाय हिंसा के रास्ते से सुलझाने की कोशिश करते हैं। कानून से बचने के लिए अपराध के बाद उठाया गया हर कदम अपराध की गंभीरता को और बढ़ा सकता है।इस प्रकरण में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि गंभीर अपराधों में समय लगने के बावजूद साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दोषियों तक पहुंचना संभव है।
